खनिज तथा ऊर्जा संसाधन
महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ एवं विषयनिष्ठ प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
निम्न में से भारत के किन राज्यों में खनिजों और कोयले के प्रचुर भंडार है?
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिला में बैलाडीला पहाड़ी श्रृंखलाओं में अति उत्तम कोटि का निम्न में से कौन-सा खनिज पाया जाता है ?
निम्न में से किस प्रकार के खनिज का इस्पात के विनिर्माण में प्रयोग किया जाता है ?
झारखण्ड के गुआ और नोवामुंडी में कौन-सा खनिज पाया जाता है ?
इसमें पवन महाशक्ति का दर्जा प्राप्त है ?
विषयनिष्ठ प्रश्नोत्तर (Subjective)
उत्तर : खनिज प्राकृतिक रासायनिक यौगिक हैं, जो संरचना और संघटन में समान होते हैं। ये प्रकृति में चट्टानों एवं अयस्कों के घटक के रूप में उपस्थित होते हैं। खनिजों की उत्पत्ति पृथ्वी की भूपर्पटी के अन्दर लम्बे समय में विभिन्न भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं के द्वारा होती है
उत्तर- ऐसे खनिज अयस्क, जिनमें लोहे के अंश होते हैं, लौह खनिज कहलाते हैं। लौह खनिजों में लौह अयस्क, मैगनीज अयस्क, क्रोमियम, कोबाल्ट, टंगस्टन तथा निकिल शामिल हैं।
उत्तर- प्राकृतिक गैस और बायो गैस में अंतर-
प्राकृतिक गैस:
(a) खनिज तेल के साथ तथा बिना खनिज तेल के साथ पायी जाने वाली गैस प्राकृतिक गैस कहलाती है।
(b) इसका उपयोग मुख्यतः प्रदूषण कम करने के लिए, परिवहन तथा घरेलू कार्यों में किया जाता है।
(c) प्राकृतिक गैस ऊर्जा का समाप्य तथा परम्परागत साधन है।
बायो गैस:
(a) जैविक पदार्थों के सड़ने-गलन के बाद उत्पन्न होने वाली गैस बायो गैस कहलाती है।
(b) इसका उपयोग मुख्यतः घरेलू उपयोग में किया जाता है।
(c) ऊर्जा का असमाप्य संसाधन है।
उत्तर- भारत में संसार का लगभग 20 प्रतिशत लौह अयस्क भंडार हैं। भारत में लौह अयस्क का खनन मुख्यतः छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा, गोवा और कर्नाटक राज्यों में होता है।
(क) छत्तीसगढ़: इस राज्य में अधिकांश लोहा हेमेटाइट किस्म का है। यहाँ के दुर्ग, बस्तर और दांतेवाड़ा जिलों में लोहा उत्पादन किया जाता हैं।
(ख) झारखंड- यहाँ के प्रमुख क्षेत्र गुआ और नोआमुण्डी हैं।
(ग) उडीसा- यहाँ के सुंदरगढ़, क्योंझर और मयूरभंज जिले में लोहा उत्पादन किया जाता है।
(घ) कर्नाटक- इस राज्य के चिकमंगलूर जिले के बाबाबूदन पहाड़ी, कुद्रमुख और कालाहांडी क्षेत्र प्रमुख हैं।
(ङ) गोवा- गोवा के उत्तरी भाग में लोहा मिलता है।
उत्तर- छोटानागपुर के पठारी क्षेत्र में अधिकांश लोहा तथा इस्पात उद्योग संकेंद्रित हैं। इसके मुख्य कारण हैं:
(क) लौह अयस्क की कम लागत,
(ख) उच्च कोटि के कच्चे माल की निकटता,
(ग) सस्ते श्रमिक और
(घ) स्थानीय बाजार में इनके माँग की विशाल संभाव्यता सम्मिलित है
उत्तर- परम्परागत ऊर्जा:
(a) यह प्राचीन काल से प्रयोग होने वाले साधन हैं जिनकी मात्रा सीमित है।
(b) ये समाप्त होने वाले साधन हैं।
(c) कोयला, पेट्रोलियम, परमाणु ऊर्जा, जलशक्ति इसमें आते हैं।
गैर परम्परागत ऊर्जा:
(a) इनका आज के संदर्भ में महत्व बढ़ गया है।
(b) ये कभी न समाप्त होने वाले (अक्षय) साधन है।
(c) सौर ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, पवन ऊर्जा इसमें आते हैं।
उत्तर-खनिजों को एक बार उपयोग करने के उपरांत उसे दुबारा नहीं पाया जा सकता। खनिजों का दुरुपयोग किया गया तो आने वाली पीढ़ियों को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए खनिजों का संरक्षण आवश्यक है।
खनिजों के संरक्षण की तीन विधियाँ-
(क) खनिजों का उपयोग सुनियोजित ढंग से करना चाहिए।
(ख) खनिजों को बचाने के लिए उनके स्थान पर अन्य वस्तुओं के उपयोग के बारे में सोचना चाहिए।
(ग) जहाँ जैसे संभव हो धातुओं के चक्रीय उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
उत्तर- कृषि आधारित उद्योग: वे उद्योग हैं जो कच्चे माल के रूप में वनस्पति और जंतु उत्पादों का उपयोग करते हैं। जैसे- सूती वस्त्र, ऊनी वस्त्र, रबर, चीनी, चाय आदि।
खनिज आधारित उद्योग: वे उद्योग हैं जो खनिज अयस्कों का उपयोग कच्चे माल के रूप में करते हैं। जैसे- लोहा तथा इस्पात, सीमेंट, एल्युमिनियम, मशीन आदि।
उत्तर :- लौह खनिज:
(a) इसमें कठोरता पायी जाती है।
(b) ये प्रायः भूरे रंग के होते हैं।
(c) लोहा, मैगनीज इसके उदाहरण हैं।
अलौह खनिज:
(a) इनमें कठोरता नहीं पायी जाती है।
(b) ये कई रंगों के होते हैं।
(c) सीसा, जस्ता, अभ्रक, सोना इसके उदाहरण हैं।
उत्तर-(क) कृषि उद्योगों के लिए कच्चा माल प्रदान करता है।
(ख) चीनी, रबर, कागज उद्योग आदि कृषि आधारित उद्योग है।
(ग) कृषि आधारित उद्योग लोगों को रोजगार देते हैं।
(घ) उद्योगों के कारण कृषि उत्पादों की माँग बढ़ती है, जिससे किसानों की आय और कृषि का आधुनिकीकरण संभव होता है।
उत्तर: भारत में लौह अयस्क के तीन प्रमुख क्षेत्र हैं:
1. ओडिशा-झारखंड पेटी: इसमें ओडिशा के मयूरभंज और झारखण्ड के सिंहभूम जिले शामिल हैं।
2. दुर्ग-बस्तर-चंद्रपुर पेटी: यह छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में स्थित है, यहाँ बैलाडीला श्रेणी में उच्च कोटि का लोहा मिलता है।
3. बेल्लारी-चित्रदुर्ग-चिकमंगलूर-तुमकुर पेटी: यह कर्नाटक में स्थित है और यहाँ कुद्रेमुख खानें महत्वपूर्ण हैं।
उत्तर: भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्ज्वल होने के कारण हैं:
(i) भारत एक उष्ण कटिबंधीय देश है, यहाँ सौर ऊर्जा के दोहन की असीम संभावनाएं हैं।
(ii) यह ऊर्जा का एक नवीकरणीय और प्रदूषण मुक्त स्रोत है।
(iii) ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी और उपलों पर निर्भरता कम होगी जिससे पर्यावरण बचेगा।
(iv) फोटोवोल्टाइक तकनीक के विकास से यह और अधिक सुलभ हो रहा है।
उत्तर : ऊर्जा संसाधनों के संरक्षण के उपाय :
(1) ऊर्जा संसाधनों के प्रयोग के विकल्प विकसित किये जाने चाहिए।
(2) ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा का उत्पादन है। सार्वजनिक वाहनों का उपयोग करना चाहिए।
(3) बिजली की बचत करने वाले उपकरणों का प्रयोग करना चाहिए।
(4) गैर-परंपरागत ऊर्जा के साधनों (सौर, पवन ऊर्जा) के प्रयोग को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।
(4) गैर-परंपरागत ऊर्जा के साधनों (सौर, पवन ऊर्जा) के प्रयोग को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।