अति लघुत्तरिय प्रश्न
उत्तर : मार्टिन लूथर जर्मनी का एक महान समाज सुधारक था | उसने रोमन कैथोलिक धर्म का विरोध किया तथा रिफॉर्मेशन आंदोलन की शुरुआत की ।
उत्तर : कैथोलिक धर्म में सुधार के लिए चलाए गए आंदोलन को रिफॉर्मेशन कहा जाता है |
उत्तर : चर्म पत्र या जानवरों के चमड़े से बनी लेखन की सतह ।
उत्तर : सोलहवीं सदी, यूरोप में रोमन कैथोलिक चर्च में सुधार का आंदोलन | इसके प्रमुख धर्म सुधारक मार्टिन लूथर थे ।
उत्तर : चैपबुक यूरोप में 16वीं सदी में छोटे आकार का किताब होता था जिसे सामान्यतः वहां फेरीवाले बेचते थे ।
लघु उत्तरीय प्रश्न
उत्तर : वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट 1878 ईसवी में अंग्रेजों द्वारा भारत में बनाई गई थी इस एक्ट के तहत भारत के किसी भी समाचार पत्र या खबर को प्रतिबंधित किया जा सकता था यह एक्ट अंग्रेजों द्वारा भारतीय प्रेस पर लगाए गए नियंत्रणों में सर्वाधिक प्रमुख तथा महत्वपूर्ण था।
उत्तर : वुडब्लॉक प्रिंटिंग या तख्ती की छपाई सबसे पहले चीन में प्रारंभ हुई | 1295 ईस्वी में जब महान खोजी यात्री मार्कोपोलो चीन से वापस इटली लौटा तो वुडब्लॉक प्रिंट का ज्ञान अपने साथ लाया | जल्दी ही यह तकलीफ पूरे यूरोप में फैल गया ।
उत्तर : यूरोप में मुद्रण तकनीक के विकास से धर्म की नई नई व्याख्यनो का प्रचार प्रसार शुरू हुआ | रोमन कैथोलिक में व्याप्त बुराइयां और अंधविश्वास लोगों के सामने स्पष्ट होने लगे | परिणाम स्वरूप रोमन चर्च ने प्रकाशको और पुस्तक विक्रेताओं पर प्रतिबंध लगा दी तथा 1858 से प्रतिबंधित किताबों की सूची रखनी शुरू कर दी।
उत्तर : 19वीं सदी में महिलाओं पर मुद्रण संस्कृति के प्रसार के निम्नलिखित प्रभाव हुए -
- a) मध्यवर्गीय घरो की महिलाओं में पठन - पाठन के तरफ झुकाव बढी।
- b) उदार पिता एवं पतियों द्वारा महिलाओं के लिए शिक्षा की व्यवस्था की जाने लगी।
- c) पत्र-पत्रिकाओं द्वारा महिला शिक्षा को प्रोत्साहित किया गया ।
- d) महिलाओं की सामाजिक तथा राष्ट्रीय भागीदारी में वृद्धि हुई।
उत्तर : आधुनिक प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार योहान गुटेनबर्ग ने 1448 ईस्वी में किया । इसे गुटेनबर्ग प्रेस के नाम से जाना जाता था । यही तकनीक अगले 300 वर्षों तक छपाई की बुनियादी तकनीक रही। इस मशीन से कम समय में अधिक किताबें छापना संभव हुआ | गुटेनबर्ग प्रेस 1 घंटे में 250 पन्ने छाप सकता था। इस प्रेस में छपने वाली पहली पुस्तक बाइबिल थी ।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
उत्तर : मुद्रण संस्कृति निम्नलिखित प्रकार से फ्रांस की क्रांति में सहायक सिद्ध हुई ।
- a) छापेखाने के विकास से फ्रांस के महान दार्शनीको जैसे - रूसो, वाल्तेयर, मंतेस्स्क्यू अदि ने चर्च अंधविश्वास तथा सम्राट के विरुद्ध अपनी भावनाएं लोगों तक पहुंचाया । इससे चर्च और निरंकुस सासको के प्रति लोगो में विद्रोह की भावना बढ़ गई |
- b) लोगों में ज्ञानोदय से कोई भी रीति-रिवाजों के बारे में तार्किक विचार उत्पन्न होने लगे इससे समाज में पुराने तथा अंधविश्वास वाले रिवाजों के विरोध में जन आक्रोश बढ़ने लगा ।
- c) छापेखाने में छपी किताबों के द्वारा राजशाही तथा चर्चों का मजाक उड़ाया जाने लगा किताबो तथा पत्र-पत्रिकाओं में यह दिखाया जाता था कि जनता कष्ट में है जबकि राजशाही भोग विलास में डूबी हुई है | इससे लोगों में राजशाही के विरोध में विद्रोही भावनाएं बढ़ीं ।
उत्तर : मुद्रण संस्कृति ने निम्नलिखित प्रकार से भारत में धार्मिक सामाजिक सुधार का मार्ग प्रशस्त किया -
- a) पत्र-पत्रिकाओं द्वारा समाज में फैली बुराइयों को लोगों तक पहुंचाया गया जिससे समाज में इनका विरोध शुरू हो गया ।
- b) धर्म ग्रंथों के प्रकाशित होने से लोगों को उन्हें बढ़ने, समझने और अपने ढंग से व्याख्या करने का अवसर मिला।
- c) मुद्रण संस्कृति ने व्यक्तिगत उदारवादी विचारों के प्रसार में सहायता की । इससे लोगों में नए विचारों से अवगत होने का अवसर प्राप्त हुआ ।
उत्तर : गरीब जनता पर मुद्रण संस्कृति के निम्नलिखित प्रभाव हुए -
- a) मुद्रण संस्कृति से कम लागत पर अधिक पुस्तकों का प्रकाशन हुआ जिसके कारण गरीब जनता को भी किताब खरीदने का अवसर प्राप्त हुआ ।
- b) किताबों में प्राचीन धर्म ग्रंथों की आलोचना करते हुए नए और न्याय पूर्ण समाज की स्थापना पर बल दिया गया है इससे समाज में जाति आधारित भेदभाव को समाप्त करने का वातावरण बना ।
- c) किताबों के माध्यम से मजदूर वर्ग में नशाखोरी, साक्षरता, राष्ट्रवाद के संदेश को प्रसारित किया गया | किताबों के द्वारा मजदूरों की दयनीय परिस्थिति का मुख्य कारण उनका असंगठित होना बताया गया।