औद्योगिकरण का युग

सम्पूर्ण अध्याय के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर | Merit Yard Special

उत्तर : औद्योगिकरण से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए वस्तुएं बनाई जाती थी, उसी समय को अदि औद्योगिकरण का युग कहा जाता है।
उत्तर : आदि औद्योगीकरण के युग में शहर में उत्पादकों के संगठन को गिल्ड्स कहा जाता था।
उत्तर : इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति 1730 के दशक में शुरू हुई थी लेकिन 18 वीं सदी के अंत में तेजी से विकास हुआ।
उत्तर : जेम्स वॉट एक वैज्ञानिक था जो न्यू कमेंट द्वारा बनाए गए भाप के इंजन में सुधार किया था।
उत्तर : स्पिनिग जेनी सूत कताई की एक मशीन थी जिसका आविष्कार जेम्स हरग्रीव्स द्वारा 1764 ईस्वी में की गई थी।
उत्तर : उद्योगपतियों का पुराना और विश्वस्त कर्मचारी जिसे उद्योगपति ने मजदूरों के भर्ती करने के लिए रखते थे।
उत्तर : 1911 के लगभग में मुंबई के सूती कपड़ा उद्योग में काम करने वाले अधिकांश मजदूर महाराष्ट्र के रत्ना गिरी जिले के थे।
उत्तर : इंग्लैंड यूरोप का प्रथम औद्योगिक देश निम्नलिखित कारणों से बना-
  • (i) मशीनों एवं तकनीकों का आविष्कार
  • (ii) कच्चे माल की प्रचुरता
  • (iii) सूती वस्त्र उद्योग के लिए अनुकूल मौगोलिक पर्यावरण
  • (iv) उपनिवेशों में सस्ते श्रम की उपलब्धता
  • (v) उपनिवेशों से पूंजी की प्राप्ति
उत्तर :
  • (i) फ्लाई शटल बुनाई के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक यात्रिक औजार था ।
  • (ii) इसे रशियों तथा पोलियो के सहारे चलाया जाता था ।
  • (iii) फ्लाई शटल के प्रयोग से बड़े करधे चलाने तथा चौड़े अरज का कपड़ा बनाने में काफी मदद मिली ।
उत्तर : 18 वीं सदी में उत्पादन के तकनीक का बड़े पैमाने पर हुए अविष्कार को औद्योगिक क्रांति नाम दिया गया | इसके परिणाम स्वरूप बड़े कारखाने की स्थापना हुई तथा इससे भारी मात्रा में उत्पादन शुरू हुआ | धीरे-धीरे हस्तशिल्प उद्योगों का स्थान मशीनों में ले लिया तथा हस्तशिल्प उद्योग पृष्ठभूमि में चल गए ।
उत्तर :
  • (a) दुनिया के विभिन्न भागों में उपनिवेशों स्थापना से वस्तुओं की मांग बढ़ने लगी थी | इन वस्तुओं की पूर्ति शहरों में उत्पादित वस्तुओं से पूरा नहीं हो सकती थी अतः व्यापारी गांव की ओर मुड़े ।
  • (b) शहरो में उत्कापादन का कार्य गिल्ड्स करवाते थे | उन्हें सरकार के द्वारा किसी खास वस्तुओं के उत्पादन और व्यापार पर एकाधिकार दिया था | गिल्ड्स अपने कारीगरों को प्रशिक्षण देते थे, उत्पादन पर नियंत्रण रखते थे, मूल्य तय करते थे तथा नए लोगों को आने से रोकते थे ।
  • (c) चूकी ऐसी परिस्थिति में नये व्यापारी शहरों में कारोबार नहीं कर सकते थे इसलिए वे गांवो की ओर बढ़े | इस प्रकार गांव के किसानों और कारीगरों को पैसा और प्रशिक्षण देकर बड़े पैमाने पर उत्पादन कराया जाता था।
उत्तर :
  • (a) क्योंकि मशीनों को खरीदने में ज्यादा खर्च होता था इसलिए उद्योगपतियों को इसमें अधिक दिलचस्पी नहीं थी।
  • (b) चुकी उद्योगों में मौसम के साथ उत्पादन घटता बढ़ता रहता था वहां उद्योगपति मशीनों के बजाय मजदूरों को काम पर रखना पसंद करते थे ।
  • (c) बाजार में अक्सर बारीक डिजाइन और खास अकारो वाली चीजों की काफी मांग रहती थी, जहां मसीनो की नहीं बल्की इंसानी निपुणता की जरूरत थी ।
  • (d) कुलीन और पूंजीपति वर्ग के लोग हाथ से बनी चोजो को ज्यादा बसंद करते थे ।
उत्तर :
  • (a) स्पिनिंग जेनी मशीन ऊन कताई की मशीन थी । इसकी द्वारा कताई का काम तेजी से होता था। जिससे इस उद्योग में मजदूरों की मांग घटने लगे ।
  • (b) कपड़े का काम अधिकतर महिलाएं करती थी अब इस नयी प्रौद्योगिकी से उन्हें बेरोजगारी की आशंका बढ़ गई ।
  • (c) स्पिनिंग जेनी मशीन के इस्तेमाल से बड़ी संख्या में महिला श्रमिक बेरोजगार होने लगी, इसी कारण महिला श्रमिकों ने इस मशीनो पर हमले किए | महिलाओं द्वारा यह विरोध बहुत समय तक होता रहा ।
उत्तर : सूरत पूर्व औपनिवेशिक काल का एक महत्वपूर्ण बंदरगाह था जहां से पश्चिमी देशों के साथ व्यापार होता था लेकिन धीरे-धीरे परिस्थिति बदलने लगे । कलकता और बम्बई नए व्यापारिक केंद्र के रूप में उभरे जबकि सूरत बंदरगाह हाशिये पर पहुंच गया।
  • (a) 18 वीं सदी से यूरोपीय कंपनियों की ताकत बढ़ती जा रही थी | वे स्थानीय दरबारों से कई तरह की रियायतें हासिल की | बाद में उन्होंने बाजार पर एकाधिकार कर लिया ।
  • (b) पुरानी बंदरगाहों की जगह नये बंदरगाहो ( मुंबई और कलकता ) का महत्व उपनिवेशिक की बढ़ती ताकत का संकेत था ।
  • (c) इससे सूरत और हुगली दोनों पुराने बंदरगाह कमजोर पड़ गए | यहां से होने वाला निर्यात धीरे-धीरे कम होता चला गया। इस प्रकार सूरत और हुगली दोनों बंदरगाह हाशिए पर चले गए ।
उत्तर : ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारतीय बुनकरों पर निगरानी रखने के लिए निम्नांकित प्रयास किए -
  • (a) ईस्ट इंडिया कंपनी बुनकरों को कच्चा माल खरीदने के लिए पेशगी के रूप में कर्जा देती थी | इस प्रकार कंपनी ने बुनकरों को स्थाई रूप से कर्ज के जाल में फंसा लिया।
  • (b) कंपनी बूनकरो पर निगरानी रखने के लिए वेतन भोगी कर्मचारी रखते थे, जिसे गुमास्ता कहा जाता था।
  • (c) गुमास्ता यह भी देखते थे कि बुनकर अन्य यूरोपीय कंपनि या भारतीय व्यापारी के लिए काम ना करें।
इस प्रकार ईस्ट इंडिया कंपनी को भारतीय बुनकरों से रेशम और कपड़े की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित रहती थी ।
उत्तर : प्रथम विश्वयुद्ध के समय ब्रिटेन के कारखाने युद्ध संबंधित उत्पादन के व्यस्त थे | अतः ब्रिटेन से भारत आने वाले सामान का आयत कम हो गया | इस प्रकार भारत के उत्पादकों को रातों-रात एक विशाल देसी बाजार मिल गया | परिस्थिति ऐसी हो गई कि ब्रिटेन के युद्ध सामग्री अब भारत के उत्पादक की बनाने लगे | जैसे जुट की बोरिया, सैनिकों की वर्दी, टेंट, चमड़े के जूते, घोड़े एवं खचड़ की जिन अदि | जरूरत को देखते हुए नए नए कारखाने स्थापित किए गए, पुराने कामों में भी काम के घंटे बढ़ा दिए गए तथा नये मजदूरों की भर्ती हुई | कुल मिलाकर यही हुआ की प्रथम विश्व युद्ध के समय भारत का औद्योगिक उत्पादन तेजी से बढ़ा