नेताजी का चश्मा (Netaji Ka Chashma)

Class 10 Hindi | Important Question Bank
📚 गद्यांश आधारित प्रश्न (Extract Based Questions)
"हालदार साहब को हर पंद्रहवें दिन कंपनी के काम के सिलसिले में उस कस्बे से गुजरना पड़ता था। कस्बा बहुत बड़ा नहीं था... कस्बे में एक लड़कों का स्कूल, एक लड़कियों का स्कूल, एक सीमेंट का छोटा-सा कारखाना, दो ओपन एयर सिनेमाघर और एक नगरपालिका भी थी।"
(क) हालदार साहब कस्बे से क्यों गुजरते थे? Imp.
उत्तर: हालदार साहब अपनी कंपनी के काम के सिलसिले में हर 15वें दिन उस कस्बे से गुजरते थे।
(ख) नगरपालिका कस्बे में क्या-क्या काम करवाती थी?
उत्तर: नगरपालिका कभी सड़कें पक्की करवा देती थी, कभी पेशाबघर बनवा देती थी, कभी कबूतरों की छतरी बनवा देती थी और कभी-कभी कवि सम्मेलन भी करवा देती थी।
(ग) कस्बे के मुख्य चौराहे पर किसकी मूर्ति लगी थी?
उत्तर: कस्बे के मुख्य चौराहे पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की संगमरमर की मूर्ति (Bust) लगी थी।
"जीभ बाहर निकाली, आँखों ही आँखों में हँसा और बोल—नहीं साब! वो लँगड़ा क्या जाएगा फौज में। पागल है पागल! वो देखो, वो आ रहा है। आप उसी से बात कर लो। फोटो-वोटो छपवा दो उसका कहीं।"
(क) यह कथन किसने, किससे कहा? Imp.
उत्तर: यह कथन पानवाले ने हालदार साहब से कहा।
(ख) 'पागल' किसे कहा गया है और क्यों?
उत्तर: पानवाले ने 'कैप्टन चश्मेवाले' को पागल कहा है। चश्मेवाले की देशभक्ति और नेताजी के प्रति दीवानगी को देखकर पानवाला मजाक में उसे पागल कहता है।
(ग) वक्ता (पानवाले) का स्वभाव कैसा है?
उत्तर: पानवाला एक खुशमिजाज लेकिन संवेदनहीन (Insensitive) व्यक्ति है। वह देशभक्तों का मजाक उड़ाने में भी शर्म महसूस नहीं करता।
"मूर्ति की आँखों पर सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा रखा हुआ था, जैसा बच्चे बना लेते हैं। हालदार साहब भावुक हैं। इतनी-सी बात पर उनकी आँखें भर आईं।"
(क) हालदार साहब की आँखें क्यों भर आईं? 2025
उत्तर: हालदार साहब को लगा था कि कैप्टन के मरने के बाद अब कस्बे में देशभक्ति खत्म हो गई होगी। लेकिन बच्चों द्वारा बनाया गया सरकंडे का चश्मा देखकर उन्हें लगा कि देशभक्ति अभी भी जिंदा है। इसी खुशी में उनकी आँखें भर आईं।
(ख) 'सरकंडे का चश्मा' क्या दर्शाता है?
उत्तर: यह दर्शाता है कि आने वाली पीढ़ी (बच्चों) में भी देशप्रेम की भावना मौजूद है। देशभक्ति केवल बड़ों तक सीमित नहीं है।
(ग) हालदार साहब पहले क्या सोचकर दुखी थे?
उत्तर: वे सोच रहे थे कि कैप्टन मर गया, अब नेताजी की मूर्ति बिना चश्मे के रहेगी और देश के लिए मर-मिटने वालों का कोई सम्मान नहीं करेगा।
🎯 1 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 15-20 Words)
Q1. चश्मेवाले की मृत्यु के बाद मूर्ति पर बच्चों ने कैसा चश्मा लगा दिया? 2025
a) मेटल फ्रेम का
b) पत्थर का
c) शीशा का
d) सरकंडे का

उत्तर: d) सरकंडे का
Q2. नेताजी की मूर्ति बनाने वाले मास्टर का क्या नाम था? Imp.
उत्तर: मास्टर मोतीलाल (जो कस्बे के इकलौते हाईस्कूल में ड्राइंग मास्टर थे)।
Q3. 'नेताजी का चश्मा' कहानी के लेखक कौन हैं?
उत्तर: स्वयं प्रकाश (Swayam Prakash)।
Q4. हालदार साहब को क्या आदत पड़ गई थी?
उत्तर: हर बार कस्बे से गुजरते समय चौराहे पर रुकना, पान खाना और मूर्ति को ध्यान से देखना।
Q5. मूर्ति किस पत्थर की बनी थी?
उत्तर: मूर्ति संगमरमर (Marble) की बनी थी, लेकिन उस पर चश्मा असली था।
📝 2 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 30-40 Words)
Q1. मूर्ति में कौन-सी कमी रह गई थी जो खटकती थी? Imp.
उत्तर: नेताजी की आँखों पर संगमरमर का चश्मा नहीं था। मूर्तिकार शायद चश्मा बनाना भूल गया था या बारीकी के चक्कर में टूट गया था। इसलिए मूर्ति पर असली चश्मा लगा हुआ था।
Q2. हालदार साहब ने पानवाले से क्या पूछा?
उत्तर: हालदार साहब ने पूछा कि "भाई! यह तुम्हारे नेताजी का चश्मा हर बार बदल कैसे जाता है?" वे यह जानकर हैरान थे कि मूर्ति पत्थर की है लेकिन चश्मा रियल (असली) है।
Q3. कैप्टन चश्मेवाला क्या काम करता था?
उत्तर: कैप्टन एक बूढ़ा, मरियल-सा लँगड़ा आदमी था जो फेरी लगाकर चश्मे बेचता था। उसके पास कोई दुकान नहीं थी, वह एक बाँस पर चश्मे टांगकर बेचता था।
Q4. "भाई खूब! क्या आइडिया है।" - यह किसने और क्यों कहा? Imp.
उत्तर: हालदार साहब ने मूर्ति पर असली चश्मा देखकर ऐसा कहा। उन्होंने सोचा कि "मूर्ति कपड़े नहीं बदल सकती, लेकिन चश्मा तो बदल ही सकती है।" यह आइडिया उन्हें पसंद आया।
Q5. ड्राइंग मास्टर मोतीलाल ने नगरपालिका को क्या विश्वास दिलाया था?
उत्तर: उन्होंने कहा था कि वे "महीने भर में मूर्ति बनाकर पटक देंगे"। 'पटक देने' का मतलब है कि काम को जल्दी-जल्दी और बेमन से पूरा कर देंगे।
✍️ 3 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 50-60 Words)
Q1. सेनानी न होते हुए भी चश्मेवाले को लोग कैप्टन क्यों कहते थे? 2011, 2014, 2016, 2024
उत्तर: चश्मेवाला सेनानी नहीं था, फिर भी लोग उसे 'कैप्टन' कहते थे क्योंकि:
1. उसके मन में देशभक्ति और नेताजी के प्रति गहरा सम्मान था।
2. वह नेताजी की मूर्ति को बिना चश्मे के देखकर दुखी होता था और अपनी ओर से चश्मा लगाता था।
3. उसकी इस 'फौजी जैसी निष्ठा' और देशप्रेम को देखकर लोग उसे व्यंग्य या सम्मान से 'कैप्टन' कहते थे।
Q2. कैप्टन बार-बार मूर्ति पर चश्मा क्यों बदल देता था? Imp.
उत्तर: कैप्टन गरीब था, उसके पास सीमित चश्मे थे। जब कोई ग्राहक आता और उसे वैसा ही फ्रेम मांगता जैसा नेताजी की मूर्ति पर लगा है, तो कैप्टन मूर्ति से वह फ्रेम उतारकर ग्राहक को दे देता था और मूर्ति पर दूसरा नया फ्रेम लगा देता था। वह नेताजी को बिना चश्मे के नहीं रहने देता था।
Q3. हालदार साहब पहले कैप्टन के बारे में क्या सोचते थे और उन्हें बाद में क्या पता चला?
उत्तर: 'कैप्टन' नाम सुनकर हालदार साहब को लगा कि वह नेताजी की आजाद हिंद फौज का कोई सिपाही या हट्टा-कट्टा फौजी होगा।
लेकिन जब उन्होंने उसे देखा, तो वे हैरान रह गए क्योंकि वह एक बेहद बूढ़ा, कमजोर और लँगड़ा आदमी था। यह देखकर उन्हें देशभक्तों की दुर्दशा पर दया आई।
Q4. पानवाले का एक रेखाचित्र (Sketch) प्रस्तुत कीजिए। Imp.
उत्तर: पानवाला एक मोटा और काला आदमी था।
• उसकी तोंद निकली हुई थी।
• वह हर वक्त पान खाता रहता था, जिससे उसके दाँत लाल-काले हो गए थे।
• वह स्वभाव से खुशमिजाज और बातूनी था, लेकिन देशभक्तों के प्रति उसमें संवेदनशीलता की कमी थी (उसने कैप्टन को पागल कहा)।
Q5. कैप्टन के मरने पर हालदार साहब और पानवाले की प्रतिक्रिया में क्या अंतर था?
उत्तर:
हालदार साहब: वे बहुत दुखी हुए और उन्होंने फैसला किया कि वे अब मूर्ति की तरफ देखेंगे भी नहीं।
पानवाला: वैसे तो वह मजाक उड़ाता था, लेकिन कैप्टन के मरने पर वह भी उदास हो गया। उसने अपनी धोती से आँसू पोंछे और कहा- "साहब! कैप्टन मर गया।" उसके अंदर भी मानवीय संवेदना जागी।
🔥 5 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 100-120 Words)
Q1. "वो लँगड़ा क्या जायेगा फौज में, पागल है, पागल।" – पानवाले की इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें। Value Based
उत्तर: पानवाले की यह टिप्पणी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, शर्मनाक और असंवेदनशील है।

प्रतिक्रिया:
  • यह टिप्पणी दर्शाती है कि समाज में कुछ लोग शारीरिक अक्षमता (विकलांगता) का मजाक उड़ाते हैं।
  • कैप्टन का शरीर लँगड़ा था, लेकिन उसकी 'आत्मा' किसी भी फौजी से कम नहीं थी। देशभक्ति शरीर से नहीं, मन से होती है।
  • पानवाला खुद घर बैठकर पान बेच रहा है, जबकि वह बूढ़ा व्यक्ति देश के नेता का सम्मान बचा रहा है।
  • किसी के सच्चे देशप्रेम को 'पागलपन' कहना ओछी मानसिकता की निशानी है। हमें कैप्टन जैसे जज्बे का सम्मान करना चाहिए, न कि उपहास।
Q2. 'नेताजी का चश्मा' कहानी का उद्देश्य (Message) क्या है? स्पष्ट करें। Imp.
उत्तर: स्वयं प्रकाश जी की यह कहानी हमें सच्ची देशभक्ति का अर्थ समझाती है।

कहानी का संदेश:
  1. देशभक्ति सबका अधिकार है: देशप्रेम केवल फौजियों या बॉर्डर पर लड़ने वालों तक सीमित नहीं है। एक साधारण फेरीवाला, एक बच्चा या एक आम नागरिक भी अपने छोटे-छोटे कार्यों से देशभक्ति दिखा सकता है।
  2. संसाधन नहीं, भावना जरुरी: कैप्टन के पास पैसे नहीं थे, फिर भी उसने नेताजी का सम्मान किया।
  3. भावी पीढ़ी पर भरोसा: अंत में बच्चों द्वारा सरकंडे का चश्मा लगाना यह बताता है कि देश का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। देशभक्ति का जज्बा कभी मरता नहीं है।
Q3. "बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर... होम कर देने वालों पर हँसती है।" - इस कथन का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर: यह विचार हालदार साहब के मन में तब आया जब पानवाले ने कैप्टन का मजाक उड़ाया।

भावार्थ:
  • लेखक उस समाज (कौम) के भविष्य को लेकर चिंतित हैं जो देशभक्तों का सम्मान करने के बजाय उन पर हँसता है।
  • स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना सब कुछ (घर, परिवार, जवानी) देश के लिए त्याग (होम) कर दिया। आज की पीढी उनका मजाक उड़ाती है।
  • यह स्वार्थपरता और नैतिक पतन का संकेत है। जिस देश के लोग 'बिकने के लिए मौके ढूँढते हैं' (स्वार्थी हैं), उस देश का भविष्य अंधकारमय है। यह पंक्ति समाज की संवेदनहीनता पर करारा व्यंग्य है।