हिन्दी व्याकरण: संपूर्ण झारखंड बोर्ड गाइड

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1. क्रिया-भेद: अकर्मक और सकर्मक

क्रिया के मुख्य रूप से दो भेद होते हैं- अकर्मक और सकर्मक। अकर्मक में कर्म की आवश्यकता नहीं होती, जबकि सकर्मक में कर्म का योग होता है।

2. अनेकार्थी शब्द

जब एक शब्द के एक से अधिक अर्थ होते हैं, तो वह अनेकार्थी शब्द कहलाता है। जैसे- अंबर (आकाश, वस्त्र)।

3. अव्यय (अविकारी शब्द)

जो शब्द लिंग, वचन, कारक आदि के कारण अपना रूप नहीं बदलते, वे अव्यय या अविकारी कहलाते हैं।

4. रचना के आधार पर वाक्य-भेद

रचना की दृष्टि से वाक्य तीन प्रकार के होते हैं: सरल वाक्य, मिश्र वाक्य और संयुक्त वाक्य।

5. वाच्य (Voice)

वाच्य क्रिया की उस रचना को कहते हैं जिससे पता चलता है कि क्रिया का मुख्य बिंदु कर्ता है या कर्म। इसके तीन मुख्य भेद हैं।

6. समास

दो या अधिक पदों के मेल से बने नवीन और स्वतंत्र शब्द को सामासिक पद या समास कहते हैं।

7. पद-परिचय

वाक्य में प्रयुक्त पदों का व्याकरणिक परिचय देना 'पद परिचय' कहलाता है।

8. अलंकार

काव्य की सुंदरता बढ़ाने वाले तत्वों को अलंकार कहते हैं। इसमें उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा आदि प्रमुख हैं।