कक्षा 9 : गणित
अध्याय - यूक्लिड की ज्यामिति का परिचय (Introduction to Euclid's Geometry)
यूक्लिड की परिभाषाएँ (Euclid's Definitions)
यूक्लिड ने ज्यामिति के मूल पदों को इस प्रकार परिभाषित किया है[cite: 3]:
- बिंदु (Point): बिंदु वह है जिसका कोई भाग (हिस्सा) नहीं होता[cite: 3]।
- रेखा (Line): एक रेखा चौड़ाई-रहित लंबाई होती है[cite: 3]।
- रेखा के सिरे: एक रेखा के सिरे (ends) बिंदु होते हैं[cite: 3]।
- सीधी रेखा (Straight line): एक सीधी रेखा वह रेखा है जो स्वयं पर स्थित बिंदुओं के साथ सपाट रूप से स्थित होती है[cite: 3]।
- पृष्ठ (Surface): पृष्ठ वह है जिसकी केवल लंबाई और चौड़ाई होती है[cite: 3]।
- पृष्ठ के किनारे: किसी पृष्ठ के किनारे रेखाएँ होती हैं[cite: 3]।
- समतल पृष्ठ (Plane surface): एक समतल पृष्ठ वह पृष्ठ है जो स्वयं पर सीधी रेखाओं के साथ सपाट रूप से स्थित होता है[cite: 3]।
अभिगृहीत और अभिधारणाएँ (Axioms and Postulates)
यूक्लिड ने कुछ ऐसे गुणों की कल्पना की, जिन्हें सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं थी[cite: 3]। ये मान्यताएं वास्तव में स्पष्ट सार्वभौमिक सत्य (universal truths) हैं[cite: 3]। उन्होंने इन्हें दो प्रकारों में विभाजित किया:
- अभिधारणाएँ (Postulates): यूक्लिड ने 'अभिधारणा' शब्द का प्रयोग उन मान्यताओं के लिए किया जो विशेष रूप से ज्यामिति से संबंधित थीं[cite: 3]।
- सामान्य धारणाएँ या अभिगृहीत (Axioms): दूसरी ओर, ये वे मान्यताएं थीं जिनका प्रयोग पूरी गणित में होता है और ये विशेष रूप से केवल ज्यामिति से जुड़ी नहीं हैं[cite: 3]।
यूक्लिड के अभिगृहीत (Euclid's Axioms)
- वे वस्तुएँ जो एक ही वस्तु के बराबर हों, एक-दूसरे के बराबर होती हैं[cite: 3]। (जैसे: यदि A=B और C=B है, तो A=C होगा)[cite: 3]।
- यदि बराबरों को बराबरों में जोड़ा जाए, तो पूर्ण (योगफल) भी बराबर होते हैं[cite: 3]।
- यदि बराबरों को बराबरों में से घटाया जाए, तो शेषफल भी बराबर होते हैं[cite: 3]।
- वे वस्तुएँ जो परस्पर संपाती हों (एक-दूसरे के ऊपर पूरी तरह फिट बैठें), एक-दूसरे के बराबर होती हैं[cite: 3]।
- पूर्ण (पूरा हिस्सा) अपने भाग (टुकड़े) से बड़ा होता है[cite: 3]।
- एक ही वस्तु के दोगुने परस्पर बराबर होते हैं[cite: 3]।
- एक ही वस्तु के आधे परस्पर बराबर होते हैं[cite: 3]।
यूक्लिड की अभिधारणाएँ (Euclid's Postulates)
- अभिधारणा 1: एक बिंदु से किसी अन्य बिंदु तक एक सीधी रेखा खींची जा सकती है[cite: 3]। (अभिगृहीत 5.1: दिए गए दो भिन्न बिंदुओं से होकर एक अद्वितीय (unique) रेखा खींची जा सकती है)[cite: 3]।
- अभिधारणा 2: एक सांत रेखा (Terminated line) को अनिश्चित रूप से बढ़ाया जा सकता है[cite: 3]।
- अभिधारणा 3: किसी भी केंद्र और किसी भी त्रिज्या से एक वृत्त खींचा जा सकता है[cite: 3]।
- अभिधारणा 4: सभी समकोण (Right angles) एक-दूसरे के बराबर होते हैं[cite: 3]।
- अभिधारणा 5: यदि एक सीधी रेखा दो सीधी रेखाओं पर गिरकर अपने एक ही ओर दो अंतःकोण इस प्रकार बनाए कि इन दोनों कोणों का योग मिलकर दो समकोणों (180°) से कम हो, तो वे दोनों सीधी रेखाएँ अनिश्चित रूप से बढ़ाए जाने पर उसी ओर मिलती हैं जिस ओर यह योग दो समकोणों से कम होता है[cite: 3]।
प्रमेय (Theorems) और उनके प्रमाण
वह कथन जिसे प्रमाण (proof) की आवश्यकता होती है, प्रमेय कहलाता है[cite: 3]।
उदाहरण: (i) एक बिंदु के चारों ओर के सभी कोणों का योग 360° होता है[cite: 3]। (ii) एक त्रिभुज के कोणों का योग 180° होता है[cite: 3]。
प्रमेय: सिद्ध कीजिए कि दो भिन्न रेखाओं में एक से अधिक बिंदु उभयनिष्ठ (common) नहीं हो सकते[cite: 3]。
- दिया गया है: दो भिन्न रेखाएं l और m[cite: 3]।
- सिद्ध करना है: रेखा l और m में एक से अधिक बिंदु उभयनिष्ठ नहीं हो सकते[cite: 3]।
- प्रमाण: यदि l और m समांतर हैं (l // m), तो स्पष्ट रूप से उनमें कोई भी बिंदु उभयनिष्ठ नहीं होगा[cite: 3]। तो मान लेते हैं कि l, m के समांतर नहीं है[cite: 3]। मान लीजिए P और Q दो ऐसे बिंदु हैं जो दोनों रेखाओं l और m में उभयनिष्ठ हैं[cite: 3]। अब हम देखते हैं कि रेखा l में P और Q दोनों बिंदु हैं, और रेखा m में भी P और Q दोनों बिंदु हैं[cite: 3]। लेकिन, अभिधारणा 1 के अनुसार, हम जानते हैं कि दो भिन्न बिंदुओं से केवल एक ही रेखा गुजर सकती है[cite: 3]। यह हमारी इस मान्यता का खंडन करता है कि l और m समांतर नहीं हैं[cite: 3]। अतः हमारी मान्यता गलत है[cite: 3]। इसलिए, दो भिन्न रेखाओं में एक से अधिक बिंदु उभयनिष्ठ नहीं हो सकते[cite: 3]।
महत्वपूर्ण उदाहरण (Examples)
उदाहरण 1: यदि A, B और C एक रेखा पर स्थित तीन बिंदु हैं, और B, A और C के बीच स्थित है, तो सिद्ध करें कि AB + BC = AC[cite: 3]。
हल: हम देख सकते हैं कि युग्म (AB + BC), AC के संपाती (coincides) है[cite: 3]। और हम जानते हैं कि यूक्लिड के अभिगृहीत (4) के अनुसार, जो वस्तुएं एक-दूसरे के संपाती होती हैं, वे एक-दूसरे के बराबर होती हैं[cite: 3]। अतः, AB + BC = AC[cite: 3]。
उदाहरण 2: सिद्ध करें कि किसी दिए गए रेखाखंड पर एक समबाहु त्रिभुज (equilateral triangle) बनाया जा सकता है[cite: 3]。
दिया गया है: एक रेखाखंड AB[cite: 3]।
रचना: 1. केंद्र A और त्रिज्या AB वाला एक वृत्त खींचें[cite: 3]। 2. केंद्र B और त्रिज्या AB वाला दूसरा वृत्त खींचें[cite: 3]। 3. दोनों वृत्तों के प्रतिच्छेदन बिंदु को C नाम दें[cite: 3]। 4. रेखाखंड AC और BC खींचें[cite: 3]。
प्रमाण: 1. केंद्र A वाले वृत्त में, AC एक त्रिज्या है, इसलिए AC = AB[cite: 3]। 2. केंद्र B वाले वृत्त में, BC एक त्रिज्या है, इसलिए BC = AB[cite: 3]। 3. उपरोक्त दो बिंदुओं से, AC = AB और BC = AB[cite: 3]। अतः तीनों भुजाएं AC, BC और AB बराबर हैं[cite: 3]। चूंकि त्रिभुज की तीनों भुजाएं बराबर हैं, इसलिए यह एक समबाहु त्रिभुज है[cite: 3]。
विभिन्न पदों की परिभाषाएँ (LP 2)
प्रत्येक पद को परिभाषित करने से पहले कुछ अन्य पदों को परिभाषित करने की आवश्यकता होती है[cite: 3]:
- (i) समांतर रेखाएँ: वे रेखाएँ जो किसी भी बिंदु पर प्रतिच्छेद नहीं करती हैं[cite: 3]। इसे परिभाषित करने से पहले रेखा, बिंदु और प्रतिच्छेद (intersect) को परिभाषित करना आवश्यक है[cite: 3]।
- (ii) लंबवत रेखाएँ: वे रेखाएँ जो 90 डिग्री पर प्रतिच्छेद करती हैं[cite: 3]। इसके लिए रेखा, प्रतिच्छेद और 90 डिग्री (समकोण) को परिभाषित करना जरूरी है[cite: 3]।
- (iii) रेखाखंड: रेखा का वह भाग जिसका एक प्रारंभिक और एक अंतिम बिंदु होता है[cite: 3]। इसके लिए रेखा और बिंदु की परिभाषा आवश्यक है[cite: 3]।
- (iv) वृत्त की त्रिज्या: वृत्त के केंद्र से वृत्त पर स्थित किसी बिंदु तक का रेखाखंड[cite: 3]। इसके लिए वृत्त, वृत्त के केंद्र और बिंदु को परिभाषित करना होगा[cite: 3]।
- (v) वर्ग: एक चतुर्भुज जिसकी चारों भुजाएं बराबर होती हैं और चारों कोण 90 डिग्री के होते हैं[cite: 3]। इसके लिए चतुर्भुज (चार भुजाओं वाली बंद आकृति) और 90 डिग्री को परिभाषित करना आवश्यक है[cite: 3]।
अभिधारणाओं की संगति (LP 3)
दो अभिधारणाएँ दी गई हैं: (1) किन्हीं दो भिन्न बिंदुओं A और B के लिए, उनके बीच एक तीसरा बिंदु C मौजूद होता है[cite: 3]। (2) कम से कम तीन ऐसे बिंदु मौजूद होते हैं जो एक ही रेखा पर नहीं होते[cite: 3]。
हल: इनमें अपरिभाषित पद रेखा, बिंदु और समतल हैं[cite: 3]। ये दोनों अभिधारणाएँ सुसंगत (consistent) हैं क्योंकि ये एक-दूसरे का खंडन नहीं करती हैं[cite: 3]। पहली अभिधारणा यह बताती है कि बिंदुओं को क्रमबद्ध किया जा सकता है और वे एक रेखाखंड बना सकते हैं, जबकि दूसरी अभिधारणा यह सुनिश्चित करती है कि एक समतल (plane) का अस्तित्व है[cite: 3]। ये यूक्लिड की अवधारणाओं का पालन करती हैं[cite: 3]。
रेखाखंड का मध्य-बिंदु (LP 5)
सिद्ध कीजिए कि प्रत्येक रेखाखंड का केवल एक ही मध्य-बिंदु होता है[cite: 3]।
हल: इसे विरोधाभास (contradiction) द्वारा सिद्ध करेंगे[cite: 3]। मान लीजिए एक रेखाखंड AB है और C इसका मध्य-बिंदु है, जिसका अर्थ है AC = 1/2(AB)[cite: 3]। अब मान लीजिए D भी इसका एक मध्य-बिंदु है, जिसका अर्थ है AD = 1/2(AB)[cite: 3]。
अतः, AD = AC (क्योंकि जो चीजें समान चीज के बराबर होती हैं, वे आपस में भी बराबर होती हैं)[cite: 3]。
चूंकि AC = AD है, इसका तात्पर्य है कि C और D एक ही बिंदु हैं (संपाती हैं)[cite: 3]। यह हमारी मान्यता का खंडन करता है, अतः प्रत्येक रेखाखंड का केवल एक और अद्वितीय मध्य-बिंदु होता है[cite: 3]。
सार्वभौमिक सत्य (LP 7)
यूक्लिड के अभिगृहीतों में अभिगृहीत 5 को 'सार्वभौमिक सत्य' क्यों माना जाता है?
हल: यह अभिगृहीत (पूर्ण अपने भाग से बड़ा होता है) इसलिए सार्वभौमिक सत्य के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह केवल गणित के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि किसी भी क्षेत्र में सत्य साबित होता है[cite: 3]。