जल संसाधन
महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ एवं विषयनिष्ठ प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
नर्मदा बचाओ आंदोलन का नेतृत्व किसने किया था ?
निम्नांकित में से कौन सुमेलित नहीं है ?
कौन-सी परियोजना सतलुज-व्यास बासन में जल-विद्युत उत्पादन और सिंचाई दोनों के काम में आती है ?
पश्चिमी भारत के विशेषकर किस राज्य में पीने का जल एकत्रित करने के लिए 'छत वर्षा जल संग्रहण' का तरीका आम था ?
जल की कमी के क्या कारण हैं ?
चौदहवीं शताब्दी में किसने दिल्ली में सिरी फोर्ट क्षेत्र में जल की सप्लाई के लिए हौज खास का निर्माण करवाया ?
विषयनिष्ठ प्रश्नोत्तर (Subjective)
उत्तर: जल यद्यपि प्रकृति का असमाप्त होने वाला उपहार है फिर भी असमान वितरण, अत्यधिक माँग एवं दुरुपयोग के कारण जल-स्तर लगातार नीचे जा रहा है तथा जल दुर्लभ होता जा रहा है। जल की कमी की इस समस्या को जल दुर्लभता कहते हैं।
जल संरक्षण के उपाय- जल का प्रयोग बड़े ध्यान से करना चाहिए और इसके महत्व को समझना चाहिए।
(क) जल को संशोधित करके इसे बार-बार प्रयोग में लाया जा सकता है।
(ख) वर्षा के दिनों में जो जल व्यर्थ में बहकर समुद्र में चला जाता है उसे नहरें खोदकर सिंचाई के रूप में प्रयोग में लाया जा सकता है।
(ग) बड़े-बड़े गहरे तालाब बनाकर इस पानी को एकत्रित किया जा सकता है और गर्मी के महीनों में जल का प्रयोग सिंचाई अथवा अन्य कार्यों में किया जा सकता है।
(घ) पानी का संरक्षण करके हम अधिक उपज पैदा कर सकते हैं और अधिक बिजली पैदा करके हम कोयले और तेल जैसे अनापूर्ति स्रोतों को बचा सकते हैं। जल प्रकृति की महान देन है इसलिए इसका उपयोग बड़ी समझदारी से करना चाहिए
Ans-वर्षा जल संग्रहण भूमिगत जल की क्षमता को बढ़ाने की तकनीक है। इसमें वर्षा के जल को रोकने और इकट्ठा करने के लिए विशेष ढाँचों जैसे- कुएँ, गड्डे, बाँध आदि का निर्माण किया जाता है। इसके द्वारा न केवल जल का संग्रहण होता है, अपितु जल को भूमिगत होने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ पैदा हो जाती है।
उत्तर : जल का नवीकरण और पुनर्भरण जलीय चक्र द्वारा होता रहता है। सम्पूर्ण जल नवीकरण योग्य है और जल चक्र में गतिशील रहता है। इसलिए नवीकरण सुनिश्चित होता है।
* सूर्य की गर्मी के कारण जल का वाष्पीकरण होता है। जलवाष्प हवा में संघनित होकर बादलों में बदल जाता है।
* यह संघनित जलवाष्प वर्षा अथवा बर्फ के रूप में धरती पर गिरता है।
* धरती से जल दुबारा सागरों में पहुँचता है फिर जल का वाष्पीकरण होता है।
* इस प्रकार जलीय चक्र सदैव गतिशील रहता है।
उत्तर: असमान वितरण, अत्यधिक माँग प्रदूषण एवं दरुपयोग के कारण जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है तथा जल की कमी हो रही है पानी की कमी की इस समस्या को जल दुर्लभता कहते हैं।
उत्तर: पानी यद्यपि प्रकृति का असमाप्त होने वाला उपहार है फिर भी असमान वितरण, अत्यधिक माँग एवं दुरुपयोग के कारण जल-स्तर लगातार नीचे जा रहा है तथा जल दुर्लभ होता जा रहा है। पानी की कमी की इस समस्या को जल दुर्लभता कहते हैं।
जल के अभाव अथवा जल दुर्लभता के कारण -
(1) वर्षा जल को संग्रहीत करने की परंपरा विकसित नहीं हुई है जिसके परिणामस्वरूप वर्षा जल बेकार चला जाता है। वर्षा जल का मात्र 8.5 प्रतिशत ही उपयोग में लाया जाता है।
(2) जनसंख्या में भारी वृद्धि जल के अभाव का एक महत्त्वपूर्ण कारण है। जल का दुरुपयोग भी जल की दुर्लभता को जन्म देता है।
(3) उपलब्ध जल का एक बड़ा हिस्सा गंभीर रूप से प्रदूषित है अर्थात् उपयोग में लाने योग्य नहीं है।
(4) भूमिगत जल-स्तर लगातार गिरता जा रहा है। इससे जल प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है।
उत्तर : बाँध बहते जल को रोकने, दिशा देने या बहाव कम करने के लिए खड़ी की गयी बाधा है जो साधारणतया जलाशय, झील अथवा जलभरण बनाती है।
उत्तर : नदी पर बाँध बनाकर इससे अनेक प्रकार के उद्देश्य को पूरा करना बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना कहलाता है। जैसे- बाढ़ नियंत्रण, जल विद्युत निर्माण,जलापूर्ति, सिंचाई प्रबंधन आदि।
उत्तर : नदियों पर बाँध के निर्माण से संबंधित परियोजना को नदी घाटी परियोजना कहा कहा जाता है। जब ऐसी परियोजनाओं का निर्माण एक से अधिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जाता है तो उन्हें बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना के नाम से जाना जाता है।
बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं के उद्देश्य -
(1) बाढ़ नियंत्रण और मृदा संरक्षण।
(ii) जल-विद्युत तैयार करना।
(iii) सिंचाई के लिए नहरें निकालना।
(iv) मत्स्य पालन।
(v) नगरीय जल आपूर्ति करना।
(vi) जल परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराना।
उत्तर : बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं से लाभ सिंचाई, विद्युत उत्पादन, घरेलू और औद्योगिक उपभोग के लिए जल आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण, मनोरंजन, आन्तरिक नौ संचालन तथा मत्स्यपालन आदि।
हानियाँ : लोगों का विस्थापन होना, नदी जलीय आवासों में भोजन की कमी, जलाशय की तली में तलछट जमा हो जाना तथा प्राकृतिक बहाव अवरुद्ध होना आदि समस्यायें उत्पन्न होती हैं।
उत्तर : यद्यपि बहुउद्देशीय परियोजनाओं का निर्माण विभिन्न प्रकार के लाभों के लिए किया जाता है, फिर भी इसके कुछ पहलू ऐसे हैं, जिनके कारण ये परियोजनाएँ विवादों के घेरे में आ गयीं। ये पहलू निम्नलिखित हैं -
(1) बहुउद्देशीय परियोजनाओं के कारण भारी पैमाने पर स्थानीय गरीब लोगों का विस्थापन होता है। स्थानीय लोगों को अपनी जमीन, आजीविका, संसाधनों से लगाव एवं नियंत्रण देश की बेहतरी के लिए त्याग देना पड़ता है।
(2) बहुउद्देशीय परियोजनाओं ने पर्यावरण को भी प्रभावित किया है। बड़े बाँधों के निर्माण में भारी मात्रा में वनों का क्षरण होता है जिससे पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
(3) बाढ़ के मैदान में बनाये जाने वाले जलाशयों में वहाँ मौजूद वनस्पति और भूमि जल में डूब जाती है तथा कालांतर में अपघटित हो जाती हैं।
(4) किसी स्थिति में बाँधों के टूट जाने से समीपवर्ती इलाका जलमग्न हो जायेगा।
(5) बड़े स्तर पर संरचनात्मक विकास के कारण बाहर के कर्मचारियों एवं व्यवसायियों के बसने से स्थानीय व्यवसाय एवं संस्कृति में असंतुलन पैदा हो सकता है।
उत्तर : जल दुर्लभता : आवश्यकता की तुलना में स्वच्छ एवं अलवणीय जल की कमी होना जल दुर्लभता कहलाती है।
जलदुर्लभता के कारण : (1) अत्यधिक और बढ़ती जनसंख्या
(2) जल का असमान वितरण
(3) वर्षा की कमी
(4) जल का अतिदोहन
(5) औद्योगीकरण और शहरीकरण में वृद्धि एवं जल पदूषण आदि।
उत्तर : (1) राजस्थान का एक बड़ा भाग मरूस्थल है जहाँ पानी का अभाव सदा बना रहता है। पश्चिमी राजस्थान में पीने का जल एकत्रित करने के लिए 'छत वर्षा जल संग्रहण' की परंपरिक विधि अत्यंत सफल है।
(2) राजस्थान के अर्द्ध-शुष्क और शुष्क क्षेत्रों में घर में पीने का पानी संगृहित करने के लिए भूमिगत टैंक अथवा 'टांका' होते हैं। वे घरों की ढलवां छतों से पाइप द्वारा जुड़े हुए होते हैं।
(3) छत से वर्षा का पानी इन नलों से होकर भूमिगत टैंक तक पहुँचता है जहाँ इसे एकत्रित किया जाता है।
(4) वर्षा का पहला जल छत और नलों को साफ करने में प्रयुक्त होता है और उसे संग्रहित नहीं किया जाता है। इसके बाद होनेवाले वर्षों के जल का संग्रह किया जाता है।
(5) पानी की कमी को पूरा करने के लिए अनेक 'बावलियों का निर्माण राजस्थान के अनेक नगरों एवं कस्बों में देखा जाता है। कुछ बावलियाँ अनेक मंजिलोंवाली होती है।
(6) वर्षा के जल को एकत्रित करने के लिए गढे बनाए जाते हैं, जिससे भूमि की सिंचाई की जा सके तथा संरक्षित जल को कृषि के काम में प्रयुक्त किया जा सके। राजस्थान के जैसलमेर जिले में 'खादीन' तया अन्य क्षेत्रों में 'जोहड़' इसके उदाहरण हैं।