माता का आँचल

Class 10 Hindi (Kritika) | Important Question Bank
📚 गद्यांश आधारित प्रश्न (Extract Based Questions)
"हम तो वैसे ही बराबर बाबूजी के गले लग गए। हम काँप रहे थे। बाबूजी उस पर दवा मलने लगे और हमें पुचकारने लगे... लेकिन हम माता की गोद से न उतरे।"
(क) बच्चे (भोलानाथ) के काँपने का क्या कारण था? Imp.
उत्तर: भोलानाथ अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था, तभी बिल में पानी डालने पर वहाँ से साँप निकल आया। सांप को देखकर वह बुरी तरह डर गया और काँपने लगा।
(ख) बाबूजी के पुचकारने पर भी बच्चा चुप क्यों नहीं हुआ?
उत्तर: बच्चा अत्यधिक भयभीत (डरा हुआ) था। ऐसे समय में उसे पिता के प्यार से ज्यादा माँ की गोद (आँचल) की सुरक्षा चाहिए थी, इसलिए वह पिता के पास नहीं गया।
"मर्दुए क्या जानें कि बच्चों को कैसे खिलाना चाहिए! और महतारी के हाथ से खाने पर बच्चों का पेट भी भरता है... यह कहकर वह थाली ले लेती थी।"
(क) यह कथन किसने, किससे कहा? Imp.
उत्तर: यह कथन मइयाँ (माता जी) ने बाबूजी (पिता जी) से कहा।
(ख) माँ को पिता के खिलाने के तरीके में क्या कमी लगती थी?
उत्तर: पिता जी छोटे-छोटे कौर (निवाले) खिलाते थे। माँ का मानना था कि छोटे कौर खाने से बच्चे को लगेगा कि उसने बहुत खा लिया, लेकिन उसका पेट नहीं भरेगा। वह कहती थी- "जब खाएगा बड़े-बड़े कौर, तब पाएगा दुनिया में ठौर।"
🎯 1 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 15-20 Words)
Q1. "जब खाएगा बड़े-बड़े कौर, तब पाएगा दुनिया में ठौर"- यह कथन किसका है? 2025
a) बाबूजी का
b) मइयाँ का
c) मित्र का
d) गुरुजी का

उत्तर: b) मइयाँ का
Q2. भोलानाथ और उसके साथियों द्वारा बिल में पानी डालने से क्या निकल आया? 2024
a) चूहा
b) बिच्छू
c) साँप
d) नेवला

उत्तर: c) साँप
Q3. भोलानाथ का वास्तविक नाम क्या था?
उत्तर: तारकेश्वर नाथ (Tarkeshwar Nath)।
Q4. पिता जी भोलानाथ के माथे पर किसका तिलक लगाते थे?
उत्तर: भभूत (राख) का तिलक।
Q5. भोलानाथ को 'भोलानाथ' नाम क्यों मिला?
उत्तर: माथे पर भभूत का 'त्रिपुंड' लगाने और लंबी-लंबी जटाएँ होने के कारण वे 'बम-भोला' जैसे लगते थे, इसलिए पिता जी उन्हें भोलानाथ कहते थे।
📝 2 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 30-40 Words)
Q1. बच्चा (भोलानाथ) अपनी माँ को देखते ही सिसकना क्यों शुरू कर देता था? Imp.
उत्तर: बच्चा वैसे तो खेल में मस्त हो जाता था, लेकिन जैसे ही उसे माँ दिखती, उसे अपनी सुरक्षा और ममता की याद आ जाती। माँ का लाड़ पाने के लिए वह जिद्द और सिसकियाँ भरने लगता था।
Q2. भोलानाथ और उसके साथी कौन-कौन से खेल खेलते थे?
उत्तर: वे अपने आसपास की चीजों से ही खेल बनाते थे:
• मिठाई की दुकान लगाना।
• घरौंदा बनाना।
• खेती करना।
• बारात निकालना और शादी-ब्याह का नाटक करना।
Q3. माँ ने भोलानाथ के घावों पर क्या लगाया?
उत्तर: जब भोलानाथ साँप से डरकर भागा और काँटो से छिल गया, तो माँ ने तुरंत हल्दी पीसकर उसके घावों पर लगाई। यह पुराने समय का घरेलू उपचार था।
Q4. पिता जी बच्चों के खेल में कैसे शामिल हो जाते थे? 2014
उत्तर: पिता जी बहुत स्नेही थे। जब बच्चे मिठाई की दुकान लगाते, तो वे ग्राहक बनकर मिठाई खरीदते। जब शादी का खेल होता, तो वे दुल्हन का मुख देखने पहुँच जाते। वे बच्चों के साथ बच्चा बन जाते थे।
✍️ 3 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 50-60 Words)
Q1. आपके विचार से भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है? 2011, 2014, 2016
उत्तर: भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना इसलिए भूल जाता है क्योंकि:
1. स्वाभाविक चंचलता: बच्चों का मन बहुत चंचल होता है, वे दुख को ज्यादा देर पकड़कर नहीं रखते।
2. मित्रों का साथ: हमउम्र दोस्तों को खेलता-कूदता देखकर उसे खेलने की इच्छा होती है। खेल का आनंद और दोस्तों की मस्ती उसे अपना रोना-धोना भुला देती है।
Q2. 'माता का आँचल' पाठ में 30 के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है। आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको क्या परिवर्तन दिखाई देते हैं? Value Based
उत्तर:
तब: बच्चे धूल-मिट्टी में खेलते थे, टूटे-फूटे बर्तनों से खिलौने बनाते थे। संयुक्त परिवार थे और दादी-नानी की कहानियाँ थीं।
अब: गाँव में भी मोबाइल और प्लास्टिक के खिलौने आ गए हैं। बच्चे बाहर खेलने के बजाय टीवी/फोन में लगे रहते हैं। संयुक्त परिवार टूट रहे हैं और वह बेफिक्र बचपन अब कम दिखता है।
Q3. माता-पिता का बच्चे के प्रति वात्सल्य पाठ में कैसे व्यक्त हुआ है?
उत्तर:
पिता का प्रेम: पिता भोलानाथ को नहलाते, पूजा में बिठाते, कंधे पर घुमाते और खेल में शामिल होते।
माता का प्रेम: माँ उसे जबरदस्ती खाना खिलाती (तोता-मैना बनाकर), नजर उतारती और मुसीबत (साँप) के समय उसे अपने आँचल में छिपाकर सुरक्षा देती।
Q4. बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण क्यों लेता है? Imp.
उत्तर: भोलानाथ का दिनभर का समय पिता के साथ बीतता था, लेकिन विपत्ति (डर) के समय उसे माँ की याद आई।
क्योंकि माँ का आँचल केवल प्रेम नहीं, बल्कि पूर्ण सुरक्षा और शांति का प्रतीक है। बच्चा मानता है कि माँ की गोद में दुनिया का कोई भी डर उसे छू नहीं सकता। पिता 'मित्र' हो सकते हैं, लेकिन 'सुरक्षा कवच' माँ ही होती है।
🔥 5 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 100-120 Words)
Q1. पाठ का शीर्षक 'माता का आँचल' क्यों रखा गया है? क्या कोई अन्य शीर्षक हो सकता था? तर्क सहित उत्तर दें। Imp.
उत्तर:
  • शीर्षक की सार्थकता: पूरी कहानी में भोलानाथ का समय पिता के साथ ज्यादा बीतता है। लेकिन कहानी का अंत (Climax) सबसे महत्वपूर्ण है। जब साँप का डर सामने आता है, तो बच्चा पिता को छोड़कर सीधे माँ के आँचल में छिपता है। लेखक यह दिखाना चाहते हैं कि संकट के समय माँ का आँचल ही सबसे सुरक्षित पनाहगार है। इसलिए यह शीर्षक बिल्कुल सही है।
  • अन्य शीर्षक: इसका अन्य शीर्षक 'मेरा बचपन' या 'बचपन की यादें' हो सकता था क्योंकि इसमें बचपन के खेलों का सुंदर वर्णन है। लेकिन 'माता का आँचल' शीर्षक इसकी मूल भावना (वात्सल्य और सुरक्षा) को सबसे अच्छे से व्यक्त करता है।
Q2. भोलानाथ के खेलों और आज के बच्चों के खेलों में क्या अंतर है? अपने विचार लिखिए। Value Based
उत्तर: भोलानाथ के समय (1930 के दशक) और आज के बच्चों के खेलों में जमीन-आसमान का अंतर है:

  1. संसाधन: भोलानाथ के खिलौने प्रकृति से जुड़े थे- मिट्टी, पत्ते, पत्थर, टूटे घड़े। आज के बच्चों के खिलौने प्लास्टिक, बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक होते हैं।
  2. सामूहिकता: पहले बच्चे समूहों में मिलकर, बाहर मैदान में खेलते थे जिससे उनका शारीरिक और सामाजिक विकास होता था। आज बच्चे मोबाइल या कंप्यूटर पर अकेले (Video Games) खेलते हैं।
  3. कल्पनाशक्ति: भोलानाथ अपने मन से दुकान या खेती का खेल बना लेता था। आज के बच्चों को बने-बनाए गेम मिलते हैं, जिससे उनकी कल्पनाशक्ति (Imagination) कम हो रही है।