बालगोबिन भगत (Balgobin Bhagat)
Class 10 Hindi | Important Question Bank
📚 गद्यांश आधारित प्रश्न (Extract Based Questions)
"बालगोबिन भगत मंझोले कद के गोरे-चिट्टे आदमी थे। साठ से ऊपर के ही होंगे। बाल पक गए थे... कमर में एक लंगोटी मात्र और सिर पर कबीरपंथियों की-सी कनफटी टोपी।"
(क) बालगोबिन भगत दिखने में कैसे थे?
Imp.
उत्तर: बालगोबिन भगत मंझोले (Medium) कद के गोरे-चिट्टे आदमी थे। उनकी उम्र 60 से ऊपर थी और उनके बाल सफेद (पक गए) थे।
(ख) उनकी वेशभूषा (पहनावा) कैसी थी?
उत्तर: वे बहुत कम कपड़े पहनते थे। कमर में सिर्फ एक लंगोटी और सिर पर कबीरपंथियों जैसी कनफटी टोपी पहनते थे। सर्दियों में एक काली कमली (कंबल) ओढ़ लेते थे।
(ग) वे माथे पर क्या लगाते थे?
उत्तर: वे माथे पर हमेशा रामानंदी चंदन का टीका लगाते थे जो नाक के एक छोर से शुरू होता था।
"बेटे को आँगन में एक चटाई पर लिटाकर एक सफेद कपड़े से ढाँक रखा है... वह कुछ फूल तो हमेशा ही रोपते रहते... सिरहाने एक चिराग जला रखा है और उसके सामने जमीन पर ही आसन जमाए गीत गाए चले जा रहे हैं।"
(क) यह दृश्य किस समय का है?
Imp.
उत्तर: यह दृश्य बालगोबिन भगत के इकलौते बेटे की मृत्यु के समय का है।
(ख) भगत जी बेटे की लाश के पास क्या कर रहे थे?
उत्तर: वे रोने के बजाय जमीन पर आसन जमाकर कबीर के पद (गीत) गा रहे थे। वे अपनी पतोहू (बहू) को भी रोने के बजाय उत्सव मनाने को कह रहे थे।
(ग) उन्होंने बेटे की मृत्यु को 'उत्सव' क्यों माना?
उत्तर: उनका मानना था कि आज आत्मा (विरहिन) अपने परमात्मा (प्रेमी) से जा मिली है। यह दुख की नहीं, बल्कि आनंद की बात है।
🎯 1 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 15-20 Words)
Q1. भगत जी गाना गाते समय क्या बजाया करते थे?
2025
a) सितार
b) वीणा
c) ढोलक
d) खंजड़ी
उत्तर: d) खंजड़ी
b) वीणा
c) ढोलक
d) खंजड़ी
उत्तर: d) खंजड़ी
Q2. बालगोबिन भगत किसे अपना 'साहब' मानते थे?
Imp.
उत्तर: वे कबीरदास जी को अपना 'साहब' (ईश्वर/गुरु) मानते थे।
Q3. बालगोबिन भगत का बेटा कैसा था?
उत्तर: उनका बेटा बहुत सुस्त और बोदा (कमजोर बुद्धि वाला) था।
Q4. 'प्रभाती' कब से कब तक गाई जाती थी?
उत्तर: कार्तिक महीने से लेकर फागुन महीने तक (सर्दियों में)।
Q5. 'बालगोबिन भगत' पाठ के लेखक कौन हैं?
उत्तर: रामवृक्ष बेनीपुरी (Ramvriksh Benipuri)।
📝 2 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 30-40 Words)
Q1. बालगोबिन भगत अपने सुस्त बेटे से अधिक प्यार क्यों करते थे?
Imp.
उत्तर: उनका मानना था कि जो लोग शारीरिक या मानसिक रूप से कमजोर (बोदा) होते हैं, उन्हें ज्यादा निगरानी और प्यार की जरूरत होती है। इसलिए वे अपने बेटे का खास ख्याल रखते थे।
Q2. भादो की रात में भगत का संगीत कैसा लगता था?
उत्तर: जब पूरी दुनिया सो रही होती थी और मेंढक टर्रा रहे होते थे, तब भगत जी की खंजड़ी बजती थी। उनका गाना अंधेरी रात में बिजली की कौंध (चमक) की तरह लोगों को चौंका देता था और जगा देता था।
Q3. भगत जी अपनी फसल को सबसे पहले कहाँ ले जाते थे?
उत्तर: वे खेत में पैदा हुई सारी फसल को सिर पर लादकर सबसे पहले कबीरपंथी मठ में ले जाते थे। वहाँ उसे 'भेंट' के रूप में चढ़ाते थे और जो प्रसाद रूप में वापस मिलता, उसी से साल भर गुजारा करते थे।
Q4. 'गृहस्थ' होते हुए भी भगत 'साधु' क्यों थे?
2016
उत्तर: क्योंकि उनका पहनावा साधुओं जैसा था, वे कभी झूठ नहीं बोलते थे, किसी की चीज नहीं छूते थे और पूरी तरह कबीर के आदर्शों पर चलते थे। वे तन से गृहस्थ थे, पर मन से साधु थे।
✍️ 3 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 50-60 Words)
Q1. भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेले क्यों नहीं छोड़ना चाहती थी?
2025
उत्तर: भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेले इसलिए नहीं छोड़ना चाहती थी क्योंकि:
1. बेटे की मृत्यु के बाद भगत जी दुनिया में बिल्कुल अकेले रह गए थे।
2. वे बूढ़े हो चुके थे।
3. पतोहू को चिंता थी कि बुढ़ापे में उन्हें समय पर खाना कौन देगा और बीमार पड़ने पर एक चुल्लू पानी भी कौन देगा? इसलिए वह उनकी सेवा करना चाहती थी।
1. बेटे की मृत्यु के बाद भगत जी दुनिया में बिल्कुल अकेले रह गए थे।
2. वे बूढ़े हो चुके थे।
3. पतोहू को चिंता थी कि बुढ़ापे में उन्हें समय पर खाना कौन देगा और बीमार पड़ने पर एक चुल्लू पानी भी कौन देगा? इसलिए वह उनकी सेवा करना चाहती थी।
Q2. भगत ने अपने बेटे की मृत्यु पर अपनी भावनाएँ किस तरह व्यक्त कीं?
Imp.
उत्तर: भगत ने बेटे की मौत पर शोक नहीं मनाया।
- उन्होंने शव को फूलों से सजाया और सिरहाने दीप जलाया।
- वे जमीन पर बैठकर तल्लीनता से कबीर के गीत गाते रहे।
- उन्होंने रोती हुई पतोहू से कहा कि "यह रोने का नहीं, उत्सव मनाने का समय है" क्योंकि आत्मा परमात्मा से मिल गई है, जो सबसे बड़े आनंद की बात है।
Q3. आषाढ़ की रिमझिम में भगत के संगीत का जादू खेत में क्या असर डालता था?
उत्तर: जब भगत जी कीचड़ में सने हुए धान की रोपनी करते हुए गाते थे, तो उनका स्वर स्वर्ग की ओर उठता हुआ लगता था।
• बच्चे झूमने लगते थे।
• मेड़ पर बैठी औरतों के होंठ गुनगुनाने लगते थे।
• हलवाहों के पैर ताल से उठने लगते थे।
उनके संगीत से पूरे माहौल में एक जादू छा जाता था।
• बच्चे झूमने लगते थे।
• मेड़ पर बैठी औरतों के होंठ गुनगुनाने लगते थे।
• हलवाहों के पैर ताल से उठने लगते थे।
उनके संगीत से पूरे माहौल में एक जादू छा जाता था।
Q4. बालगोबिन भगत की मृत्यु किस प्रकार हुई?
उत्तर: भगत हर साल गंगा स्नान को जाते थे। वे घर से खाकर निकलते और वापस आकर ही खाते थे (4-5 दिन का उपवास)। इस बार लौटे तो तबीयत सुस्त थी। फिर भी उन्होंने अपना नेम-धर्म (नहाना, गाना) नहीं छोड़ा। एक दिन भोर में उनका गाना सुनाई नहीं दिया। जाकर देखा तो बालगोबिन भगत नहीं रहे, सिर्फ उनका पंजर (शरीर) पड़ा था।
🔥 5 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 100-120 Words)
Q1. खेती-बारी से जुड़े गृहस्थ बालगोबिन भगत अपनी किन चारित्रिक विशेषताओं के कारण साधु कहलाते थे?
2009, 2012, 2016
उत्तर: बालगोबिन भगत परिवार और खेती-बारी वाले 'गृहस्थ' थे, लेकिन उनका आचरण एक सच्चे 'साधु' जैसा था। उनकी विशेषताएँ थीं:
- कबीर के भक्त: वे कबीर को अपना 'साहब' मानते थे। उनके गीतों को गाते और उनके आदेशों पर चलते थे।
- सत्य और खराबोल: वे कभी झूठ नहीं बोलते थे और सबसे खरा (सीधा) व्यवहार रखते थे। दो टूक बात करने में संकोच नहीं करते थे।
- अपरिग्रह: वे किसी की चीज को बिना पूछे छूते तक नहीं थे। यहाँ तक कि दूसरे के खेत में शौच के लिए भी नहीं बैठते थे।
- निस्वार्थता: खेत की सारी उपज पहले मठ में भेंट करते और प्रसाद रूप में जो मिलता, उसी में संतोष करते।
- मोह-माया से दूर: इकलौते बेटे की मौत पर भी वे विचलित नहीं हुए, जो उनकी वैराग्य भावना को दिखाता है।
Q2. बालगोबिन भगत ने समाज में प्रचलित किन रूढ़ियों (परंपराओं) का विरोध किया?
Value Based
उत्तर: बालगोबिन भगत एक समाज सुधारक भी थे। उन्होंने अपनी करनी से कई पुरानी रूढ़ियों को तोड़ा:
- स्त्री द्वारा मुखाग्नि: उस समय औरतों का श्मशान जाना मना था, लेकिन भगत ने अपने बेटे की चिता को आग अपनी 'पतोहू' (बहू) के हाथों दिलवाई।
- विधवा विवाह का समर्थन: बेटे के श्राद्ध की अवधि पूरी होते ही उन्होंने पतोहू के भाई को बुलाया और आदेश दिया कि "इसकी दूसरी शादी कर देना"। उन्होंने विधवा का जीवन बर्बाद होने से बचाया।
- मृत्यु का उत्सव: उन्होंने मृत्यु को शोक नहीं, बल्कि आत्मा-परमात्मा का मिलन मानकर उत्सव का रूप दिया।
Q3. 'मोह और प्रेम में अंतर होता है' - भगत के जीवन से यह किस प्रकार सिद्ध होता है?
Imp.
उत्तर: भगत के जीवन से 'मोह' और 'प्रेम' का अंतर साफ़ दिखता है।
- प्रेम: वे अपने बेटे से बहुत प्रेम करते थे क्योंकि वह कमजोर था। उसकी देखरेख करते थे।
- मोह का अभाव: जब बेटा मरा, तो वे रोए नहीं। अगर उन्हें 'मोह' होता, तो वे दुःख में डूब जाते। लेकिन उन्होंने सत्य को स्वीकार किया कि शरीर नश्वर है।
- पतोहू के प्रति त्याग: वे चाहते तो बुढ़ापे के लिए बहू को घर में रोक सकते थे (यह मोह होता)। लेकिन उन्होंने बहू के भविष्य (प्रेम) के लिए उसे घर से जाने और दूसरी शादी करने का आदेश दिया।