Merit Yard
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JAC Board 10th Hindi
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4 फरवरी हिन्दी में यही आएगा | व्याकरण, विज्ञापन, निबंध, लेखन, पत्र लेखन | JAC बोर्ड 10वीं

JAC Board Exam 2026 अभी देखें

संपूर्ण रचना एवं व्याकरण: मास्टर उत्तर बैंक (2026)

विज्ञापन, पत्र, निबंध और संवाद के सभी 52 प्रश्नों के विस्तृत हल

I. विज्ञापन लेखन (Ad Writing)

1. साबुन बनाने वाली एक कंपनी की ओर से एक विज्ञापन तैयार कीजिए।
🧼 शीतल हर्बल साबुन 🧼

"स्वच्छता और कोमलता का अनमोल संगम"

✔ 100% प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से निर्मित
✔ कपड़ों की गहरी सफाई और त्वचा की सुरक्षा
✔ भीनी खुशबू जो आपको रखे दिन भर तरोताजा

धमाका सेल: 3 की खरीद पर 1 बिल्कुल मुफ्त!

सम्पर्क: 987XXXXXX | नजदीकी दुकानों पर उपलब्ध।

2. छात्रों में शिक्षण के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए एक विज्ञापन तैयार कीजिए।
📚 शिक्षा - उज्ज्वल भविष्य का आधार 📚

"पढ़े चलो, बढे चलो!"

सबको साक्षर बनाकर देश को आगे बढ़ाना है। शिक्षा ही वह शस्त्र है जिससे दुनिया बदली जा सकती है।

• निःशुल्क प्रारंभिक शिक्षा और छात्रवृत्ति
• सर्व शिक्षा, सबका अधिकार
• हर बच्चा स्कूल जाएगा

आज ही नामांकन कराएं!
3. सड़क सुरक्षा हेतु एक आकर्षक विज्ञापन तैयार करें।
🚦 सड़क सुरक्षा - जीवन सुरक्षा 🚦

"सावधानी हटी, दुर्घटना घटी"

🚫 वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग न करें
🚫 शराब पीकर गाड़ी न चलाएं
✅ हेलमेट और सीट-बेल्ट का सदैव प्रयोग करें

सड़क सुरक्षा का रखो ध्यान, यातायात नियमों का करो सम्मान!
4. पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक विज्ञापन तैयार कीजिए।
🌱 पर्यावरण बचाओ, जीवन बचाओ 🌱

"स्वच्छ भारत, हरित भारत"

• पेड़ लगाओ, पानी बचाओ
• प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह बंद करें
• धरती को प्रदूषण मुक्त बनाने का संकल्प लें

एक पेड़, एक जीवन - आज ही लगाएं!
5. कलम बनाने वाली कम्पनी की ओर से एक विज्ञापन तैयार कीजिए।
✒️ मेरिट गोल्ड पेन ✒️

"मक्खन जैसी लिखावट, सबसे शानदार बनावट"

लिखें बिना रुके, बिना थके। एर्गोनोमिक ग्रिप और वाटरप्रूफ इंक के साथ।

मात्र ₹5 से शुरू! सभी स्टेशनरी पर उपलब्ध।
6. चुनाव में वोट देने की अपील के लिए एक विज्ञापन तैयार करें।
🗳️ आपका वोट - आपकी ताकत 🗳️

"लोकतंत्र के महापर्व में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें"

एक वोट से बदलें हालात। सही नेता चुनें, सशक्त भारत का निर्माण करें।

पहले मतदान, फिर जलपान!
7. पतंजलि हर्बल शैम्पू की बिक्री हेतु एक विज्ञापन तैयार करें।
🌿 पतंजलि हर्बल शैम्पू 🌿

"प्रकृति का वरदान, बालों की शान"

• नीम, तुलसी और आंवला के गुणों से भरपूर
• रूसी और बालों के झड़ने से तुरंत राहत
• बालों को दे रेशमी चमक और मजबूती

100% शुद्ध आयुर्वेदिक उत्पाद।
8. छात्रों में खेल के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए एक विज्ञापन तैयार किजिये।
⚽ खेलो और जीतो ⚽

"स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का वास होता है"

केवल पढ़ाई ही नहीं, खेल भी है जरूरी। टीमवर्क और अनुशासन सीखें, मैदान में अपना जलवा दिखाएं।

आओ खेल को अपनाएं, उज्ज्वल भविष्य बनाएं!
9. दुकान / मकान की बिक्री हेतु विज्ञापन तैयार करें।
🏠 सुनहरा मौका - बिकाऊ है 🏠

"आकर्षक लोकेशन, सभी सुविधाओं के साथ"

● स्थान: अशोक नगर, मुख्य सड़क के पास
● 1200 वर्ग फुट (G+1 निर्मित)
● वाजिब दाम, तुरंत कब्जा

संपर्क करें: 99XXXXXX01 (मालिक से सीधे बात करें)

10. समाज में बढ़ रहे अपराधों के प्रति जन जागरूकता हेतु विज्ञापन तैयार कीजिए।
🚨 अपराध मुक्त समाज का संकल्प 🚨

"सतर्क रहें, सुरक्षित रहें"

अपराध के खिलाफ एकजुट हों। चुप्पी तोड़ें, सच का साथ दें। संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।

गलत को सहना भी अपराध है!
11. अपने शहर में पुस्तक मेला का आयोजन हेतु विज्ञापन तैयार करें।
📚 भव्य पुस्तक मेला 2026 📚

"ज्ञान का अनमोल खजाना अब आपके शहर में"

सभी प्रमुख प्रकाशकों की लाखों पुस्तकें उपलब्ध। पुस्तकों पर 20% तक की भारी छूट।

स्थान: गांधी मैदान | समय: सुबह 10 से रात 9 बजे

12. शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से विज्ञापन तैयार करें।
📖 साक्षर समाज, विकसित देश 📖

शिक्षा ही गरीबी की जंजीरों को काट सकती है। अपने बच्चे का नामांकन आज ही कराएं।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ!
13. स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता हेतु विज्ञापन तैयार कीजिए।
🍏 स्वास्थ्य ही धन है 🍏

"बीमारियों को कहें ना, स्वस्थ जीवन को कहें हाँ"

प्रतिदिन योग और संतुलित आहार लें। नियमित स्वास्थ्य जाँच कराएं और तनाव मुक्त रहें।

14. स्वास्थ्यवर्धक पेय सामग्री बनाने वाली कंपनी की ओर से विज्ञापन लिखिए।
🥤 एनर्जी बूस्ट हेल्थ ड्रिंक 🥤

"शक्ति और स्फूर्ति का नया नाम"

• विटामिन और मिनरल्स से भरपूर
• बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए
• प्राकृतिक और स्वादिष्ट स्वाद में उपलब्ध
15. हर्बल टूथपेस्ट के लिए एक आकर्षक विज्ञापन तैयार करें।
🦷 दांत-शक्ति हर्बल पेस्ट 🦷

"मुस्कान ऐसी जो सबको भा जाए"

नीम, बबूल और लौंग की शक्ति के साथ। मसूड़ों की मजबूती और पायरिया से पूर्ण सुरक्षा।

100% कैमिकल मुक्त!
16. “हैंड सैनिटाइजर” के लिए विज्ञापन लिखें।
🧼 सुरक्षा हैंड सैनिटाइजर 🧼

"कीटाणुओं का पल भर में सफाया"

99.9% कीटाणुओं का अंत। बिना पानी के कहीं भी सफाई। त्वचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित।

17. ‘हर्बल तेल’ का एक विज्ञापन तैयार करें।
💆 अमृत हर्बल केश तेल 💆

"बालों को मिले पोषण, जड़ों से मजबूती"

बालों का झड़ना रोके और उन्हें काला-घना बनाए। सिर के दर्द और तनाव में दे तुरंत राहत।

II. पत्र एवं आवेदन लेखन (Letters)

1. मोहल्ले में गंदगी का अंबार हटाने हेतु नगर निगम को अनुरोध पत्र लिखें।
सेवा में,
नगर आयुक्त महोदय,
नगर निगम, धनबाद।

दिनांक: 02 फरवरी, 2026

विषय: मोहल्ले में व्याप्त गंदगी की नियमित सफाई कराए जाने हेतु प्रार्थना-पत्र।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं हीरक कॉलोनी, धनबाद का स्थायी निवासी हूँ। आपके संज्ञान में लाना चाहता हूँ कि हमारे मोहल्ले में पिछले कई दिनों से गंदगी का अंबार लगा हुआ है। सफाई कर्मचारी समय पर नहीं आ रहे हैं, जिसके कारण सड़कों के किनारे कूड़े-कचरे के ढेर जमा हो गए हैं। नालियाँ जाम हो चुकी हैं और गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है।

इस गंदगी के कारण चारों ओर दुर्गंध फैल रही है तथा मच्छरों और मक्खियों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि हो गई है। इससे डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है। बच्चों एवं बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि जनहित एवं स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हमारे मोहल्ले में शीघ्र सफाई व्यवस्था सुनिश्चित कराने की कृपा करें। इसके लिए हम सभी मोहल्लेवासी आपके आभारी रहेंगे।

भवदीय,
अंशु राज
(हीरक कॉलोनी निवासी)
2. अनियमित विद्युत् व्यवस्था ठीक करने हेतु सहायक विद्युत अभियंता को पत्र लिखिए।
सेवा में,
सहायक विद्युत अभियंता महोदय,
विद्युत विभाग, राँची।

विषय: क्षेत्र में अनियमित विद्युत् आपूर्ति को नियमित कराने हेतु प्रार्थना-पत्र।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं अपर बाजार क्षेत्र, राँची का निवासी हूँ। पिछले कई सप्ताहों से हमारे क्षेत्र में विद्युत् आपूर्ति अत्यंत अनियमित हो गई है। दिन में कई बार बिना सूचना के बिजली काट दी जाती है तथा कई बार लो-वोल्टेज की समस्या बनी रहती है।

इस अनियमित विद्युत् आपूर्ति के कारण घरेलू कार्यों में परेशानी हो रही है। साथ ही परीक्षाओं का समय नजदीक होने के कारण छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कई बार विद्युत उपकरण भी खराब हो जाते हैं।

अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि क्षेत्र की विद्युत् व्यवस्था को शीघ्र नियमित कराने की कृपा करें, जिससे आम जनता को राहत मिल सके।

भवदीय,
सुमित कुमार
(निवासी, अपर बाजार)
3. अवकाश के लिए अपने प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक को आवेदन पत्र लिखिए।
सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
राजकीय उच्च विद्यालय, हजारीबाग।

विषय: पारिवारिक आवश्यक कार्य हेतु चार दिनों के अवकाश के लिए आवेदन।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय का कक्षा दसवीं का छात्र हूँ। किसी अत्यंत आवश्यक पारिवारिक कार्य के कारण मैं दिनांक 05 फरवरी 2026 से 08 फरवरी 2026 तक विद्यालय में उपस्थित होने में असमर्थ रहूँगा।

अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि मुझे उक्त अवधि के लिए अवकाश प्रदान करने की कृपा करें। मैं विद्यालय लौटकर छूटी हुई पढ़ाई समय पर पूरी कर लूँगा।

आपका आज्ञाकारी छात्र,
रोहन कुमार
कक्षा: 10वीं | अनुक्रमांक: 12
Merit Yard
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4. वार्षिक परीक्षा की तैयारी का वर्णन करते हुए अपने पिता को पत्र लिखिए।
हजारीबाग
दिनांक: 02 फरवरी 2026

पूज्य पिताजी,
सादर चरण स्पर्श।

आशा करता हूँ कि आप सब कुशलपूर्वक होंगे। यहाँ मैं भी पूर्णतः स्वस्थ हूँ। इस पत्र के माध्यम से आपको अपनी वार्षिक परीक्षा की तैयारी के विषय में बताना चाहता हूँ। मेरी परीक्षा निकट है और मैं पूरी लगन एवं अनुशासन के साथ अध्ययन कर रहा हूँ।

मैंने सभी विषयों का पाठ्यक्रम समय पर पूरा कर लिया है और अब नियमित रूप से पुनरावृत्ति कर रहा हूँ। गणित एवं विज्ञान जैसे कठिन विषयों पर मैं विशेष ध्यान दे रहा हूँ। प्रतिदिन समय-सारणी बनाकर पढ़ाई करता हूँ और पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्र भी हल कर रहा हूँ।

मुझे पूरा विश्वास है कि आपके आशीर्वाद, माता जी के स्नेह एवं मेरे परिश्रम से मैं अच्छे अंक प्राप्त करूँगा। आप सबका आशीर्वाद सदैव बना रहे। माँ को मेरा प्रणाम कहिएगा।

आपका आज्ञाकारी पुत्र,
अंशु
5. विद्यालय में पीने के पानी की समुचित व्यवस्था हेतु प्रधानाचार्य को पत्र लिखें।
सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
__________ विद्यालय।

विषय: विद्यालय में शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था कराने हेतु।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय का एक छात्र हूँ। आपके ध्यान में लाना चाहता हूँ कि विद्यालय में पीने के पानी की व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। अधिकांश वाटर-कूलर खराब पड़े हैं तथा नलों से गंदा पानी निकलता है।

गर्मी के मौसम में छात्रों को पानी के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है। इससे समय की हानि होती है तथा कई छात्रों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि विद्यालय में शुद्ध पेयजल हेतु वाटर-कूलर की मरम्मत तथा अतिरिक्त नलों की व्यवस्था कराने की कृपा करें।

भवदीय,
छात्र परिषद
6. वाद-विवाद प्रतियोगिता/परीक्षा में प्रथम आने पर मित्र को बधाई-पत्र लिखिए।
प्रिय मित्र राहुल,
सप्रेम नमस्ते।

यह जानकर अत्यंत हर्ष हुआ कि तुमने वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। तुम्हारी इस शानदार सफलता पर मैं तुम्हें हृदय से बधाई देता हूँ। यह सफलता तुम्हारी मेहनत, आत्मविश्वास और निरंतर अभ्यास का परिणाम है।

तुमने न केवल अपने माता-पिता का बल्कि विद्यालय एवं मित्रों का भी नाम रोशन किया है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि भविष्य में भी तुम इसी प्रकार सफलता के शिखर को छूते रहोगे।

ईश्वर तुम्हें सदैव प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाए।

तुम्हारा मित्र,
आर्यन
7. पेयजल की नियमित आपूर्ति के लिए नगरपालिका अध्यक्ष को आवेदन पत्र लिखिए।
सेवा में,
अध्यक्ष महोदय,
नगरपालिका।

विषय: पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित कराने हेतु।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि हमारे मोहल्ले में पिछले कई दिनों से पेयजल की आपूर्ति अनियमित हो गई है। कई दिनों तक पानी नहीं आने के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

महिलाएँ एवं बच्चे दूर-दराज के क्षेत्रों से पानी लाने को विवश हैं। इससे दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि हमारे क्षेत्र में नियमित पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था कराई जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर टैंकर की व्यवस्था भी की जाए।

भवदीय,
आकाश राज
8. अपने जन्मदिन पर मित्र को आमंत्रित करने हेतु पत्र लिखिए।
प्रिय मित्र विशाल,
सप्रेम नमस्ते।

आशा है तुम स्वस्थ और प्रसन्न होगे। यह बताते हुए मुझे अत्यंत खुशी हो रही है कि आगामी 15 फरवरी को मेरा जन्मदिन है। इस शुभ अवसर पर मेरे घर पर सायं 6 बजे एक छोटी-सी पार्टी का आयोजन किया गया है।

इस समारोह में तुम्हारी उपस्थिति मेरे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हम सब मित्र मिलकर इस दिन को यादगार बनाएँगे। कृपया अवश्य पधारना।

तुम्हारे आगमन की प्रतीक्षा में।

तुम्हारा मित्र,
अंशु
9. बढ़ते अपराध की रोकथाम के लिए थाना प्रभारी को पत्र लिखिए।
सेवा में,
थाना प्रभारी महोदय।

विषय: क्षेत्र में बढ़ते अपराध पर नियंत्रण हेतु।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि हमारे क्षेत्र में चोरी, छिनैती एवं असामाजिक गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। शाम होते ही अपराधियों का जमावड़ा लग जाता है, जिससे आम नागरिकों में भय का वातावरण बना रहता है।

महिलाओं एवं बच्चों का घर से बाहर निकलना असुरक्षित हो गया है।

अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि क्षेत्र में नियमित पुलिस गश्त बढ़ाई जाए तथा दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।

भवदीय,
राजेश वर्मा
10. झारखण्ड के ऐतिहासिक स्थलों का वर्णन करते हुए मित्र को पत्र लिखिए।
प्रिय मित्र रोहित,
सप्रेम नमस्ते।

झारखण्ड अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ ऐतिहासिक धरोहरों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहाँ देवघर का बाबा बैद्यनाथ धाम, रांची का जगन्नाथ मंदिर तथा हजारीबाग की रॉक आर्ट विश्व प्रसिद्ध हैं।

पलामू का किला, पारसनाथ की पहाड़ियाँ तथा नेतरहाट जैसे स्थल इतिहास और प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करते हैं।

तुम अगली छुट्टियों में अवश्य यहाँ आओ। हम साथ मिलकर इन स्थलों का भ्रमण करेंगे।

तुम्हारा मित्र,
अमन
11. मलेरिया से बचाव के लिए स्वास्थ्य अधिकारी को शिकायत पत्र लिखिए।
सेवा में,
मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी महोदय।

विषय: क्षेत्र में मलेरिया के बढ़ते खतरे की रोकथाम हेतु।

महोदय,
हमारे वार्ड में मच्छरों का प्रकोप अत्यधिक बढ़ गया है। जगह-जगह गंदा पानी जमा रहने के कारण मलेरिया के मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है।

अतः आपसे निवेदन है कि क्षेत्र में फॉगिंग मशीन द्वारा दवा का छिड़काव तथा सफाई की समुचित व्यवस्था कराई जाए।

धन्यवाद।
भवदीय,
विकास मंडल
12. समय का सदुपयोग करने की सलाह देते हुए छोटे भाई को पत्र लिखिए।
प्रिय छोटे भाई सोहन,
आशीर्वाद।

मुझे ज्ञात हुआ कि तुम अपना अधिकांश समय मोबाइल और खेलों में व्यतीत कर रहे हो। यह ठीक नहीं है। विद्यार्थी जीवन में समय का अत्यधिक महत्व होता है।

यदि समय का सही उपयोग किया जाए तो सफलता अवश्य मिलती है। समय-सारणी बनाकर नियमित अध्ययन करो और बड़ों की सलाह मानो।

मुझे विश्वास है कि तुम मेरी बातों पर अवश्य ध्यान दोगे।

तुम्हारा बड़ा भाई,
अंशु
13. क्षेत्र में पार्क विकसित करने के लिए निगम अधिकारी को पत्र लिखिए।
सेवा में,
उद्यान अधीक्षक महोदय,
नगर निगम।

विषय: मोहल्ले में सार्वजनिक पार्क विकसित करने हेतु।

महोदय,
हमारे मोहल्ले में एक बड़ा भूखंड खाली पड़ा है, जो वर्तमान में कचरा फेंकने का स्थान बन गया है। यदि यहाँ एक सुंदर पार्क विकसित कर दिया जाए, तो बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों को लाभ होगा।

अतः आपसे निवेदन है कि इस भूखंड पर शीघ्र पार्क निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ की जाए।

धन्यवाद।
भवदीय,
राहुल महतो
14. भाई के विवाह में शामिल होने के लिए प्रधानाध्यापक को पत्र लिखिए।
सेवा में,
प्रधानाध्यापक महोदय।

विषय: भाई के विवाह हेतु अवकाश प्रदान करने के संबंध में।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि मेरे बड़े भाई का विवाह दिनांक 12 फरवरी 2026 को निश्चित हुआ है। विवाह की तैयारियों के कारण मेरा घर पर रहना आवश्यक है।

अतः कृपया मुझे दिनांक 10 फरवरी से 14 फरवरी 2026 तक अवकाश प्रदान करने की कृपा करें।

भवदीय,
शुभम राज
15. पेड़-पौधों की अनियंत्रित कटाई रोकने हेतु जिलाधिकारी को पत्र लिखिए।
सेवा में,
जिलाधिकारी महोदय।

विषय: पेड़ों की अवैध कटाई पर रोक लगाने हेतु।

महोदय,
हमारे क्षेत्र में कुछ लोग बिना अनुमति हरे-भरे पेड़ों की कटाई कर रहे हैं। इससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है और प्रदूषण बढ़ रहा है।

अतः आपसे निवेदन है कि इस अवैध कटाई पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

भवदीय,
एक जागरूक नागरिक

III. निबंध / अनुच्छेद लेखन (Essays)

1. विज्ञान : अभिशाप या वरदान
प्रस्तावना :

आधुनिक युग को विज्ञान का युग कहा जाता है। मानव ने अपनी बुद्धि, तर्क और प्रयोगों के बल पर प्रकृति के अनेक रहस्यों को उजागर किया है। आज मानव जीवन का कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है जहाँ विज्ञान का प्रभाव न हो। विज्ञान ने मानव जीवन को सरल, सुविधाजनक और गतिशील बनाया है।

विज्ञान एक वरदान के रूप में :

विज्ञान ने चिकित्सा के क्षेत्र में अद्भुत प्रगति की है। असाध्य मानी जाने वाली बीमारियों का इलाज संभव हो पाया है। संचार के क्षेत्र में मोबाइल, इंटरनेट और उपग्रह ने पूरी दुनिया को एक गाँव में बदल दिया है। परिवहन के साधनों ने दूरी को बहुत कम कर दिया है। शिक्षा के क्षेत्र में ऑनलाइन कक्षाएँ, डिजिटल पुस्तकालय और स्मार्ट क्लास विज्ञान की देन हैं।

विज्ञान एक अभिशाप के रूप में :

जहाँ विज्ञान के अनेक लाभ हैं, वहीं इसके दुरुपयोग से गंभीर समस्याएँ भी उत्पन्न हुई हैं। परमाणु बम, रासायनिक हथियार और युद्धक तकनीक मानवता के लिए खतरा बन चुकी हैं। औद्योगीकरण के कारण वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है।

उपसंहार :

निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि विज्ञान स्वयं में न तो अभिशाप है और न ही वरदान, बल्कि उसका उपयोग ही उसे वरदान या अभिशाप बनाता है। यदि विज्ञान का प्रयोग मानव कल्याण हेतु किया जाए तो यह वरदान है।

2. झारखण्ड की प्राकृतिक सुषमा / हमारा राज्य झारखण्ड (विस्तृत निबंध)
1. भूमिका एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि :

झारखण्ड भारत के पूर्वी आकाश में चमकता हुआ वह सितारा है, जिसकी आभा इसकी प्राकृतिक हरियाली और समृद्ध संस्कृति से है। 'झारखण्ड' का अर्थ है 'झाड़' या 'वनों' का प्रदेश। यह प्रदेश अनादि काल से ही वनों और पर्वतों की गोद में बसा हुआ है। इस राज्य का गठन 15 नवंबर 2000 को महान क्रांतिकारी और जनजातीय देवता के रूप में पूजे जाने वाले 'भगवान बिरसा मुंडा' की जयंती पर हुआ था। बिहार के दक्षिणी हिस्से को अलग करके बनाया गया यह राज्य आज अपनी भौगोलिक संरचना और प्राकृतिक संसाधनों के कारण विश्व मानचित्र पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बना चुका है। यह भूमि केवल पत्थरों और जंगलों की नहीं, बल्कि वीरों और बलिदानियों की पावन धरती है।

2. भौगोलिक संरचना और जलवायु :

झारखण्ड की भौगोलिक बनावट इसे अन्य राज्यों से अलग बनाती है। यहाँ का अधिकांश भाग छोटानागपुर पठार का हिस्सा है। यहाँ की जलवायु सुखद और स्वास्थ्यवर्धक है। यहाँ न तो बहुत अधिक गर्मी पड़ती है और न ही अत्यधिक ठंड। मानसून के समय यहाँ की पहाड़ियाँ जब बादलों की चादर ओढ़ती हैं, तो दृश्य किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। यहाँ की लाल और पीली मिट्टी के नीचे प्रकृति ने अनमोल खजाना छुपा रखा है, वहीं जमीन के ऊपर साल (सखुआ), महुआ, पलाश और शीशम के घने जंगल इसकी सुंदरता में चार चाँद लगाते हैं। पलाश के लाल फूलों से लदी हुई यहाँ की धरती वसंत ऋतु में ऐसी लगती है मानो अग्नि की लपटें खेल रही हों।

3. जलप्रपात और नदियाँ - प्रकृति का उपहार :

झारखण्ड को 'जलप्रपातों का राज्य' भी कहा जा सकता है। यहाँ की ऊँची-नीची पहाड़ियों से जब जल की धाराएं नीचे गिरती हैं, तो वे दूध की सफेद चादर जैसी प्रतीत होती हैं। राँची के निकट स्थित हुंडरू जलप्रपात, जोन्हा (गौतमधारा) जलप्रपात और दशम जलप्रपात अपनी सुंदरता के लिए विश्वविख्यात हैं। इसके अतिरिक्त लोध जलप्रपात राज्य का सबसे ऊँचा जलप्रपात है। यहाँ बहने वाली स्वर्णरेखा नदी, जिसके रेत में सोने के कण पाए जाने की बात कही जाती है, साथ ही दामोदर, कोयल, बराकर और शंख नदियाँ इस राज्य की जीवनधारा हैं। ये नदियाँ न केवल खेती के लिए जल प्रदान करती हैं, बल्कि यहाँ के जनजीवन को अपनी कल-कल ध्वनि से जीवंत बनाए रखती हैं।

4. रत्नगर्भा धरती : खनिज संपदा का भंडार :

झारखण्ड की प्राकृतिक सुषमा केवल इसकी सतह पर ही नहीं, बल्कि इसके गर्भ में भी छिपी है। इसे 'भारत का रूर' (Ruhr of India) कहा जाता है क्योंकि भारत का लगभग 40 प्रतिशत खनिज संसाधन अकेले इसी राज्य में पाया जाता है। झरिया और धनबाद की कोयला खदानें, सिंहभूम का लौह-अयस्क, कोडरमा की अभ्रक (Mica) की चमक और जादूगोड़ा का यूरेनियम इसे औद्योगिक दृष्टिकोण से अद्वितीय बनाते हैं। इन्हीं खनिजों के कारण यहाँ जमशेदपुर जैसे 'स्टील सिटी' और बोकारो जैसे औद्योगिक केंद्रों का विकास हुआ है, जो पूरे भारत की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान कर रहे हैं।

5. वन्य जीवन और पर्यटन स्थल :

प्राकृतिक सुषमा का एक बड़ा हिस्सा यहाँ के राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य हैं। बेतला नेशनल पार्क और पलामू टाइगर रिजर्व में बाघ, हाथी और हिरणों को उनके प्राकृतिक आवास में देखा जा सकता है। हजारीबाग अभयारण्य और दलमा के जंगल हाथियों के लिए प्रसिद्ध हैं। पर्यटन की दृष्टि से 'नेतरहाट' जिसे 'छोटानागपुर की रानी' कहा जाता है, वहाँ का सनसेट और सनराइज पॉइंट पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। इसके अलावा देवघर का बाबा बैद्यनाथ धाम, पारसनाथ की पहाड़ियाँ (जैन धर्म का पवित्र स्थल) और रजरप्पा का छिन्नमस्तिका मंदिर यहाँ की धार्मिक और प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत मेल प्रस्तुत करते हैं।

6. सांस्कृतिक वैभव और लोक-जीवन :

झारखण्ड की असली सुंदरता यहाँ के सरल और प्रकृति प्रेमी लोगों में बसती है। यहाँ की जनजातीय संस्कृति प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीने का सबसे अच्छा उदाहरण है। यहाँ के 'सरहुल' त्योहार में जब लोग साल के वृक्ष की पूजा करते हैं, तो वह प्रकृति के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा को दर्शाता है। कर्मा, सोहराय, टुसू और छठ यहाँ के प्रमुख त्योहार हैं। यहाँ के लोकनृत्य 'छऊ' ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त की है। यहाँ की कोहबर और सोहराय पेंटिंग, जो घरों की दीवारों पर बनाई जाती हैं, यहाँ की समृद्ध कलात्मक विरासत की प्रतीक हैं। यहाँ का सादगी भरा खान-पान जैसे धुस्का, पीठा और हड़िया यहाँ की संस्कृति की महक बिखेरते हैं।

7. वीर सपूतों की गौरव गाथा :

इस राज्य की मिट्टी की महिमा यहाँ के वीरों के बिना अधूरी है। भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, तिलका मांझी और जतरा टाना भगत जैसे महान क्रांतिकारियों ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे। इन वीरों का संघर्ष और बलिदान ही है कि आज झारखण्ड अपनी विशिष्ट पहचान के साथ खड़ा है। यहाँ का हर पत्थर और हर पेड़ इन वीरों की शहादत की कहानी सुनाता है।

8. चुनौतियाँ और भविष्य :

इतनी प्राकृतिक संपदा होने के बावजूद झारखण्ड के सामने कई चुनौतियाँ भी हैं। जंगलों की अंधाधुंध कटाई और खनन के कारण पर्यावरण पर बुरा असर पड़ रहा है। हमें अपनी प्राकृतिक सुषमा को बचाए रखने के लिए सतत विकास (Sustainable Development) पर ध्यान देना होगा। यदि हम अपनी नदियों और जंगलों को सुरक्षित रख पाए, तभी झारखण्ड का भविष्य और भी उज्ज्वल होगा। सरकार और नागरिकों को मिलकर यहाँ के पर्यटन और शिक्षा क्षेत्र में सुधार करने की आवश्यकता है।

9. उपसंहार :

संक्षेप में कहा जाए तो झारखण्ड प्रकृति की एक अनमोल कृति है। यहाँ की पहाड़ियाँ हमें अडिग रहना सिखाती हैं, नदियाँ निरंतर चलना सिखाती हैं और यहाँ के जंगल हमें दूसरों के लिए जीना सिखाते हैं। यह राज्य न केवल खनिजों का भंडार है, बल्कि यह मानवीय मूल्यों, साहस और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम है। हम सबको गर्व है कि हम इस पावन धरती के निवासी हैं। यदि धरती पर कहीं नैसर्गिक सुंदरता और सादगी देखनी हो, तो वह हमारे प्यारे झारखण्ड में ही संभव है। हमारा झारखण्ड, महान झारखण्ड!

3. परिश्रम का महत्व
प्रस्तावना :

परिश्रम मानव जीवन की सफलता की आधारशिला है। संसार में ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं हुआ जिसने बिना परिश्रम के महानता प्राप्त की हो। परिश्रम का अर्थ केवल शारीरिक श्रम नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता, निरंतर प्रयास और लक्ष्य के प्रति समर्पण भी है।

परिश्रम ही जीवन का मूल सत्य :

प्रकृति का प्रत्येक कण हमें परिश्रम की शिक्षा देता है। सूर्य प्रतिदिन समय पर उदित होता है, नदियाँ बिना थके बहती रहती हैं और चींटी जैसे छोटे जीव भी अथक परिश्रम करते हैं। यह सिद्ध करता है कि श्रम ही जीवन की गति है।

उन्नति और विकास में परिश्रम की भूमिका :

विद्यार्थी जीवन में परिश्रम का विशेष महत्व है। जो विद्यार्थी नियमित अध्ययन, अनुशासन और कठिन परिश्रम को अपनाता है, वही सफलता प्राप्त करता है। परिश्रम से आत्मविश्वास, साहस और निर्णय क्षमता का विकास होता है।

उपसंहार :

निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि परिश्रम ही सफलता की सच्ची कुंजी है। बिना परिश्रम के जीवन निष्फल और निरर्थक हो जाता है।

4. सरहुल : प्रकृति और संस्कृति का महापर्व
प्रस्तावना :

सरहुल झारखण्ड का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण आदिवासी पर्व है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और मनुष्य के बीच के अटूट और पवित्र प्रेम का जीवंत उदाहरण है। 'सरहुल' शब्द का अर्थ है 'साल की पूजा'। यह पर्व चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है, जब पूरी प्रकृति वसंत ऋतु के आगमन से खिल उठती है। यह वह समय होता है जब पेड़ों पर नई पत्तियां आती हैं और फूलों की खुशबू से वातावरण महक उठता है। आदिवासियों के लिए यह नववर्ष के समान है, जहाँ से वे अपनी नई कृषि गतिविधियों की शुरुआत करते हैं।

धार्मिक मान्यता और पूजा विधि :

इस पर्व के केंद्र में 'सखुआ' या 'साल' का वृक्ष होता है। आदिवासी समुदाय का मानना है कि इस वृक्ष में उनके देवता 'सिंगबोंगा' का वास होता है। पूजा के दिन गाँव के पुजारी, जिन्हें 'पाहन' कहा जाता है, सरना स्थल (पूजा स्थल) पर जाकर विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं। पाहन तीन मिट्टी के घड़ों में पानी भरकर भविष्य की वर्षा का अनुमान लगाते हैं। यदि घड़े का पानी कम नहीं होता, तो माना जाता है कि उस वर्ष अच्छी बारिश होगी। पूजा में साल के फूलों का विशेष महत्व होता है, जिसे पाहन हर घर के दरवाजे पर जाकर लगाता है, जो सुख-समृद्धि का आशीर्वाद माना जाता है।

सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व :

सरहुल के दिन पूरा गाँव एक उत्सव के रंग में रंगा होता है। लोग अपने पारंपरिक परिधान पहनते हैं। पुरुष और महिलाएँ सामूहिक रूप से 'मांदर' और 'नगाड़े' की थाप पर नृत्य करते हैं। इस दिन 'सरना' गीतों की गूंज हर तरफ सुनाई देती है। सामूहिक भोज का आयोजन होता है, जिसमें चावल से बनी 'हड़िया' (एक पारंपरिक पेय) और अन्य व्यंजनों का आनंद लिया जाता है। यह पर्व जाति और भेदभाव से ऊपर उठकर आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता को मजबूत करने का कार्य करता है।

उपसंहार :

आज के समय में जब पर्यावरण प्रदूषण एक वैश्विक समस्या बन गया है, सरहुल हमें प्रकृति के संरक्षण का महान संदेश देता है। यह हमें सिखाता है कि हमारी उत्तरजीविता प्रकृति की सुरक्षा में ही निहित है। सरहुल केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि हमारी जड़ों से जुड़ने का एक माध्यम है।

5. समय का महत्व : अनमोल जीवन की कुंजी
प्रस्तावना :

संसार में समय ही एकमात्र ऐसी वस्तु है जो सबसे अधिक मूल्यवान और शक्तिशाली है। कहा जाता है कि "समय और लहरें किसी की प्रतीक्षा नहीं करतीं।" यदि धन खो जाए तो कठिन परिश्रम से दोबारा कमाया जा सकता है, स्वास्थ्य बिगड़ जाए तो दवा से सुधारा जा सकता है, लेकिन यदि एक बार समय हाथ से निकल गया, तो उसे दुनिया की कोई भी ताकत वापस नहीं ला सकती। समय का चक्र निरंतर चलता रहता है, और जो इसके साथ कदम मिलाकर नहीं चलता, वह जीवन की दौड़ में पीछे रह जाता है।

विद्यार्थी जीवन और समय प्रबंधन :

विद्यार्थी जीवन में समय का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यही वह समय होता है जब मनुष्य के भविष्य की नींव रखी जाती है। जो छात्र अपने समय का सही प्रबंधन करते हैं और पढ़ाई, खेलकूद तथा अन्य गतिविधियों के लिए निश्चित समय तय करते हैं, उन्हें सफलता अवश्य मिलती है। समय की बर्बादी करने वाले छात्र अंत में परीक्षा के समय केवल तनाव और पछतावे का सामना करते हैं। एक सफल विद्यार्थी वह है जो 'आज का काम कल पर' कभी नहीं छोड़ता। समय की पाबंदी ही एक व्यक्ति को अनुशासित नागरिक बनाती है।

समय के सदुपयोग के लाभ :

इतिहास गवाह है कि जितने भी महापुरुष हुए हैं, चाहे वे महात्मा गांधी हों, अब्राहम लिंकन हों या ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, उन सभी की सफलता का राज समय का सदुपयोग ही था। समय का सही उपयोग करने से मानसिक शांति मिलती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और कार्य की गुणवत्ता में सुधार होता है। यह हमें आलस्य से दूर रखता है और जीवन के हर मोड़ पर नई ऊंचाइयों तक पहुँचने का साहस प्रदान करता है।

उपसंहार :

निष्कर्षतः, समय ईश्वर का दिया हुआ वह उपहार है जिसे हम खर्च तो कर सकते हैं लेकिन जमा नहीं कर सकते। हमें प्रत्येक क्षण का मूल्य समझना चाहिए और उसे रचनात्मक कार्यों में लगाना चाहिए। याद रखिए, जिसने समय की कद्र की, समय ने उसकी कद्र की।

6. भगवान बिरसा मुण्डा : धरती आबा का संघर्ष
प्रस्तावना :

झारखण्ड की पावन धरती पर कई वीरों ने जन्म लिया, लेकिन 'भगवान' की उपाधि केवल एक को मिली— बिरसा मुण्डा। उन्हें लोग सम्मान से 'धरती आबा' (जगत पिता) कहते हैं। बिरसा मुण्डा एक महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और आदिवासी अस्मिता के रक्षक थे। उनका जन्म 15 नवंबर 1875 को राँची जिले के उलिहातू गाँव में हुआ था। मात्र 25 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने जो वीरता दिखाई, उसने ब्रिटिश साम्राज्य की जड़ों को हिलाकर रख दिया था।

उलगुलान आंदोलन और संघर्ष :

जब अंग्रेजों ने आदिवासियों की जल, जंगल और जमीन पर कब्जा करना शुरू किया और उन पर भारी टैक्स लगा दिए, तब बिरसा मुण्डा ने 'उलगुलान' (महाविद्रोह) की घोषणा की। उन्होंने नारा दिया— "अबुआ राज एटे जाना, महारानी राज टुंडू जाना" (अर्थात अब हमारा राज शुरू हो गया है और महारानी विक्टोरिया का राज समाप्त हो गया है)। उन्होंने तीर-धनुष के दम पर अंग्रेजों की आधुनिक बंदूकों का सामना किया। उन्होंने न केवल बाहरी दुश्मनों से लड़ाई लड़ी, बल्कि आदिवासी समाज में फैली कुरीतियों, नशाखोरी और अंधविश्वास के खिलाफ भी अभियान चलाया और 'बिरसाइत' पंथ की स्थापना की।

बलिदान और विरासत :

बिरसा मुण्डा की बढ़ती शक्ति से घबराकर अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने के लिए इनाम रखा और अंततः उन्हें गिरफ्तार कर राँची जेल भेज दिया गया। 9 जून 1900 को रहस्यमयी परिस्थितियों में (कहा जाता है कि हैजा होने के कारण) उनका निधन हो गया। यद्यपि वह शारीरिक रूप से चले गए, लेकिन उनकी विचारधारा आज भी हर झारखण्डी के दिल में जीवित है। भारत सरकार ने उनके सम्मान में राँची एयरपोर्ट का नाम उनके नाम पर रखा और उनकी जयंती को 'जनजातीय गौरव दिवस' के रूप में मनाया जाता है।

उपसंहार :

भगवान बिरसा मुण्डा साहस और आत्मसम्मान के प्रतीक हैं। उन्होंने हमें सिखाया कि अपनी आजादी और अपनी मिट्टी की रक्षा के लिए मर मिटना ही सबसे बड़ा धर्म है। आज के युवाओं के लिए वे शौर्य और न्याय के शाश्वत प्रेरणास्रोत हैं।

7. पर्यावरण प्रदूषण : एक वैश्विक चुनौती
प्रस्तावना :

प्रकृति और मानव का संबंध माता और संतान जैसा है। पर्यावरण का अर्थ है हमारे चारों ओर का आवरण जो हमें घेरे हुए है। लेकिन दुःख की बात यह है कि मानव ने अपनी सुख-सुविधाओं और औद्योगिक प्रगति के नाम पर प्रकृति का अंधाधुंध दोहन किया है। इसके परिणामस्वरूप आज 'पर्यावरण प्रदूषण' एक भयानक दानव बनकर हमारे सामने खड़ा है। यह न केवल मानव जाति के लिए बल्कि संपूर्ण जीव-जगत और पृथ्वी के अस्तित्व के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है।

प्रदूषण के प्रकार और कारण :

प्रदूषण मुख्य रूप से चार प्रकार का होता है। 'वायु प्रदूषण' कारखानों और वाहनों के धुएं से होता है, जिससे श्वसन संबंधी बीमारियाँ बढ़ रही हैं। 'जल प्रदूषण' नदियों में कचरा और रासायनिक अपशिष्ट डालने से होता है, जिससे पीने का पानी जहरीला हो रहा है। 'ध्वनि प्रदूषण' लाउडस्पीकरों और मशीनों के शोर से होता है, जो मानसिक तनाव का कारण है। इसके अलावा 'मृदा प्रदूषण' उर्वरकों और प्लास्टिक के कारण बढ़ रहा है, जिससे धरती की उपजाऊ शक्ति नष्ट हो रही है। ग्लोबल वार्मिंग और ओजोन परत का क्षरण इसी असंतुलन के परिणाम हैं।

निवारण के उपाय :

इस समस्या का समाधान केवल नारों से नहीं, बल्कि ठोस कार्यों से होगा। हमें अधिक से अधिक वृक्ष लगाने होंगे। प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह बंद करना होगा। सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे प्रदूषण रहित ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना होगा। औद्योगिक कचरे को नदियों में डालने से पहले शोधित (filter) करना अनिवार्य होना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण है जन-जागरूकता, क्योंकि जब तक हर व्यक्ति पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा, तब तक कोई भी नियम सफल नहीं होगा।

उपसंहार :

पृथ्वी हमारे पूर्वजों से मिली विरासत नहीं है, बल्कि यह हमारे बच्चों से लिया गया कर्ज है। यदि हमें भविष्य की पीढ़ियों को एक स्वस्थ जीवन देना है, तो हमें आज ही प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेना होगा। याद रखिए, "वृक्ष धरा के भूषण हैं, करते दूर प्रदूषण हैं।"

8. मेरा भारत महान : विविधता में एकता
प्रस्तावना :

"सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्ताँ हमारा।" भारत दुनिया का वह देश है जिसकी महानता की गाथाएं सदियों पुरानी हैं। हिमालय के मुकुट से सजी और हिंद महासागर के चरणों से पखारी गई यह भूमि ऋषियों, मुनियों, वीरों और वैज्ञानिकों की पावन स्थली है। भारत केवल एक भू-भाग नहीं, बल्कि एक संस्कृति है, एक परंपरा है जो 'वसुधैव कुटुंबकम्' (पूरी दुनिया एक परिवार है) के सिद्धांत पर चलती है।

सांस्कृतिक और भौगोलिक वैभव :

भारत की सबसे बड़ी विशेषता इसकी 'अनेकता में एकता' है। यहाँ अलग-अलग धर्मों, जातियों, भाषाओं और पहनावे वाले लोग एक साथ प्रेम से रहते हैं। जहाँ एक ओर कश्मीर की बर्फीली वादियाँ हैं, वहीं दूसरी ओर राजस्थान का तपता मरुस्थल। कहीं घने जंगल हैं, तो कहीं लहलहाते खेत। दीपावली, ईद, होली, क्रिसमस और गुरुपुरब जैसे त्योहार यहाँ की गंगा-जमुनी तहजीब को दर्शाते हैं। यहाँ की प्राचीन नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों ने दुनिया को ज्ञान का प्रकाश दिखाया था।

आधुनिक भारत की प्रगति :

आज का भारत तेजी से बदल रहा है। हम अंतरिक्ष विज्ञान (ISRO) से लेकर सूचना प्रौद्योगिकी (IT) तक दुनिया का नेतृत्व कर रहे हैं। मंगल ग्रह तक पहुँचने से लेकर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने तक, भारत ने हर क्षेत्र में अपनी धाक जमाई है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहाँ हर व्यक्ति को समान अधिकार प्राप्त हैं।

उपसंहार :

भारत की महानता इसकी सहिष्णुता और मानवता में निहित है। हम शांति के पक्षधर हैं लेकिन अपनी रक्षा करना भी जानते हैं। एक भारतीय होने के नाते यह मेरा गौरव है कि मैं इस पावन मिट्टी में जन्मा हूँ। हमें मिलकर अपने देश को फिर से 'विश्व गुरु' के पद पर प्रतिष्ठित करना है। जय हिंद, जय भारत!

9. मेरे जीवन का लक्ष्य : एक आदर्श शिक्षक
प्रस्तावना :

बिना लक्ष्य के मनुष्य का जीवन उस पतवार विहीन नाव के समान है जो लहरों के थपेड़े खाकर कहीं भी भटक सकती है। जीवन में एक निश्चित उद्देश्य का होना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि यही हमें मेहनत करने की प्रेरणा और दिशा प्रदान करता है। हर किसी की रुचि अलग होती है— कोई डॉक्टर बनना चाहता है, तो कोई इंजीनियर। मेरे जीवन का लक्ष्य एक 'आदर्श शिक्षक' बनना है।

शिक्षक बनने का कारण :

समाज में शिक्षक का स्थान सर्वोच्च होता है। एक शिक्षक ही है जो अबोध बालक के भविष्य को आकार देता है और उसे एक जिम्मेदार नागरिक बनाता है। मैं केवल पैसा कमाने के लिए नौकरी नहीं करना चाहता, बल्कि अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान की ज्योति जलाना चाहता हूँ। एक शिक्षक के पास समाज को बदलने की ताकत होती है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे महापुरुषों ने शिक्षक के रूप में जो मिसाल पेश की, उसने मुझे गहराई से प्रभावित किया है।

मेरे प्रयास और संकल्प :

अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मैं वर्तमान में कड़ी मेहनत कर रहा हूँ। मैं केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि अपने चरित्र और नैतिकता को भी ऊंचा उठाना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ कि मैं ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब बच्चों को शिक्षित कर सकूँ, ताकि वे भी देश के विकास में अपना योगदान दे सकें। मैं एक ऐसा शिक्षक बनना चाहता हूँ जिसे छात्र केवल डरे नहीं, बल्कि सम्मान दें और अपनी समस्याओं को साझा कर सकें।

उपसंहार :

लक्ष्य प्राप्त करना आसान नहीं होता, लेकिन दृढ़ निश्चय और निरंतर परिश्रम से कुछ भी असंभव नहीं है। मुझे विश्वास है कि एक दिन मैं अपने लक्ष्य को प्राप्त कर समाज और राष्ट्र की सेवा करूँगा। एक शिक्षक के रूप में मैं नए भारत के निर्माण में अपनी आहुति दूँगा।

10. कम्प्यूटर : डिजिटल युग की आधारशिला
प्रस्तावना :

आज का युग सूचना प्रौद्योगिकी का युग है। यदि हम अपने चारों ओर देखें तो शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र मिले जहाँ कम्प्यूटर का उपयोग न हो रहा हो। चार्ल्स बैबेज द्वारा आविष्कृत यह मशीन आज मानव जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन गई है। यह केवल एक गणना करने वाली मशीन नहीं है, बल्कि सूचनाओं का अथाह भंडार और कार्यों को गति देने वाला एक अद्भुत साधन है।

विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग :

शिक्षा के क्षेत्र में कम्प्यूटर और इंटरनेट ने क्रांति ला दी है। छात्र घर बैठे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों से पढ़ सकते हैं। बैंकिंग प्रणाली तो पूरी तरह कम्प्यूटर पर निर्भर है; अब हम घर बैठे पैसे भेज और मंगा सकते हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में जटिल से जटिल ऑपरेशन और रोगों की जाँच कम्प्यूटर के माध्यम से ही संभव हो पाई है। रेलवे, हवाई जहाज और होटलों की बुकिंग अब मिनटों का काम है। मनोरंजन के क्षेत्र में गेमिंग, फिल्म निर्माण और संगीत के लिए भी यह एक वरदान है। कार्यालयों में डेटा सुरक्षित रखने और गणना करने के लिए यह एक विश्वसनीय मित्र है।

सावधानी एवं नुकसान :

जहाँ कम्प्यूटर के अनगिनत लाभ हैं, वहीं कुछ नुकसान भी हैं। इसका अत्यधिक उपयोग आँखों और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालता है। साइबर क्राइम और डेटा चोरी जैसी समस्याएँ भी बढ़ रही हैं। बच्चे घंटों तक वीडियो गेम और सोशल मीडिया पर समय बर्बाद करते हैं, जिससे उनकी रचनात्मकता कम हो रही है। अतः इसका उपयोग विवेकपूर्ण तरीके से करना चाहिए।

उपसंहार :

आज के समय में कम्प्यूटर की जानकारी होना उतना ही जरूरी है जितना कि साक्षर होना। यह विकास का इंजन है। यदि हम कदम से कदम मिलाकर चलना चाहते हैं, तो हमें इस तकनीक को अपनाना होगा और इसका सही दिशा में उपयोग कर अपने जीवन को समृद्ध बनाना होगा।

11. अनुशासन का महत्व : सफलता की पहली सीढ़ी
प्रस्तावना :

अनुशासन दो शब्दों से मिलकर बना है— 'अनु' और 'शासन', जिसका अर्थ है अपने आप पर शासन करना या नियमों का पालन करना। प्रकृति का कण-कण अनुशासन में है। सूरज समय पर उगता है, ऋतुएँ समय पर आती हैं और चंद्रमा अपनी कक्षा में घूमता है। यदि प्रकृति अपना अनुशासन तोड़ दे, तो प्रलय आ जाएगी। इसी प्रकार मानव जीवन में भी बिना अनुशासन के कोई भी व्यक्ति महान नहीं बन सकता। अनुशासन वह सेतु है जो लक्ष्यों को उपलब्धियों से जोड़ता है।

विद्यार्थी जीवन में अनुशासन :

विद्यार्थी जीवन में अनुशासन की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। एक अनुशासित छात्र समय पर उठता है, समय पर स्कूल जाता है और अपने कार्यों को समय पर पूरा करता है। अनुशासन का अर्थ केवल नियमों को मानना ही नहीं, बल्कि अपने चरित्र को संवारना भी है। जो विद्यार्थी अनुशासन का पालन करते हैं, वे न केवल अच्छे अंक लाते हैं, बल्कि समाज में भी सम्मान पाते हैं। इसके विपरीत, अनुशासनहीन छात्र अपनी प्रतिभा को आलस्य और अव्यवस्था में खो देते हैं।

अनुशासन के लाभ :

अनुशासन से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास और आत्मसंयम पैदा होता है। यह हमें कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य रखना सिखाता है। खेल के मैदान में हो या युद्ध की भूमि में, बिना अनुशासन के जीत संभव नहीं है। सेना में अनुशासन ही सैनिकों को अजेय बनाता है। अनुशासन हमारे व्यक्तित्व में निखार लाता है और हमें समाज का एक आदर्श नागरिक बनाता है। यह हमें सिखाता है कि अपनी स्वतंत्रता का उपयोग इस तरह करें कि दूसरों की स्वतंत्रता का हनन न हो।

उपसंहार :

अनुशासन कोई बोझ नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक कला है। शुरुआत में यह थोड़ा कठिन लग सकता है, लेकिन इसके फल बहुत मीठे होते हैं। जिस समाज और राष्ट्र के नागरिक अनुशासित होते हैं, वह राष्ट्र दिन-दूनी रात-चौगुनी प्रगति करता है। अतः हमें अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अनुशासन को अपनाना चाहिए।

12. खेलकूद का महत्व : स्वस्थ तन, सुखी मन
प्रस्तावना :

"स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है।" मनुष्य के सर्वांगीण विकास के लिए केवल पढ़ाई-लिखाई ही काफी नहीं है, बल्कि शारीरिक व्यायाम और खेलकूद भी उतने ही आवश्यक हैं। आधुनिक युग की भागदौड़ भरी जिंदगी में खेलकूद मनोरंजन का सबसे अच्छा साधन तो है ही, साथ ही यह स्वास्थ्य बनाए रखने का सबसे सस्ता और प्रभावी तरीका भी है। खेल जीवन को जीवंतता प्रदान करते हैं और हमें सक्रिय रखते हैं।

शारीरिक एवं मानसिक लाभ :

खेल खेलने से हमारा शरीर मजबूत बनता है और रक्त का संचार सुचारू रूप से होता है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और हम मोटापा, मधुमेह तथा हृदय रोग जैसी बीमारियों से बचे रहते हैं। मानसिक रूप से खेल हमें तनाव से मुक्ति दिलाते हैं। खेल के मैदान में हम हार और जीत को समान रूप से स्वीकार करना सीखते हैं। यह हमें धैर्य, टीम भावना (Team Spirit) और सहयोग की शिक्षा देता है। क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी जैसे सामूहिक खेल हमें साथ मिलकर काम करना सिखाते हैं।

कैरियर और वैश्विक गौरव :

आज के समय में खेल केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें कैरियर की भी अपार संभावनाएँ हैं। नीरज चोपड़ा, पी.वी. सिंधु और एम.एस. धोनी जैसे खिलाड़ियों ने खेल के माध्यम से न केवल अपना बल्कि देश का नाम भी पूरी दुनिया में रोशन किया है। ओलंपिक और एशियाई खेलों में पदक जीतना किसी भी राष्ट्र के लिए गौरव की बात होती है। सरकार भी अब 'खेलो इंडिया' जैसी योजनाओं के माध्यम से प्रतिभावान खिलाड़ियों को प्रोत्साहित कर रही है।

उपसंहार :

शिक्षा और खेल एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जिस प्रकार भोजन के बिना शरीर नहीं चल सकता, उसी प्रकार खेलों के बिना व्यक्तित्व का विकास अधूरा है। प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी रुचि के अनुसार किसी न किसी खेल में अवश्य भाग लेना चाहिए। याद रखिए, "खेलोगे-कूदोगे बनोगे नवाब, पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे महान।" (लेकिन दोनों का संतुलन जरूरी है)।

13. वृक्षारोपण का महत्व : हरियाली ही खुशहाली
प्रस्तावना :

वृक्ष पृथ्वी के फेफड़े हैं। वे प्रकृति के वह अनमोल उपहार हैं जिनके बिना मानव जीवन की कल्पना भी असंभव है। अनादि काल से ही वृक्ष और मनुष्य का गहरा नाता रहा है। वृक्ष हमें न केवल फल, फूल और छाया प्रदान करते हैं, बल्कि वे जीवनदायिनी ऑक्सीजन के मुख्य स्रोत भी हैं। लेकिन आज बढ़ती आबादी और शहरीकरण की वजह से हम जंगलों को काटते जा रहे हैं, जिसके कारण पर्यावरण का संतुलन बिगड़ गया है। ऐसी स्थिति में 'वृक्षारोपण' ही एकमात्र समाधान है।

पर्यावरण संतुलन में भूमिका :

वृक्षारोपण से पर्यावरण को कई लाभ होते हैं। वृक्ष वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैं और हमें शुद्ध हवा देते हैं। वे वर्षा लाने में सहायक होते हैं और मिट्टी के कटाव (Soil Erosion) को रोकते हैं। वृक्ष पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं को आश्रय प्रदान करते हैं। तपती गर्मी में वृक्षों की छाया ठंडक प्रदान करती है और तापमान को कम रखने में मदद करती है। आयुर्वेद में कई वृक्षों जैसे नीम, तुलसी और पीपल को औषधि का खजाना माना गया है। वृक्षों की कमी से ही आज ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।

हमारा दायित्व :

केवल पेड़ लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि उनकी देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है। हमें अपने जन्मदिन, शादी की वर्षगांठ या किसी भी शुभ अवसर पर कम से कम एक पौधा जरूर लगाना चाहिए और उसे बड़ा होने तक पानी और सुरक्षा देनी चाहिए। सरकार भी वन महोत्सव जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से वृक्षारोपण को बढ़ावा दे रही है, लेकिन यह तब तक सफल नहीं होगा जब तक आम नागरिक इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित नहीं करेंगे।

उपसंहार :

वृक्ष धरा के भूषण हैं। यदि हमें अपनी भावी पीढ़ी को एक सुरक्षित और हरी-भरी पृथ्वी सौंपनी है, तो हमें जंगलों को बचाने और नए पेड़ लगाने का संकल्प लेना होगा। याद रखिए, "वृक्ष लगाओ, जीवन बचाओ।" पेड़ होंगे तो हरियाली होगी और हरियाली होगी तभी खुशहाली होगी।

14. मोबाइल फोन : आधुनिक युग का वरदान या अभिशाप
प्रस्तावना :

विज्ञान के चमत्कारों में मोबाइल फोन एक ऐसा आविष्कार है जिसने पूरी दुनिया को हमारी मुट्ठी में कर दिया है। आज के समय में मोबाइल फोन के बिना जीवन की कल्पना करना बहुत कठिन हो गया है। एक छोटे से यंत्र में इंटरनेट, कैमरा, कैलकुलेटर, टॉर्च और टीवी जैसी तमाम सुविधाएँ समाहित हैं। इसने संचार के क्षेत्र में ऐसी क्रांति ला दी है कि हम पलक झपकते ही सात समंदर पार बैठे व्यक्ति से वीडियो कॉल पर बात कर सकते हैं।

वरदान के रूप में :

मोबाइल फोन आज के युग में एक सच्चा सहायक है। आपातकालीन स्थिति में यह जान बचाने का साधन बन सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में छात्र इसके जरिए ऑनलाइन क्लास ले सकते हैं और किसी भी विषय की जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकते हैं। बैंकिंग, ऑनलाइन शॉपिंग, बिजली बिल का भुगतान और टिकट बुकिंग जैसे कार्य अब घर बैठे संभव हैं। गूगल मैप्स की मदद से हम किसी भी अनजाने रास्ते पर आसानी से जा सकते हैं। व्यापारिक क्षेत्र में भी मोबाइल ने कार्यों को बहुत सरल और तेज बना दिया है।

अभिशाप के रूप में :

हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। मोबाइल का गलत और अत्यधिक उपयोग इसे अभिशाप बना देता है। आजकल लोग सोशल मीडिया और रील्स देखने में अपना कीमती समय बर्बाद करते हैं। बच्चों में मोबाइल की लत के कारण उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। अधिक उपयोग से आँखों की रोशनी कम होना, सिरदर्द और अनिद्रा जैसी बीमारियाँ बढ़ रही हैं। इसके अलावा साइबर क्राइम, धोखाधड़ी और अश्लीलता का प्रसार भी समाज के लिए खतरा बन गया है। लोग अपनों के पास बैठकर भी फोन में व्यस्त रहते हैं, जिससे आपसी संवाद कम हो रहा है।

उपसंहार :

मोबाइल फोन अपने आप में बुरा नहीं है, यह तो उपयोग करने वाले पर निर्भर करता है कि वह इसका इस्तेमाल कैसे करता है। यदि हम इसे अपनी जरूरत के लिए इस्तेमाल करें, तो यह एक वरदान है, लेकिन यदि इसे अपनी लत बना लें, तो यह अभिशाप बन जाता है। हमें तकनीक का गुलाम नहीं, बल्कि मालिक बनना चाहिए।

15. स्वास्थ्य का महत्व : स्वास्थ्य ही जीवन है
प्रस्तावना :

एक पुरानी कहावत है— "पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में हो माया।" इसका अर्थ है कि जीवन का सबसे बड़ा सुख एक स्वस्थ शरीर है। स्वास्थ्य ही वह आधार है जिस पर जीवन की खुशी और सफलता टिकी होती है। दुनिया का सारा धन और वैभव बेकार है यदि आपका शरीर अस्वस्थ है। एक बीमार व्यक्ति के लिए सोने का बिस्तर भी कांटों की सेज जैसा लगता है। इसलिए कहा गया है कि 'स्वास्थ्य ही असली धन' (Health is Wealth) है।

अच्छे स्वास्थ्य के आधार :

अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए मुख्य रूप से तीन चीजों की आवश्यकता होती है— संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद। हमें जंक फूड से बचकर पौष्टिक और ताजे फलों-सब्जियों का सेवन करना चाहिए। व्यायाम हमारे शरीर को लचीला और मजबूत बनाता है। योग और प्राणायाम मानसिक शांति और एकाग्रता के लिए बहुत प्रभावी हैं। इसके अलावा स्वच्छता का भी बहुत महत्व है; अपने आसपास और शरीर की सफाई रखने से हम संक्रमण और बीमारियों से बचे रहते हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और समय पर सोना स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है।

स्वास्थ्य और सफलता :

एक स्वस्थ व्यक्ति ही पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ काम कर सकता है। जब हम स्वस्थ होते हैं, तो हमारा दिमाग अधिक सक्रिय रहता है और हम कठिन से कठिन कार्य को भी आसानी से कर लेते हैं। अस्वस्थता व्यक्ति को चिड़चिड़ा और आलसी बना देती है, जिससे वह अपने जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर पाता। इसलिए यदि आप जीवन में सफल होना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने शरीर का ध्यान रखें।

उपसंहार :

स्वास्थ्य ईश्वर का दिया हुआ वह अनमोल वरदान है जिसकी कद्र हमें इसे खोने से पहले करनी चाहिए। आजकल की तनावभरी जिंदगी में अपने लिए थोड़ा समय निकालना और व्यायाम करना बहुत जरूरी है। याद रखिए, यदि स्वास्थ्य गया तो समझो सब कुछ गया। इसलिए "स्वस्थ रहिए, खुश रहिए और जीवन का आनंद लीजिए।"

IV. संवाद लेखन (Conversation)

1. बाज़ार में मास्क का उपयोग नहीं करने के संबंध में दो मित्रों के बीच संवाद।

रोहन: नमस्ते सोहन! कहाँ से आ रहे हो?

सोहन: नमस्ते! बाज़ार गया था, पर वहां की भीड़ देखकर डर लग रहा है। लोग मास्क नहीं पहन रहे हैं।

रोहन: हाँ भाई, सावधानी ही बचाव है। हमें लोगों को जागरूक करना चाहिए।

2. गृह-कार्य न कर पाने के कारण छात्र और अध्यापक के बीच संवाद।

शिक्षक: राहुल, कल का गृह-कार्य दिखाओ।

छात्र: क्षमा करें सर, कल माताजी की तबीयत खराब होने के कारण मैं काम पूरा नहीं कर पाया।

शिक्षक: ठीक है, पर आज काम पूरा कर लेना। माताजी का ध्यान रखो।

3. विलम्ब से घर लौटने पर माँ और पुत्री के बीच संवाद।

माँ: रिया, आज तुम्हें इतनी देर क्यों हो गई?

रिया: माँ, स्कूल बस खराब हो गई थी, इसलिए दूसरी बस का इंतजार करना पड़ा।

माँ: ठीक है, अगली बार फोन कर दिया करो। अब हाथ-मुँह धो लो।

4. देश में बढ़ती महंगाई के संबंध में दो मित्रों के बीच संवाद।

आर्यन: सुमित, सब बहुत महंगा हो गया है।

सुमित: हाँ भाई, दाल और सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। बजट बिगड़ गया है।

आर्यन: आम आदमी का जीना मुश्किल हो गया है। सरकार को कुछ करना चाहिए।

5. प्रधानाध्यापक और शिक्षार्थी के बीच नामांकन हेतु बातचीत पर संवाद।

शिक्षार्थी: नमस्ते सर! मुझे ग्यारहवीं कक्षा में नामांकन लेना है।

प्रधानाध्यापक: तुम्हारे दसवीं के अंक कितने हैं?

शिक्षार्थी: सर, मेरे 90% अंक हैं और मेरे पास सभी प्रमाण-पत्र हैं।

प्रधानाध्यापक: बहुत अच्छे! कार्यालय में फॉर्म जमा कर दो।

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