कृषि (Agriculture)
महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ एवं विषयनिष्ठ प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
भारत सबसे बड़ा उत्पादक देश होने के साथ-साथ निम्न में से किस फसल का उपभोक्ता भी है ?
सरकार निम्नांकित में से कौन-सी घोषणा फसलों को सहायता देने के लिए करती है ?
भारत में धान की खेती मुख्य रूप से किस फसल ऋतु में की जाती है।
मानसून के आगमन के साथ जो फसलें बोई जाती हैं, किस फसल के अंतर्गत आती हैं ?
सुनहरा रेशा किस फसल को कहा जाता है ?
भारत में जूट उत्पादन में किस राज्य का महत्त्वपूर्ण स्थान है ?
विषयनिष्ठ प्रश्नोत्तर (Subjective)
उत्तर- भारतीय कृषि की दो विशेषताएँ-
(क) उत्पादन में खाद्य पदार्थों की अधिकता रहती है।
(ख) खेती में पशु मुख्य भूमिका निभाते हैं।
उत्तर- मानसून के आगमन के साथ जून-जुलाई में बोई जाने वाली और अक्टूबर-नवम्बर में काटी जाने वाली फसलें खरीफ फसलें कहलाती हैं।
मोटे अनाज (मिलेट) से तात्पर्य है पहाड़ी, पथरीली या कम उपजाऊ भूमि पर उगाई जानेवाली फसलें, जिनमें कुछ खाद्यान्न हैं और कुछ चारे की फसलें। ज्वार, बाजरा, रागी (मडुआ) और मकई की गिनती मोटे अनाजों में की जाती है।
उत्तर-भारत में रबी और खरीफ फसल में अंतर-
रबी फसलें:
(a) यह फसली मौसम शीतकाल के आरंभ से शुरू होता है तथा ग्रीष्म काल के आगमन तक चलता है।
(b) इस मौसम का समय अक्टूबर-नवम्बर से मार्च-अप्रैल तक रहता है।
(c) इस ऋतु में गेहूँ, जौ, चना, तिलहन। जैसे- अलसी तोरिया, सरसों आदि उत्पन्न किये जाते हैं।
खरीफ फसलें:
(a) यह फसली मौसम मानसून के आगमन से शुरू होता है तथा शीतऋतु के प्रारंभ तक चलता है।
(b) इस मौसम का समय जून-जुलाई से लेकर अक्टूबर-नवम्बर तक चलता है।
(c) इस मौसम में उत्पन्न होने वाली प्रमुख कृषि फसलें चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, कपास, मूँगफली, मूंग, उड़द आदि हैं।
उत्तर : (1) प्रारंभिक जीवन निर्वाह या आत्मनिर्वाह कृषि में परिवार के सदस्य अपनी न्यूनतम आवश्यकता की पूर्ति के लिए कृषि कार्य करते हैं। इसमें भूमि का आकार काफी छोटा होता है।
(2) प्रारंभिक जीवन निर्वाह कृषि का ढंग परंपरागत होता है अर्थात् इसमें हल तथा अन्य पुराने औजारों का इस्तेमाल किया जाता है।
(3) आत्मनिर्वाह कृषि में संलग्न कृषक सामान्यतः निर्धन होते हैं।
(4) आत्मनिर्वाह कृषि में आधुनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जाता है।
(5) इसमें सिंचाई की उन्नत व्यवस्था का अभाव होता है तथा किसान सिंचाई के लिए मानसून पर निर्भर होते हैं। आत्मनिर्वाह कृषि में उत्पादकता का स्तर काफी निम्न होता है
उत्तर: चावल भारत की प्रमुख खाद्य फसल है। इसके लिए उपयुक्त परिस्थितियाँ हैं:
(i) तापमान: 25°C से ऊपर का उच्च तापमान।
(ii) वर्षा: 100 सेमी से अधिक वार्षिक वर्षा और उच्च आर्द्रता। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में इसे सिंचाई के माध्यम से उगाया जाता है।
(iii) मिट्टी: जलोढ़ मिट्टी (Alluvial soil) इसके लिए सबसे उपयुक्त होती है।
उत्तर: गेहूं भारत की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है। इसके लिए आवश्यक परिस्थितियाँ हैं:
(i) जलवायु: इसे उगाने के लिए शीत ऋतु और पकने के समय खिली धूप की आवश्यकता होती है।
(ii) वर्षा: 50 से 75 सेमी समान रूप से वितरित वार्षिक वर्षा।
(iii) उत्पादक राज्य: पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान।
उत्तर: चाय एक प्रमुख पेय फसल है। इसे उगाने के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ हैं:
(i) जलवायु: चाय का पौधा उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु में अच्छी तरह उगता है। इसे साल भर नम और पाला रहित जलवायु की आवश्यकता होती है।
(ii) मिट्टी: गहरी, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी जिसमें ह्यूमस और जीवांश की प्रचुरता हो।
(iii) वर्षा: साल भर समान रूप से होने वाली वर्षा की बौछारें इसकी पत्तियों के विकास के लिए लाभदायक होती हैं।
उत्तर : भारतीय कृषि पर वैश्वीकरण के प्रभाव -
(1) वैश्वीकरण के कारण भारतीय किसान अपने यहाँ अधिक होने वाले कृषि उत्पाद को विश्व बाजार में बेचकर अच्छे दाम प्राप्त कर सकते हैं।
(2) विश्व की माँग के अनुसार नकदी एवं कीमती फसलों की खेती में वृद्धि।
(3) ढाँचागत सुधार, प्रौद्योगिकी में परिवर्तन, बाजार सुविधा तथा साख का विस्तार।
(4) बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा कृषि क्षेत्र में निवेश में वृद्धि से किसानों को लाभ।
(5) कृषि वैज्ञानिकों के सहयोग से देश में नये फसलों का विकास। जेनेटिक इंजीनियरिंग द्वारा फसलों के उत्पादन में वृद्धि।
(6) प्रमुख कृषि उत्पादों को निर्यात की स्वतंत्रता दी गयी है। बाजार सुविधा, क्रेडिट कार्ड का विस्तार आदि के कारण आधुनिक निवेशों में वृद्धि हुई है।
(7) जब विभिन्न फसलों की माँग विश्वभर में बढ़ेगी तो माँग बढ़ने से चीजों का उत्पादन भी अधिक होगा और किसानों की स्थिति में सुधार होगा।
उत्तर : भारतीय कृषि में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा निम्नलिखित उपाय किये गये हैं-
(1) सरकार, किसानों को कम मूल्य पर उर्वरक, उन्नत बीज, विद्युत, जल आदि की सुविधाएँ प्रदान करती है।
(2) किसानों की बिखरी भूमि को एक स्थान पर लाने के उद्देश्य से भूमि की चकबंदी की गयी।
(3) किसानों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए ग्रामीण बैंक, सहकारी बैंक आदि की स्थापना की गयी है। सरकार द्वारा फसल बीमा की भी व्यवस्था की गयी है।
(4) सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नहरों एवं तालाबों की व्यवस्था की गयी है।
(5) कृषि के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण अनुसंधान किये गये हैं। राष्ट्रीय बीज निगम, भारतीय खाद्य निगम, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, कृषि विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालय, डेयरी विकास बोर्ड आदि जैसी संस्थाओं की स्थापना कृषि की दशा सुधारने में सहायक रही है।
(6) किसानों के लाभ के लिए किसान क्रेडिट कार्ड शुरू किया गया है।
(7) फसलों के मूल्य में सहायता के लिए सरकार न्यूनतम सहायता मूल्य घोषित करती है।