सूरदास – पद (Question Bank)

Class 10 Hindi | Exam Oriented | Complete Answers
📚 पद्यांश आधारित प्रश्न (Extract Based Questions)
"ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी।
अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी।
पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी।"
(क) गोपियों ने उद्धव को 'बड़भागी' क्यों कहा है? Imp.
उत्तर: गोपियों ने उद्धव को व्यंग्य (मजाक) में 'बड़भागी' कहा है। देखने में इसका मतलब 'भाग्यवान' है, लेकिन असल में वे उद्धव को 'अभागा' कह रही हैं क्योंकि वे कृष्ण के पास रहकर भी प्यार के अहसास से खाली हैं।
(ख) 'पुरइनि पात' का उदाहरण क्यों दिया गया है?
उत्तर: गोपियों ने उद्धव की तुलना 'पुरइनि पात' (कमल के पत्ते) से की है। जैसे कमल का पत्ता पानी में रहता है फिर भी उस पर पानी का दाग नहीं लगता, वैसे ही उद्धव कृष्ण के पास रहकर भी उनके प्रेम में नहीं रंगे।
(ग) 'अपरस रहत सनेह तगा तैं' का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर: 'अपरस' का मतलब है अछूता। इसका भाव यह है कि उद्धव प्रेम रूपी धागे (बंधन) से बंधे नहीं हैं, उनका मन किसी के प्रेम में नहीं डूबा है।
"मन की मन ही माँझ रही।
कहिए जाइ कौन पै ऊधौ, नाहीं परत कही।
अवधि अधार आस आवन की, तन मन बिथा सही।"
(क) गोपियों की कौन-सी बात मन में रह गई? 2014
उत्तर: गोपियाँ श्री कृष्ण से अपने सच्चे प्यार का इजहार करना चाहती थीं। लेकिन कृष्ण खुद नहीं आए और उन्होंने योग का संदेश भेज दिया। इसलिए गोपियों के मन की बात मन में ही दबकर रह गई।
(ख) गोपियाँ किस आधार पर अपनी पीड़ा सह रही थीं?
उत्तर: गोपियाँ इस उम्मीद (आधार) पर अपनी तन-मन की पीड़ा सह रही थीं कि एक न एक दिन श्री कृष्ण मथुरा से वापस जरूर लौटेंगे।
(ग) 'बिथा' शब्द का अर्थ क्या है?
उत्तर: यहाँ 'बिथा' का अर्थ है - व्यथा, दर्द या पीड़ा (जो गोपियाँ कृष्ण के बिना सह रही हैं)।
"हमारे हरि हारिल की लकरी।
मन क्रम बचन नंद-नंदन उर, यह दृढ़ करि पकरी।
जागत सोवत स्वप्न दिवस-निसि, कान्ह-कान्ह जकरी।"
(क) 'हारिल की लकरी' किसे कहा गया है? Imp.
उत्तर: यहाँ 'हारिल की लकड़ी' श्री कृष्ण को कहा गया है। जैसे हारिल पक्षी लकड़ी को अपना सहारा मानता है, वैसे ही गोपियों के जीने का एकमात्र सहारा कृष्ण हैं।
(ख) गोपियों ने कृष्ण को कैसे अपनाया है?
उत्तर: गोपियों ने अपने मन से, वचनों से और अपने कर्मों से नन्द के पुत्र (श्री कृष्ण) को अपने दिल में मजबूती से पकड़ रखा है।
(ग) 'कान्ह-कान्ह जकरी' का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर: इसका आशय है कि गोपियाँ दिन-रात, जागते-सोते, यहाँ तक कि सपनों में भी सिर्फ 'कृष्ण-कृष्ण' की रट लगाती रहती हैं।
🎯 1 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 15-20 Words)
Q1. गोपियों ने ज्ञानी उद्धव को कैसे हराया? 2025
उत्तर: गोपियों ने अपने वाक्चातुर्य (बोलने की कला) और तीखे व्यंग्यों से ज्ञानी उद्धव को हरा दिया।
Q2. 'प्रीति-नदी' में किसने पैर नहीं डुबोया?
उत्तर: उद्धव ने। उन्होंने कभी भी प्रेम रूपी नदी में अपना पैर नहीं डुबोया (उन्हें प्यार का अनुभव नहीं है)।
Q3. गोपियों को योग का संदेश कैसा लगता है? Imp.
उत्तर: गोपियों को योग संदेश 'कड़वी ककड़ी' के समान एकदम बेकार और अरुचिकर लगता है।
Q4. 'गुर चाँटी ज्यों पागी' का क्या अर्थ है?
उत्तर: जैसे चींटियाँ गुड़ से चिपक जाती हैं, वैसे ही गोपियाँ श्री कृष्ण के प्रेम में पूरी तरह लीन हैं।
Q5. गोपियों ने स्वयं को क्या कहा है?
उत्तर: गोपियों ने स्वयं को 'अबला और भोली' कहा है जो छल-कपट नहीं जानतीं।
📝 2 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 30-40 Words)
Q1. उद्धव के व्यवहार की तुलना किन दो चीज़ों से की गई है? 2016
उत्तर: गोपियों ने उद्धव की तुलना इन दो चीज़ों से की है:
  • कमल के पत्ते से: जो पानी के अंदर रहकर भी सूखा रहता है।
  • तेल की मटकी से: जिसे पानी में डुबोने पर पानी की एक बूँद भी उस पर नहीं टिकती।
Q2. 'हारिल की लकड़ी' के उदाहरण से गोपियाँ क्या बताना चाहती हैं? Imp.
उत्तर: हारिल पक्षी लकड़ी को हमेशा अपने पंजों में पकड़े रहता है, उसे छोड़ता नहीं है। उसी तरह गोपियों ने भी श्री कृष्ण को अपने दिल में बसा रखा है। वे कृष्ण के बिना जी नहीं सकतीं।
Q3. गोपियों ने योग की शिक्षा किसे देने को कहा? 2025
उत्तर: गोपियों ने उद्धव से कहा कि यह योग का ज्ञान उन लोगों को जाकर दो जिनका मन 'चकरी' की तरह भटकता रहता है। हमारा मन तो कृष्ण में फिक्स (स्थिर) है, हमें योग की जरूरत नहीं है।
Q4. "मरजादा न लही" - यहाँ किस मर्यादा के टूटने की बात है? 2019
उत्तर: प्रेम की मर्यादा यह है कि प्यार के बदले प्यार मिले। लेकिन कृष्ण ने खुद न आकर 'योग संदेश' भेज दिया। उन्होंने गोपियों के विश्वास को तोड़कर प्रेम की मर्यादा नहीं रखी।
Q5. 'सू तौ व्याधि हमको लै आए' - गोपियों ने 'व्याधि' किसे कहा है?
उत्तर: गोपियों ने 'योग संदेश' को व्याधि (बीमारी) कहा है। वे कहती हैं कि उद्धव, तुम हमारे लिए यह कौन सी बीमारी ले आए हो, जिसके बारे में हमने न कभी सुना, न देखा और न कभी भोगा है।
✍️ 3 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 50-60 Words)
Q1. 'राजनीति पढ़ि आए' कहकर गोपियाँ क्या कहना चाहती हैं? Imp.
उत्तर: गोपियाँ व्यंग्य करती हैं कि कृष्ण मथुरा जाकर राजा बन गए हैं और उन्होंने राजनीति के बड़े ग्रंथ पढ़ लिए हैं।
  • वे पहले से ही बहुत चालाक थे, अब राजनीति पढ़कर और ज्यादा होशियार हो गए हैं।
  • वे अब सीधी बात नहीं करते, बल्कि राजाओं की तरह चाल चलकर 'योग संदेश' भेज रहे हैं।
Q2. योग संदेश ने गोपियों की विरह-अग्नि में घी का काम कैसे किया? 2019
उत्तर: गोपियाँ दिन गिन रही थीं कि कृष्ण आएँगे और उनका दुख दूर होगा। यह उम्मीद उनके जीने का सहारा थी।
लेकिन जब उद्धव ने आकर कहा कि "कृष्ण नहीं आएँगे, तुम उन्हें भूलकर योग करो", तो उनकी उम्मीद टूट गई। इस बुरी खबर ने उनकी पीड़ा (आग) को और भड़का दिया, जैसे आग में घी डाल दिया हो।
Q3. गोपियों के अनुसार राजा का असली धर्म क्या है? 2017
उत्तर: गोपियों ने राजधर्म समझाते हुए कहा कि एक सच्चे राजा का धर्म है:
1. अपनी प्रजा को कभी न सताना।
2. प्रजा की भलाई करना और अन्याय से उनकी रक्षा करना।
वे उद्धव को याद दिला रही हैं कि कृष्ण अपना राजधर्म नहीं निभा रहे क्योंकि वे गोपियों को सता रहे हैं।
Q4. गोपियाँ अपना मन वापस क्यों माँग रही हैं? 2018
उत्तर: गोपियों को लगता है कि मथुरा जाने के बाद कृष्ण बदल गए हैं। वे अब राजनीतिज्ञ हो गए हैं और प्रेम की मर्यादा भूल गए हैं। वे अब पहले जैसे दयालु नहीं रहे, बल्कि कठोर हो गए हैं। इसलिए गोपियाँ चाहती हैं कि जो मन (हृदय) कृष्ण यहाँ से जाते वक्त चुपके से चुरा ले गए थे, वे उसे अब वापस कर दें।
Q5. 'धीर धरहिं क्यौं' - गोपियों का धैर्य अब क्यों टूट गया है?
उत्तर: गोपियाँ अब तक समाज की मर्यादा के कारण चुप थीं और इस उम्मीद में धैर्य (सब्र) रखे हुए थीं कि कृष्ण आएँगे। लेकिन जब कृष्ण ने ही धोखा दिया और मिलने की जगह 'योग संदेश' भेज दिया, तो उनका धैर्य जवाब दे गया। अब वे अपनी पीड़ा को रोक नहीं पा रही हैं।
🔥 5 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 100-120 Words)
Q1. गोपियों ने उद्धव को 'भाग्यवान' क्यों कहा? इसमें क्या व्यंग्य छिपा है? 2012, 2025
उत्तर: गोपियों ने उद्धव को 'भाग्यवान' (बड़भागी) कहा है, लेकिन यह उनकी तारीफ नहीं, बल्कि एक बहुत कड़वा ताना (Sarcasm) है।

व्यंग्य का कारण:
  • गोपियाँ असल में उद्धव को दुनिया का सबसे बड़ा 'बदनसीब' मानती हैं।
  • कारण यह है कि उद्धव साक्षात् प्रेम के सागर (श्री कृष्ण) के साथ रहते हैं, फिर भी उन्हें कृष्ण से रत्ती भर भी प्यार नहीं हुआ।
  • जिस इंसान के दिल में प्यार नहीं जागा, उसका जीवन सूखा और बेकार है। वह उस आनंद को नहीं जानता जो भक्ति में है।
इसलिए गोपियाँ मज़ाक उड़ा रही हैं कि "तुम कितने 'किस्मत वाले' हो कि अमृत (कृष्ण) के पास रहकर भी प्यासे रह गए।"
Q2. 'भ्रमरगीत' (इस पाठ) का मुख्य उद्देश्य या सन्देश क्या है? Imp.
उत्तर: सूरदास जी के 'भ्रमरगीत' का मुख्य उद्देश्य यह साबित करना है कि 'ज्ञान और योग' से बड़ा 'सच्चा प्रेम (भक्ति)' होता है।

मुख्य बातें:
  1. ज्ञान का घमंड: उद्धव को अपने ज्ञान और योग साधना पर बहुत घमंड था। वे प्रेम को छोटा और कमजोर समझते थे। कृष्ण उनका यह भ्रम तोड़ना चाहते थे।
  2. प्रेम की शक्ति: अनपढ़ और भोली गोपियों ने अपनी सीधी-सादी बातों और सच्चे प्यार से महाज्ञानी उद्धव का मुँह बंद कर दिया।
  3. निष्कर्ष: अंत में उद्धव को मानना पड़ा कि ईश्वर को पाने के लिए कठिन योग-साधना की नहीं, बल्कि सच्चे और पवित्र प्रेम की जरूरत है। वे भी गोपियों के प्रेम के रंग में रंग गए।
Q3. गोपियों ने उद्धव को क्या-क्या उलाहने (शिकायतें) दीं? विस्तार से लिखें। 2015, 2018
उत्तर: गोपियों ने उद्धव को ताने मारते हुए कई उदाहरण दिए और शिकायतें कीं:

  • कमल का पत्ता: गोपियों ने कहा, "तुम उस कमल के पत्ते जैसे हो जो पानी में रहकर भी सूखा रहता है।" (मतलब तुम पर कृष्ण के प्यार का कोई असर नहीं हुआ)।
  • तेल की मटकी: "जैसे तेल लगी मटकी पर पानी की बूँद नहीं टिकती, वैसे ही तुम्हारे चिकने घड़े जैसे मन पर प्रेम नहीं टिकता।"
  • कड़वी ककड़ी: "तुम्हारा यह 'योग' का ज्ञान कड़वी ककड़ी जैसा है, जिसे न निगला जा सकता है न उगला जा सकता है।"
  • प्रीति-नदी: "तुमने तो आज तक प्यार की नदी में कभी पैर तक नहीं डुबोया, तुम भला प्यार का दर्द क्या जानो?"
Q4. सूरदास के पदों के आधार पर गोपियों की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए। Imp.
उत्तर: गोपियों के चरित्र में हमें निम्नलिखित विशेषताएँ देखने को मिलती हैं:

  • एकनिष्ठ प्रेमिकाएँ: वे कृष्ण से सच्चा और अटूट प्रेम करती हैं। उनके लिए कृष्ण ही सब कुछ हैं (हारिल की लकड़ी की तरह)।
  • वाक्पटु (बोलने में तेज): वे बहुत चतुर हैं। वे अपने व्यंग्य और तर्कों से ज्ञानी उद्धव की बोलती बंद कर देती हैं।
  • साहसी और निडर: वे लोक-लाज की परवाह नहीं करतीं और उद्धव को खरी-खोटी सुनाने में नहीं डरतीं। वे कृष्ण को भी राजनीतिबाज कहने की हिम्मत रखती हैं।
  • भावुक: वे विरह की आग में जल रही हैं, फिर भी उनका प्यार कम नहीं होता।
Q5. 'हमारे हरि हारिल की लकरी' - इस पंक्ति का भाव विस्तार से स्पष्ट करें।
उत्तर: इस पंक्ति के जरिए गोपियाँ अपने अडिग और दृढ़ प्रेम को दिखा रही हैं।

हारिल एक ऐसा पक्षी होता है जो अपने पंजों में हमेशा एक लकड़ी दबाए रहता है। वह उड़ते, बैठते, सोते समय उस लकड़ी को नहीं छोड़ता क्योंकि उसे लगता है कि वही उसका सहारा है।

ठीक वैसे ही, गोपियों ने श्री कृष्ण को अपने जीवन का एकमात्र सहारा बना लिया है। उन्होंने मन, वचन और कर्म से कृष्ण को अपने दिल में जकड़ रखा है। वे जागते-सोते, दिन-रात केवल 'कान्ह-कान्ह' रटती रहती हैं। अब उनके लिए कृष्ण को छोड़ना या योग अपनाना असंभव है।