लखनवी अंदाज़ (Lakhnavi Andaz)

Class 10 Hindi | Important Question Bank
📚 गद्यांश आधारित प्रश्न (Extract Based Questions)
"पासेंजर ट्रेन चल पड़ने की उतावली में फुंकार रही थी। आराम से सेकेंड क्लास में जाने के लिए दाम अधिक लगते हैं। दूर तो जाना नहीं था। भीड़ से बचकर, एकांत में नयी कहानी के संबंध में सोच सकने... के लिए टिकट सेकेंड क्लास का ही ले लिया।"
(क) लेखक ने सेकेंड क्लास का टिकट क्यों खरीदा? Imp.
उत्तर: लेखक ने सेकेंड क्लास का टिकट दो कारणों से खरीदा:
1. वे भीड़ से बचकर एकांत में बैठना चाहते थे।
2. वे खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देखते हुए अपनी 'नयी कहानी' के बारे में सोचना चाहते थे।
(ख) डिब्बे में चढ़ने पर लेखक ने क्या देखा?
उत्तर: लेखक ने देखा कि डिब्बा खाली नहीं था। एक बर्थ पर लखनवी नवाब की तरह दिखने वाले एक सज्जन पालथी मारे बैठे थे और उनके सामने तौलिए पर दो ताजे खीरे रखे थे।
(ग) लेखक के आने पर नवाब साहब की क्या प्रतिक्रिया थी?
उत्तर: लेखक के अचानक आ जाने से नवाब साहब की आँखों में असंतोष दिखाई दिया। उन्हें लगा कि उनके एकांत में विघ्न (रुकावट) पड़ गया है, इसलिए उन्होंने लेखक से बात करने में कोई उत्साह नहीं दिखाया।
"नवाब साहब ने खीरे की सब फाँकों को खिड़की के बाहर देख-देखकर फेंक दिया। तौलिये से हाथ और होंठ पोंछ लिए और गर्व से गुलाबी आँखों से हमारी ओर देख लिया, मानो कह रहे हों—यह है खानदानी रईसों का तरीका!"
(क) नवाब साहब ने खीरे का क्या किया? Imp.
उत्तर: नवाब साहब ने खीरे की फाँकों को बहुत प्यार से सूंघा और फिर बिना खाए एक-एक करके खिड़की के बाहर फेंक दिया।
(ख) 'खानदानी रईसों का तरीका' से क्या व्यंग्य है?
उत्तर: यह व्यंग्य है कि पतनशील सामंती वर्ग (Feudal Class) के लोग अपनी झूठी शान दिखाने के लिए खाने की चीजों को भी बर्बाद कर देते हैं। वे दिखाना चाहते हैं कि खीरा जैसी तुच्छ चीज खाना उनकी रईसी (Status) के खिलाफ है।
(ग) खीरा फेंकने के बाद नवाब साहब ने क्या किया?
उत्तर: उन्होंने गर्व से लेखक की ओर देखा और लेट गए, मानो वे इस 'कठिन काम' (खीरा सूंघकर फेंकने) से थक गए हों।
🎯 1 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 15-20 Words)
Q1. नवाब साहब का सहसा क्या करना लेखक को अच्छा नहीं लगा? 2025
a) बात करना
b) खीरा काटना
c) भाव परिवर्तन करना
d) जेब से चाकू निकालना

उत्तर: c) भाव परिवर्तन करना (अचानक बात करने लगना)।
Q2. अकेले सफर का वक्त काटने के लिए नवाब साहब ने क्या खरीदा था? 2024
a) अनार
b) पुस्तक
c) पत्रिका
d) खीरा

उत्तर: d) खीरा
Q3. 'लखनवी अंदाज़' पाठ के लेखक कौन हैं?
उत्तर: यशपाल (Yashpal)।
Q4. नवाब साहब ने खीरे पर क्या छिड़का?
उत्तर: उन्होंने खीरे पर जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च की सुर्खी (पाउडर) छिड़की।
Q5. लेखक ने नवाब साहब को 'नयी कहानी का लेखक' क्यों कहा?
उत्तर: क्योंकि नवाब साहब बिना खीरा खाए डकार ले सकते हैं, तो लेखक भी बिना विचार और घटना के कहानी लिख सकते हैं।
📝 2 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 30-40 Words)
Q1. लेखक ने खीरा खाने से मना क्यों कर दिया? Imp.
उत्तर: लेखक ने पहले "शुक्रिया" कहकर मना कर दिया था। जब नवाब साहब ने दोबारा पूछा, तो लेखक का आत्मसम्मान (Self-respect) आड़े आ गया। इसलिए उन्होंने बहाना बनाया कि "मेरा मेदा (Digestive system) कमजोर है" और मना कर दिया।
Q2. नवाब साहब ने खीरे का रसास्वादन किस प्रकार किया?
उत्तर: नवाब साहब ने खीरे की फाँक को होंठों तक उठाया, उसे सूंघा। स्वाद के आनंद में उनकी पलकें मुंद गईं और मुँह में आए पानी को गले से उतार लिया। फिर उन्होंने फाँक को खिड़की से बाहर फेंक दिया।
Q3. नवाब साहब खीरा खाने की तैयारी कैसे कर रहे थे?
उत्तर: उन्होंने तौलिए से खीरे पोंछे, चाकू निकालकर उनके सिर काटे और गोदकर झाग (कड़वाहट) निकाला। फिर बहुत सलीके (तरीके) से छीलकर फाँकें बनाईं और उन पर नमक-मिर्च छिड़का।
Q4. 'मुफस्सिल की पैसेंजर ट्रेन' का क्या अर्थ है?
उत्तर: 'मुफस्सिल' का अर्थ है - शहर के आसपास के इलाके। वह ट्रेन शहर के केंद्र से बाहरी इलाकों को जाती थी और थोड़ी धीमी गति से चलती थी।
✍️ 3 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 50-60 Words)
Q1. 'लखनवी अंदाज़' नामक व्यंग्य का क्या संदेश है? 2013, 2017, 2018
उत्तर: यह पाठ संदेश देता है कि हमें:
1. बनावटी जीवन शैली और झूठे दिखावे से दूर रहना चाहिए।
2. जीवन की वास्तविकता (Reality) को स्वीकार करना चाहिए।
3. नवाब साहब का खीरा सूंघकर फेंकना यह दिखाता है कि सामंती वर्ग अपनी झूठी शान बचाने के लिए कितना अव्यावहारिक हो सकता है। हमें 'जमीन से जुड़ा' होना चाहिए।
Q2. "बिना विचार, घटना और पात्रों के भी क्या कहानी लिखी जा सकती है?" - यशपाल के इस विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं? Imp.
उत्तर: लेखक ने यह बात व्यंग्य में कही है।
जैसे 'पेट भरने के लिए भोजन खाना जरुरी है, सिर्फ सूंघने से पेट नहीं भरता', वैसे ही कहानी के लिए 'पात्र, घटना और विचार' जरुरी हैं।
लेखक कहना चाहते हैं कि 'नयी कहानी' के नाम पर कुछ लेखक बिना सिर-पैर की रचनाएँ कर रहे हैं, जो कि असंभव है। बिना ठोस आधार के कहानी नहीं बन सकती।
Q3. नवाब साहब के डकार लेने पर लेखक ने क्या सोचा?
उत्तर: जब नवाब साहब ने खीरा फेंका और फिर तृप्ति की 'डकार' ली, तो लेखक हैरान रह गए। उन्होंने सोचा कि "जब खीरा सूंघने मात्र से पेट भर सकता है और डकार आ सकती है, तो फिर बिना विचार, घटना और पात्रों के नई कहानी भी लिखी जा सकती है।" यह लेखक का 'नयी कहानी' आंदोलन पर व्यंग्य था।
Q4. लेखक को नवाब साहब के किन हाव-भावों से महसूस हुआ कि वे उनसे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सुक नहीं हैं?
उत्तर:
1. जब लेखक डिब्बे में घुसे, तो नवाब साहब ने उनकी ओर देखा तक नहीं, बल्कि खिड़की से बाहर देखने लगे।
2. उनके चेहरे पर असंतोष और बेरुखी थी।
3. उन्होंने लेखक से कोई दुआ-सलाम नहीं की।
इन सब बातों से लेखक समझ गए कि नवाब साहब उनसे बात नहीं करना चाहते।
🔥 5 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 100-120 Words)
Q1. नवाब साहब के चरित्र-चित्रण (Character Sketch) की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए। Imp.
उत्तर: 'लखनवी अंदाज़' पाठ में नवाब साहब पतनशील सामंती वर्ग (Declining Feudal Class) के प्रतीक हैं। उनके चरित्र की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. दिखावे की प्रवृत्ति: वे वास्तविकता से दूर, दिखावे की दुनिया में जीते हैं। वे सेकंड क्लास में सफर कर रहे हैं (शायद पैसे बचाने के लिए), लेकिन खीरा खाने को अपनी शान के खिलाफ मानते हैं।
  2. अहंकारी: वे आम आदमी (लेखक) से बात करना अपनी तौहीन समझते हैं।
  3. नजाकत और नफासत: वे खीरे को जिस सलीके से काटते और धोते हैं, वह उनकी लखनवी नजाकत को दर्शाता है।
  4. अव्यावहारिक: खीरा खरीदकर उसे सूंघकर फेंक देना उनकी मूर्खता और अव्यावहारिकता की हद है।
Q2. 'खीरा' जैसी साधारण वस्तु को 'नायाब' बनाने के लिए नवाब साहब ने क्या-क्या किया? वर्णन करें। 2015, 2018
उत्तर: नवाब साहब ने खीरे को एक मामूली खाद्य पदार्थ न मानकर उसे एक 'खास' (नायाब) वस्तु की तरह ट्रीट किया:

  • सबसे पहले उन्होंने खीरे को लोटे के पानी से खिड़की के बाहर धोया और तौलिए से पोंछा।
  • फिर जेब से चाकू निकालकर दोनों सिरों को काटा और गोदकर झाग (कड़वाहट) निकाला।
  • उन्होंने बहुत ही एहतियात (सावधानी) से छीलकर फाँकें बनाईं और उन्हें तौलिए पर करीने (सलीके) से सजाया।
  • अंत में उस पर जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च छिड़की।
यह पूरी प्रक्रिया इतनी गंभीरता से की गई जैसे वे कोई महान कार्य कर रहे हों, जिससे खीरा 'रसीला' और 'पनियाला' हो गया।
Q3. क्या सनक का कोई सकारात्मक रूप हो सकता है? यदि हाँ, तो ऐसी सनकों का उल्लेख कीजिए। Value Based
उत्तर: हाँ, 'सनक' (Obsession/Passion) का सकारात्मक रूप भी हो सकता है।

आमतौर पर सनक को नकारात्मक माना जाता है (जैसे नवाब साहब की खीरा फेंकने की सनक)। लेकिन अगर सनक किसी अच्छे काम के लिए हो, तो वह चमत्कार कर सकती है।
  • देशभक्ति की सनक: जैसे भगत सिंह या सुभाष चंद्र बोस में देश को आजाद कराने की सनक थी।
  • खोज की सनक: वैज्ञानिकों में आविष्कार करने की सनक होती है (जैसे थॉमस एडिसन)।
  • समाज सेवा की सनक: जैसे मदर टेरेसा में गरीबों की सेवा करने की धुन थी।
अतः यदि सनक का उपयोग रचनात्मक कार्यों में किया जाए, तो वह समाज और देश के लिए वरदान बन सकती है।