राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

Class 10 Hindi | Important Question Bank
📚 पद्यांश आधारित प्रश्न (Extract Based Questions)
"नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥
आयेसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही॥"
(क) 'संभुधनु भंजनिहारा' कौन है? Imp.
उत्तर: 'संभुधनु भंजनिहारा' (शिव जी का धनुष तोड़ने वाला) श्री राम हैं, जो परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए बहुत विनम्रता से बात कर रहे हैं।
(ख) परशुराम किस बात पर क्रोधित हो गए?
उत्तर: जब राम ने कहा कि धनुष तोड़ने वाला आपका कोई 'दास' ही होगा, तो परशुराम यह सुनकर भड़क गए क्योंकि उनके लिए शिव जी का धनुष तोड़ना गुरु का अपमान था, न कि सेवा।
(ग) 'सेवक' की क्या परिभाषा बताई गई है?
उत्तर: परशुराम के अनुसार, 'सेवक' वह है जो सेवा का काम करे। जो शत्रु जैसा काम (धनुष तोड़ना) करे, उसके साथ तो लड़ाई ही करनी चाहिए।
"बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी॥
पुनि पुनि मोहि दिखाव कुठारु। चहत उड़ावन फूँकि पहारू॥"
(क) लक्ष्मण हँसकर (बिहसि) क्या बोले? Imp.
उत्तर: लक्ष्मण हँसकर और कोमल वाणी में व्यंग्य (मजाक) करते हुए बोले- "हे मुनि! आप तो अपने आप को बहुत बड़ा योद्धा (महाभट) मानते हैं।"
(ख) 'फूँकि पहारू' में क्या व्यंग्य है?
उत्तर: लक्ष्मण कहते हैं कि आप मुझे बार-बार कुल्हाड़ा (कुठार) ऐसे दिखा रहे हैं, जैसे फूँक मारकर पहाड़ उड़ाना चाहते हों। मतलब आप मुझे कमजोर समझने की गलती कर रहे हैं।
(ग) लक्ष्मण के स्वभाव की क्या विशेषता यहाँ दिखती है?
उत्तर: यहाँ लक्ष्मण का निडर और व्यंग्यात्मक (Sarcastic) स्वभाव दिखता है। वे परशुराम के क्रोध से डरने के बजाय उनका मजाक उड़ा रहे हैं।
"कौसिक सुनहु मंद येहु बालकु। कुटिलु कालबस निज कुल घालकु॥
भानुबंस राकेस कलंकू। निपट निरंकुस अबुध असंकू॥"
(क) 'कौसिक' किसे कहा गया है और क्यों? Imp.
उत्तर: 'कौसिक' ऋषि विश्वामित्र को कहा गया है। परशुराम उनसे लक्ष्मण की शिकायत कर रहे हैं क्योंकि लक्ष्मण उन्हीं के साथ आए थे।
(ख) परशुराम ने लक्ष्मण को क्या-क्या कहा?
उत्तर: परशुराम ने लक्ष्मण को मंदबुद्धि (मूर्ख), कुटिल, काल के वश में, अपने कुल का नाश करने वाला और सूर्यवंश रूपी चंद्रमा पर कलंक कहा।
(ग) 'काल कवलु होइहि छन माहीं' का आशय क्या है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि यह बालक (लक्ष्मण) पल भर में काल का ग्रास बन जाएगा (मारा जाएगा)। परशुराम चेतावनी दे रहे हैं कि वे उसे क्षण भर में मार सकते हैं।
🎯 1 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 15-20 Words)
Q1. परशुराम किसे अपना गुरु मानते थे? 2025
(a) ब्रह्मा को
(b) विष्णु को
(c) हनुमान को
(d) शिवजी को

उत्तर: (d) शिवजी को
Q2. परशुराम के क्रोध को किसने शांत करने का प्रयास किया था? 2024
(a) श्रीराम ने
(b) लक्ष्मण ने
(c) राजा जनक ने
(d) प्रजा ने

उत्तर: (a) श्रीराम ने (अपनी विनम्रता और मीठे वचनों से)।
Q3. 'भृगुकुलकेतु' शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है? Imp.
उत्तर: यह शब्द परशुराम के लिए प्रयुक्त हुआ है, जिसका अर्थ है- भृगु वंश की पताका (ध्वजा)।
Q4. लक्ष्मण ने परशुराम को क्या कहकर चिढ़ाया?
उत्तर: लक्ष्मण ने कहा कि बचपन में हमने ऐसी बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ी हैं, तब तो आपने कभी गुस्सा नहीं किया।
Q5. परशुराम ने अपनी भुजाओं के बल पर क्या किया था?
उत्तर: उन्होंने अपनी भुजाओं के बल पर धरती को कई बार राजाओं (क्षत्रियों) से रहित कर दिया था।
📝 2 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 30-40 Words)
Q1. राम ने टूटे हुए धनुष के बारे में क्या सफाई दी? Imp.
उत्तर: राम (लक्ष्मण के माध्यम से) तर्क देते हैं कि धनुष बहुत पुराना और कमजोर था। राम ने तो इसे नया समझकर बस छुआ ही था कि वह टूट गया। इसमें राम का कोई दोष नहीं है।
Q2. 'इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं' - लक्ष्मण ने ऐसा क्यों कहा? Imp.
उत्तर: कुम्हड़बतिया (कद्दू का छोटा फल) बहुत नाजुक होता है जो तर्जनी उंगली दिखाने से मर जाता है। लक्ष्मण कहना चाहते हैं कि वे कोई कमजोर या डरपोक नहीं हैं जो परशुराम की धमकियों से डर जाएँगे।
Q3. परशुराम बार-बार अपना फरसा (कुल्हाड़ा) क्यों दिखा रहे थे?
उत्तर: परशुराम लक्ष्मण को डराने के लिए अपना फरसा दिखा रहे थे। वे जताना चाहते थे कि यह वही फरसा है जिससे उन्होंने 'सहस्त्रबाहु' की भुजाएँ काटी थीं और वे लक्ष्मण का वध भी कर सकते हैं।
Q4. लक्ष्मण ने रघुकुल की क्या परंपरा बताई? 2019
उत्तर: लक्ष्मण ने बताया कि रघुकुल के वीर इन चार लोगों पर हथियार नहीं उठाते- देवता, ब्राह्मण, भगवान के भक्त और गाय। क्योंकि इन्हें मारने से पाप लगता है और हारने पर अपयश होता है।
Q5. परशुराम ने लक्ष्मण को 'नृपबालक' (राजपुत्र) क्यों कहा?
उत्तर: क्योंकि लक्ष्मण राजा के बेटे थे, लेकिन वे मृत्यु को सामने देखकर भी संभलकर नहीं बोल रहे थे। परशुराम को लगा कि राजमहल के घमंड में यह बालक काल के वश में होकर बोल रहा है।
✍️ 3 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 50-60 Words)
Q1. 'राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद' में लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या विशेषताएँ बताई हैं? 2010, 2023
उत्तर: लक्ष्मण ने एक सच्चे वीर योद्धा की निम्नलिखित विशेषताएँ बताई हैं:
  • कर्मवीर: वीर योद्धा रणभूमि (युद्ध के मैदान) में अपनी वीरता का प्रदर्शन करते हैं, वे केवल बातें नहीं बनाते।
  • आत्मप्रशंसा नहीं: वे अपने मुँह से अपनी तारीफ नहीं करते।
  • धैर्यवान: वे शांत, धैर्यवान और क्षमाशील होते हैं, वे अपशब्द (गाली) नहीं बोलते।
  • वे कमजोरों (ब्राह्मण, गाय) पर वीरता नहीं दिखाते।
Q2. परशुराम ने विश्वामित्र से लक्ष्मण की क्या शिकायत की? Imp.
उत्तर: परशुराम ने विश्वामित्र से कहा कि यह बालक (लक्ष्मण) बहुत ही कुबुद्धि और कुटिल है। यह 'काल के वश' में है और अपने ही कुल का नाश करने वाला है। यह निडर और उद्दंड है। आप इसे रोक लीजिए, नहीं तो मैं क्षण भर में इसका वध कर दूँगा और फिर मुझे दोष मत देना।
Q3. लक्ष्मण और परशुराम के संवाद में कौन-सा रस और गुण प्रधान है?
उत्तर: इस संवाद में मुख्य रूप से 'वीर रस' और 'रौद्र रस' (क्रोध) की प्रधानता है।
जहाँ परशुराम का गुस्सा दिखता है, वहाँ रौद्र रस है और जहाँ लक्ष्मण का उत्साह और व्यंग्य दिखता है, वहाँ वीर रस है। साथ ही इसमें 'ओज गुण' (जोश भरने वाला) का प्रयोग हुआ है।
Q4. लक्ष्मण ने परशुराम की वाणी को कठोर क्यों कहा? 2018
उत्तर: लक्ष्मण ने व्यंग्य करते हुए कहा कि हे मुनि! आपके तो वचन ही करोड़ों वज्रों (कठोर हथियार) के समान हैं। आपको धनुष-बाण और कुल्हाड़ा रखने की जरूरत ही नहीं है। आप तो अपनी बातों से ही किसी को मार सकते हैं। यह कहकर उन्होंने परशुराम के बड़बोलेपन का मजाक उड़ाया।
Q5. अंत में परशुराम का क्रोध कैसे शांत हुआ?
उत्तर: जब बात बहुत बढ़ गई और परशुराम फरसा लेकर लक्ष्मण को मारने दौड़े, तब श्री राम ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने अपनी आँखों के इशारे से लक्ष्मण को चुप कराया और परशुराम से बहुत ही विनम्र और शीतल वचनों में माफी माँगी। राम की विनम्रता देखकर (जैसे आग में पानी डालने पर बुझ जाती है) परशुराम का गुस्सा शांत हो गया।
🔥 5 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 100-120 Words)
Q1. परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए? 2014, 2024
उत्तर: परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूटने के पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिए ताकि परशुराम शांत हो जाएँ (या चिढ़ जाएँ):

  • बचपन का तर्क: लक्ष्मण ने कहा कि "बचपन में खेल-खेल में हमने ऐसी कई छोटी-छोटी धनुहियाँ तोड़ी हैं, तब तो आपने या किसी ने हम पर क्रोध नहीं किया। इस विशेष धनुष पर इतना प्यार क्यों?"
  • पुराना धनुष: उन्होंने कहा कि यह धनुष तो बहुत पुराना और जीर्ण-शीर्ण (कमजोर) था। यह तो राम के छूते ही टूट गया।
  • राम निर्दोष हैं: लक्ष्मण ने तर्क दिया कि इसमें श्रीराम का कोई दोष नहीं है। उन्होंने तो इसे नया समझकर देखा था, लेकिन यह अपने आप टूट गया।
  • समानता: उन्होंने कहा कि हमारी नजर में तो सब धनुष एक जैसे ही होते हैं, इस पुराने धनुष के टूटने से क्या लाभ और क्या हानि?
Q2. राम और लक्ष्मण के स्वभाव में क्या अंतर है? पाठ के आधार पर स्पष्ट करें। Imp.
उत्तर: इस पाठ में राम और लक्ष्मण के स्वभाव में जमीन-आसमान का अंतर दिखाई देता है:

श्री राम:
  • राम स्वभाव से बहुत शांत, विनम्र और मृदुभाषी हैं।
  • वे बड़ों का आदर करते हैं। परशुराम के क्रोधित होने पर भी वे हाथ जोड़कर माफी माँगते हैं और कहते हैं कि "धनुष तोड़ने वाला आपका कोई दास होगा।"
  • वे आग को बुझाने वाले 'जल' के समान शीतल हैं।
लक्ष्मण:
  • लक्ष्मण स्वभाव से उग्र, क्रोधी और व्यंग्यात्मक हैं।
  • वे अन्याय सहन नहीं कर सकते। परशुराम की बातों का वे ईंट का जवाब पत्थर से देते हैं।
  • वे परशुराम का मजाक उड़ाते हैं और उन्हें चुनौती देते हैं। वे 'आग' के समान तेज हैं।
Q3. परशुराम ने अपनी किन विशेषताओं का बखान (तारीफ) स्वयं किया? Imp.
उत्तर: परशुराम ने लक्ष्मण को डराने के लिए अपनी वीरता का बखान अपने मुँह से किया (आत्मप्रशंसा):

  • बाल ब्रह्मचारी: उन्होंने कहा कि मैं बाल ब्रह्मचारी हूँ और बहुत क्रोधी स्वभाव का हूँ।
  • क्षत्रिय कुल द्रोही: सारी दुनिया जानती है कि मैं क्षत्रिय कुल का घोर शत्रु हूँ।
  • धरती दान: मैंने अपनी भुजाओं के बल पर कई बार इस धरती को राजाओं से जीतकर ब्राह्मणों को दान में दे दिया है।
  • सहस्त्रबाहु का वध: मेरे इस फरसे (कुल्हाड़े) को देखो, इसने सहस्त्रबाहु की भुजाओं को काट डाला था।
  • गर्भ के बच्चे: मेरा फरसा इतना भयानक है कि इसकी आवाज सुनकर गर्भवती स्त्रियों के गर्भ गिर जाते हैं।
Q4. 'राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद' का मूल भाव (Central Idea) क्या है?
उत्तर: यह अंश तुलसीदास के 'रामचरितमानस' के बालकांड से लिया गया है। इसका मूल भाव 'शक्ति के साथ विनम्रता' का महत्त्व बताना है।

कहानी यह है कि सीता स्वयंवर में शिव धनुष टूटने पर परशुराम क्रोधित होकर आते हैं।
  • परशुराम अहंकार और क्रोध के प्रतीक हैं।
  • लक्ष्मण तेज और आवेश के प्रतीक हैं।
  • राम विनम्रता और धैर्य के प्रतीक हैं।
तुलसीदास जी ने दिखाया है कि क्रोध का जवाब क्रोध से देने पर बात बिगड़ती है (लक्ष्मण-परशुराम संवाद), जबकि विनम्रता से बड़े से बड़ा संकट (परशुराम का क्रोध) भी टल जाता है (राम का व्यवहार)। अतः वीर पुरुष को शोभा विनम्रता में ही देती है।