नौबतखाने में इबादत

Class 10 Hindi | Important Question Bank
📚 गद्यांश आधारित प्रश्न (Extract Based Questions)
"काशी संस्कृति की पाठशाला है... यहाँ बिस्मिल्ला खाँ हैं, यहाँ बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई है... काशी में संगीत का आयोजन एक प्राचीन और अद्भुत परंपरा है।"
(क) काशी को 'संस्कृति की पाठशाला' क्यों कहा गया है? Imp.
उत्तर: क्योंकि काशी (बनारस) में भारत की धर्म, कला, संगीत और साहित्य की महान परंपराएँ जीवित हैं। यहाँ अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों का अनोखा संगम है।
(ख) काशी की प्राचीन परंपरा क्या है?
उत्तर: काशी में 'संगीत का आयोजन' होना एक प्राचीन परंपरा है। यहाँ हनुमान जयंती या बुढ़वा मंगल जैसे अवसरों पर शास्त्रीय संगीत के बड़े कार्यक्रम होते हैं।
"वे नमाज के बाद सिजदे में गिड़गिड़ाते हैं—'मेरे मालिक एक सुर बख्श दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।'"
(क) बिस्मिल्ला खाँ नमाज के बाद क्या माँगते थे? Imp.
उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ नमाज के बाद अल्लाह से धन-दौलत नहीं, बल्कि 'सच्चा सुर' माँगते थे।
(ख) 'सच्चे मोती की तरह आँसू' से क्या आशय है?
उत्तर: इसका आशय है कि उनका सुर इतना प्रभावशाली (तासीर वाला) हो कि उसे सुनकर सुनने वालों की आँखों से खुद-ब-खुद भक्ति और प्रेम के आँसू निकल आएँ।
🎯 1 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 15-20 Words)
Q1. बिस्मिल्ला खाँ का असली (बचपन का) नाम क्या था? 2025
उत्तर: अमीरुद्दीन (Amiruddin)।
Q2. शहनाई किस प्रकार का वाद्य यंत्र है? Imp.
उत्तर: शहनाई एक 'सुषिर वाद्य' है (जिसे फूँक कर बजाया जाता है)।
Q3. बिस्मिल्ला खाँ को कौन-सा सर्वोच्च सम्मान मिला था?
उत्तर: भारत रत्न (Bharat Ratna)।
Q4. बिस्मिल्ला खाँ की पसंदीदा हेरोइन कौन थीं?
उत्तर: सुलोचना (Sulochana)।
Q5. 'नौबतखाना' किसे कहते हैं?
उत्तर: प्रवेश द्वार के ऊपर मंगलध्वनि बजाने का स्थान।
📝 2 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 30-40 Words)
Q1. मुहर्रम से बिस्मिल्ला खाँ का क्या जुड़ाव था? Imp.
उत्तर: मुहर्रम के शोक के दिनों में वे और उनका परिवार न तो शहनाई बजाते थे और न ही किसी संगीत कार्यक्रम में भाग लेते थे। 8वीं तारीख को वे खड़े होकर शोक धुन बजाते थे और उनकी आँखें भीग जाती थीं।
Q2. बिस्मिल्ला खाँ 'लुंगी' के बारे में शिष्या को क्या जवाब देते थे?
उत्तर: जब शिष्या ने उन्हें भारत रत्न मिलने के बाद फटी लुंगी न पहनने को कहा, तो उन्होंने हँसकर कहा- "धत पगली! भारत रत्न हमको शहनईया पे मिला है, लुंगिया पे नाहीं।" यह उनकी सादगी दिखाता है।
Q3. 'सुषिर-वाद्य' किसे कहते हैं? 2016
उत्तर: वे वाद्य यंत्र जिनमें नाड़ी (नरकट/रीड) होती है और जिन्हें फूँक मारकर बजाया जाता है, उन्हें सुषिर-वाद्य कहते हैं (जैसे- बाँसुरी, शहनाई)। शहनाई को 'सुषिर वाद्यों में शाह' (राजा) माना जाता है।
Q4. बिस्मिल्ला खाँ और काशी का रिश्ता कैसा था?
उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ के लिए काशी (बनारस) ही जन्नत थी। वे कहते थे कि "मरते दम तक न यह शहनाई छूटेगी और न ही काशी।" गंगा मैया और बाबा विश्वनाथ के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा थी।
✍️ 3 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 50-60 Words)
Q1. शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है? 2014, 2015, 2018
उत्तर: शहनाई की दुनिया में डुमराँव (बिहार) को दो मुख्य कारणों से याद किया जाता है:
1. नरकट घास: शहनाई बजाने के लिए जिस 'रीड' (Reed) का प्रयोग होता है, वह 'नरकट' नाम की घास से बनती है, जो केवल डुमराँव में सोन नदी के किनारे मिलती है।
2. जन्मस्थली: विश्व प्रसिद्ध शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का जन्म डुमराँव में ही हुआ था।
Q2. बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की 'मंगलध्वनि का नायक' क्यों कहा गया है? 2011, 2012, 2018
उत्तर: शहनाई का प्रयोग हमेशा शुभ कार्यों (जैसे शादी-विवाह) में होता है, इसलिए इसे 'मंगलध्वनि' कहते हैं।
बिस्मिल्ला खाँ ने इस साधारण लोक-वाद्य को अपनी 80 साल की साधना से शास्त्रीय संगीत के ऊँचे मंच पर पहुँचा दिया। इसलिए उन्हें शहनाई की मंगलध्वनि का 'नायक' (Hero) कहा जाता है।
Q3. 'नौबतखाने में इबादत' शीर्षक का अर्थ स्पष्ट कीजिए। Imp.
उत्तर:
नौबतखाना: प्रवेश द्वार के ऊपर का स्थान जहाँ बैठकर वाद्ययंत्र बजाए जाते हैं।
इबादत: पूजा या प्रार्थना।
बिस्मिल्ला खाँ रोज बालाजी मंदिर के नौबतखाने में बैठकर शहनाई बजाते थे। उनके लिए शहनाई बजाना सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि ईश्वर की 'इबादत' (पूजा) थी। इसलिए यह शीर्षक रखा गया है।
Q4. "फटा सुर न बख्शें, लुंगिया का क्या है, आज फटी है तो कल सिल जाएगी" - इस कथन का भाव क्या है?
उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ ईश्वर से प्रार्थना करते थे कि हे मालिक! मुझे चाहे फटे कपड़े (गरीबी) दे देना, लेकिन मेरा 'सुर' कभी फटा (बेसुरा) मत करना।
कपड़े तो फिर सिल सकते हैं, लेकिन अगर एक बार कलाकार का सुर फट गया (प्रतिष्ठा गिर गई), तो वह कभी नहीं जुड़ता। यह उनकी कला के प्रति समर्पण को दिखाता है।
🔥 5 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 100-120 Words)
Q1. बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताएँ आपको प्रभावित करती हैं? Imp.
उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ एक महान कलाकार होने के साथ-साथ एक नेक इंसान थे। उनकी निम्नलिखित विशेषताएँ प्रभावित करती हैं:

  1. सांप्रदायिक सद्भाव (Secularism): वे पक्के मुसलमान थे, पाँचों वक्त की नमाज पढ़ते थे। लेकिन वे रोज सुबह काशी विश्वनाथ और बालाजी मंदिर में शहनाई बजाते थे। उनके लिए संगीत का कोई धर्म नहीं था।
  2. सादगी: भारत रत्न मिलने के बाद भी उनमें घमंड नहीं था। वे घर में वही पुरानी फटी लुंगी पहनकर रहते थे।
  3. ईश्वर के प्रति समर्पण: वे अपनी कला को ही ईश्वर की इबादत मानते थे और हमेशा 'सच्चे सुर' की दुआ माँगते थे।
  4. मातृभूमि प्रेम: उन्हें अमेरिका जाने का ऑफर मिला, लेकिन उन्होंने मना कर दिया क्योंकि वहाँ "गंगा मैया" नहीं थीं।
Q2. बिस्मिल्ला खाँ का जीवन हमें 'गंगा-जमुनी तहजीब' (साझा संस्कृति) की क्या सीख देता है? Value Based
उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ का जीवन भारत की 'गंगा-जमुनी तहजीब' (Hindu-Muslim Unity) का जीता-जागता उदाहरण है।

  • वे एक मुसलमान होकर भी हिंदू मंदिरों (संकटमोचन, विश्वनाथ) में शहनाई बजाना अपना धर्म समझते थे।
  • वे कहते थे कि "संगीत का कोई मजहब नहीं होता, वह तो रूह की आवाज है।"
  • उनके लिए काशी का 'विश्वनाथ' और मुहर्रम का 'ताजिय' दोनों पवित्र थे।
उनका जीवन हमें सिखाता है कि धर्म अलग होने पर भी संस्कृति एक हो सकती है। इंसानियत और कला धर्म से ऊपर है। हमें भी धर्म के नाम पर लड़ने के बजाय मिलजुल कर रहना चाहिए।
Q3. काशी में हो रहे कौन-कौन से परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित (दुखी) करते थे? 2013
उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ को पुरानी काशी के बदलने का बहुत दुख था। उन्हें निम्नलिखित बदलाव खटकते थे:

  • पुरानी परंपराओं का खत्म होना: पहले जैसी मलाई-बर्फ और कुलसुम हलवाइन की कचौड़ी अब नहीं मिलती।
  • सम्मान में कमी: अब संगीत और साहित्य के प्रेमियों में वह आदर-सम्मान नहीं रहा जो पहले था।
  • सांप्रदायिक तनाव: पहले हिंदू-मुसलमान भाईचारे से रहते थे, लेकिन अब उनमें दूरियां आ गई हैं।
वे अक्सर इन बदलावों को देखकर कहते थे कि "अब वो काशी नहीं रही।"