भारत में राष्ट्रवाद

संपूर्ण अध्याय के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर | Merit Yard Special

अति लघुत्तरिय प्रश्न
उत्तर : गांधी जी ने दांडी यात्रा 12 मार्च, 1930 ई. में अहमदाबाद के अपने साबरमती आश्रम से शुरु की |
उत्तर : असहयोग आन्दोलन महात्मा गांधी जी के द्वारा 1921 में शुरु किया गया तथा फरवरी 1922 तक चला |
उत्तर : दांडी यात्रा 1930 में महात्मा गांधी द्वारा शुरु किया गया तथा इसी के द्वारा सविनय आंदोलन प्रारंभ हुआ |
उत्तर : जालियांवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल 1919 ई. को अमृतसर (पंजाब) में हुआ था |
उत्तर : खिलाफत आंदोलन 1919 ई. में अली बंधुओं मोहम्मद अली और शौकत अली ने शुरू किया था |
उत्तर : चौरी-चौरा उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक स्थान है जहां फरवरी 1922 में सरकार के विरुद्ध एक सभा हो रही थी | छेड़खानी की कोई बात नहीं होते हुए भी अंग्रेजों की पुलिस ने लोगों पर गोलियां चला दी | गुस्से में भीड़ ने पुलिस थाने में आग लगा दी जिसमें 22 पुलिस कर्मी की मृत्यु हो गई गांधी जी ने इस घटना को देखते हुए असहयोग आंदोलन वापस ले लिया |
उत्तर : बहिष्कार का अर्थ आमतौर पर विरोध का एक रूप होता है जिसके द्वारा किसी के साथ संपर्क रखने, और जुड़ने से इनकार करना था गतिविधियों में हिस्सेदारी, चीजों की खरीद इस्तेमाल से इनकार करना शामिल है | इसका प्रयोग गांधी जी ने असहयोग आंदोलन में शुरू किया था |
उत्तर : पिकेटिंग प्रदर्शन या विरोध का एक ऐसा स्वरुप है जिसमें लोग किसी दुकान, फैक्ट्री या दफ्तर की भीतर जाने का रास्ता रोक लेते हैं ।
लघुत्तरिय प्रश्न
उत्तर : भारत में असहयोग आंदोलन महात्मा गांधी के द्वारा जनवरी 1921 में प्रारंभ हुआ था | इस आंदोलन का प्रारंभ शहर के शिक्षित एवं मध्यम वर्ग के द्वारा हुआ था जहां इसका स्वरूप नियंत्रित एवं अहिंसक था | जैसे ही आंदोलन ग्रामीण परिवेश में फैला तो इसका स्वरूप अनियंत्रित एवं हिंसक हो गया | फरवरी 1922 में भीड़ ने चौरी चौरा थाना में आग लगा दी जिसमें 22 पुलिसकर्मी जलकर मर गए | आंदोलन को हिंसक बनते देख महात्मा गांधी ने इसे वापस ले लिया यानी असहयोग आंदोलन समाप्त हो गया |
उत्तर : रौलेट एक्ट कानून ब्रिटेन के इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल 1919 ईसवी में बनाया था | भारतीयों के विरोध के कारण निम्नलिखित थे:
  • इसका उद्देश्य भारत में ब्रिटिश सरकार के विरोध हो रहे राजनीतिक गतिविधियों को कुचलना था |
  • इस कानून के अनुसार राजनीतिक कैदियों को बिना कारण बताएं गिरफ्तार कर बिना मुकदमा चलाए 2 वर्ष तक जेल में बंद रखने का प्रावधान था |
  • भारत के स्वतंत्रता के इतिहास में यह एक काला कानून के नाम से जाना जाता है |
उत्तर : सत्याग्रह महात्मा गाँधी के दिमाग की उपज एक राजनीतिक विचार था जिसका प्रयोग उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ किया था |
  • अहिंसा सत्याग्रह का मूल सिद्धांत था | इसके द्वारा हिंसा का सहारा लिए बिना अन्याय की चेतना को जागृत करना था |
  • सत्याग्रह का वास्तविक अर्थ ही था कि सच्चे उद्देश्य की प्राप्ति के लिए अन्याय के खिलाफ किसी प्रकार के शारीरिक बल के प्रयोग की आवश्यकता नहीं है |
  • अहिंसा के बल पर अन्यायी को सत्य स्वीकार करने के लिए विवश करना ही सत्याग्रह है क्योंकि अंत में सत्य की ही विजय होती है।
उत्तर : महात्मा गांधी ने सत्याग्रह का प्रथम प्रयोग दक्षिण अफ्रीका में गौरे लोगों के द्वारा बनाए गए नस्ली कानून के खिलाफ किया | महात्मा गांधी ने 1916 में भारत के बिहार राज्य के चंपारण जिले में निलहे किसानों के लिए सत्याग्रह आंदोलन सबसे पहले शुरु किया | महात्मा गांधी के अनुसार अहिंसा सत्याग्रह का सबसे उपयुक्त हथियार था | महात्मा गांधी भारत में जो भी आंदोलन का नेतृत्व किया चाहे वह असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन या भारत छोड़ो आंदोलन हो सभी में उन्होंने अहिंसा एवं सत्याग्रह का सहारा लिया |
  • (i) भारत जाति, समुदाय, धर्म के मामले में विविधता वाला देश है | स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान समुदाय और धर्म के नाम पर भी नेतृत्व शुरु हुआ |
  • (ii) डॉक्टर भीमराव अंबेडकर दलित वर्गों का नेतृत्व कर रहे थे तो मोहम्मद अली जिन्ना मुस्लिम समुदाय का नेतृत्व कर रहे थे ।
  • (iii) ये नेतागण अलग निर्वाचन क्षेत्र तथा विशेष राजनीतिक अधिकार की मांग कर अपने समुदायों के जीवन स्तर ऊंचा उठाना चाहते थे ।
  • (iv) गांधीजी उनके विचारों से सहमत नहीं थे क्योंकि इस तरह की मांग पूरा करने से भारत की एकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता |
दीर्घ लघुत्तरिय प्रश्न
  • (i) ब्रिटिश सरकार युद्ध व्यय की क्षति पूर्ति के लिए यहां के लोगों पर अतिरिक्त कर लगाया जिससे उसे 1 अरब 20 करोड़ पाउंड प्राप्त हुआ | वस्तुओं की कीमत आसमान छूने लगी |
  • (ii) गांव से लोगों को जबरन ले जाकर सैनिकों के रुप में सेना में भर्ती किया गया |
  • (iii) देश के कई भागों में आकाल के कारण भुखमरी से कितनों की जान चली गई ।
  • (iv) देश में फ्लू और प्लेग जैसी बीमारी फैली जिससे असंख्य लोगों की मृत्यु हो गई ।
  • उपर्युक्त परिस्थितियों में ब्रिटिश सरकार द्वारा कोई प्रयास नहीं करने से लोग नाराज हो गए और आंदोलन के लिए विवश हो गए ।
असहयोग आंदोलन जनवरी 1921 में महात्मा गांधी के द्वारा शुरु किया गया था | शहरों में आंदोलन धीमा पड़ने के मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
  • (i) इस आंदोलन में विदेशी कपड़ों का बहिष्कार किया गया था | खादी के कपड़े अपेक्षाकृत महंगे थे जिसके कारण गरीब नहीं खरीद पाते थे |
  • (ii) ब्रिटिश संस्थानों के बहिष्कार से समस्या पैदा हुई क्योंकि वैकल्पिक संस्थानों की स्थापना की प्रक्रिया बहुत धीमी थी, जिससे शिक्षक और छात्र ब्रिटिश संस्थानों में लौटने लगे ।
  • (iii) वकीलों ने भी दोबारा सरकारी अदालतों में योगदान देना शुरु कर दिया क्योंकि दूसरी ऐसी अदालत नहीं थी जिसमें वकील काम कर सकें |
  • (i) अन्य उपनिवेशों की तरह भारत में भी आधुनिक राष्ट्रवाद के उदय की परिघटना उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन के साथ गहरे तौर पर जुड़ी हुई थी ।
  • (ii) उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन ने सभी जाति, वर्ग और समुदाय के लोगों को विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष के लिए एकजुट किया |
  • (iii) इसने स्थानीय लोगों में राष्ट्रवादी और उदारवादी विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक अच्छा मंच प्रदान किया |
  • (iv) इस प्रकार, उपनिवेश विरोधी आंदोलन राष्ट्रवाद के विकास के लिए प्रजनन भूमि बना |
सविनय अवज्ञा आंदोलन अप्रैल 1930 ई. में शुरू हुआ था। विभिन्न समूहों के लिए स्वराज के मायने अलग थे:
  • (i) अधिकांश व्यवसायी वर्ग के लिए स्वराज का अर्थ कारोबार पर औपनिवेशिक पाबंदियों का न होना था |
  • (ii) किसानों के लिए स्वराज का अर्थ भारी लगान के खिलाफ लड़ाई था |
  • (iii) महिलाओं के लिए स्वराज का अर्थ समाज में बराबरी और उच्च स्तरीय जीवन की प्राप्ति था |
  • (iv) गरीब किसानों के लिए स्वराज का अर्थ किराया मुक्ति और बेगार से आजादी था |
लहौर कांग्रेस अधिवेशन दिसंबर 1929 ई. में पंडित जवाहरलाल नेहरु की अध्यक्षता में हुआ था | इसके महत्व निम्नलिखित थे:
  • (i) इससे स्पष्ट हो गया कि प्रजातंत्र और समाजवाद में आस्था वाले प्रभावशाली नए नेता अब कांग्रेस में आ चुके थे |
  • (ii) इस अधिवेशन में कांग्रेस ने 'पूर्ण स्वराज' की मांग का प्रस्ताव पास किया |
  • (iii) महात्मा गांधी के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया|
  • (iv) हर साल 26 जनवरी को संपूर्ण भारत में स्वतंत्रता दिवस के रुप में मनाने का निर्णय लिया गया, जिसे 1930 में प्रथम बार मनाया गया |