आत्मकथ्य (Aatmakathya)
Class 10 Hindi | Important Question Bank
📚 पद्यांश आधारित प्रश्न (Extract Based Questions)
"मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी।
मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी॥"
मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी॥"
(क) 'मधुप' किसे कहा गया है और वह क्या कर रहा है?
Imp.
उत्तर: 'मधुप' (भंवरा) यहाँ कवि के मन को कहा गया है। कवि का मन रूपी भंवरा गुनगुनाकर अपने दुख भरे जीवन की कहानी कह रहा है।
(ख) 'मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ' किसका प्रतीक हैं?
उत्तर: मुरझाकर गिरती हुई पत्तियाँ कवि के जीवन की नश्वरता और निराशा का प्रतीक हैं। यह बताता है कि जीवन की खुशियाँ एक-एक करके खत्म हो रही हैं।
(ग) 'गागर-रीति' से कवि का क्या आशय है?
उत्तर: 'गागर-रीति' का अर्थ है - खाली घड़ा। कवि का जीवन भी खाली घड़े की तरह सुख और उपलब्धियों से खाली है, उसमें बताने लायक कुछ भी खास नहीं है।
"किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले—
अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले॥"
अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले॥"
(क) कवि अपने मित्रों को क्या चेतावनी देना चाहता है?
Imp.
उत्तर: कवि अपने दोस्तों से कहते हैं कि अगर मैं अपनी खाली और दुख भरी कहानी लिखूँ, तो कहीं ऐसा न हो कि तुम खुद को ही मेरे दुखों का कारण समझने लगो।
(ख) 'मेरा रस ले अपनी भरने वाले' का भाव क्या है?
उत्तर: इसका भाव यह है कि कहीं मेरे दोस्त यह न सोचें कि उन्होंने ही मेरे जीवन का सुख (रस) छीनकर अपनी खुशियाँ (घड़ा) भरी हैं।
(ग) कवि अपनी आत्मकथा क्यों नहीं लिखना चाहते?
उत्तर: क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी आत्मकथा पढ़कर लोगों को कोई प्रेरणा नहीं मिलेगी, बल्कि लोग उनके खाली जीवन का मजाक ही उड़ाएंगे।
"जिसके अरुण कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में॥"
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में॥"
(क) 'अरुण कपोल' का क्या अर्थ है?
Imp.
उत्तर: 'अरुण कपोल' का अर्थ है - लाल गाल। कवि अपनी प्रेमिका के गालों की सुंदरता का वर्णन कर रहे हैं।
(ख) कवि ने अपनी प्रेमिका की तुलना किससे की है?
उत्तर: कवि ने अपनी प्रेमिका की तुलना 'उषा' (भोर) से की है। वे कहते हैं कि सुबह की लालिमा भी मानो उनकी प्रेमिका के गालों से ही लाली उधार लेती थी।
(ग) यहाँ कौन-सा अलंकार है?
उत्तर: यहाँ प्रकृति (उषा) का मानवीकरण किया गया है, इसलिए यहाँ मानवीकरण अलंकार है।
🎯 1 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 15-20 Words)
Q1. 'आत्मकथ्य' कविता के कवि कौन हैं?
Board
उत्तर: जयशंकर प्रसाद (छायावादी कवि)।
Q2. कवि अपने जीवन को कैसा बताता है?
उत्तर: कवि अपने जीवन को 'रीति गागर' (खाली घड़े) जैसा और दुखों से भरा हुआ बताता है।
Q3. 'कंथा' शब्द का क्या अर्थ है?
Imp.
उत्तर: 'कंथा' का अर्थ है - गुदड़ी (फटे-पुराने कपड़े) या यहाँ इसका अर्थ 'अंतर्मन' (inner self) से है।
Q4. कवि ने 'मधुप' (भंवरा) किसे कहा है?
उत्तर: कवि ने अपने 'मन' को मधुप कहा है जो गुनगुनाकर अपनी कहानी कह रहा है।
Q5. 'सीवन को उधेड़कर देखना' का क्या मतलब है?
उत्तर: इसका मतलब है - पुरानी यादों को कुरेदना या छिपे हुए जख्मों को फिर से ताजा करना।
📝 2 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 30-40 Words)
Q1. कवि आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहता है?
Imp.
उत्तर: कवि को लगता है कि उनका जीवन बहुत साधारण है और उसमें केवल दुख और धोखा ही है। अगर वे इसे लिखेंगे, तो दुनिया उनका मजाक उड़ाएगी (उपहास करेगी), इसलिए वे बचना चाहते हैं।
Q2. 'अरी सरलते, तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं' - में कवि क्या कहना चाहता है?
2014
उत्तर: कवि अपने सरल स्वभाव (भोलेपन) को कोस रहे हैं। वे कहते हैं कि मेरे इसी भोलेपन के कारण लोगों ने मुझे धोखा दिया। अब आत्मकथा लिखकर मैं अपनी ही गलतियों का जग-हँसाई नहीं करवाना चाहता।
Q3. 'उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की' - कथन का आशय क्या है?
उत्तर: कवि के जीवन में अपनी प्रेमिका के साथ बिताए कुछ ही सुखद पल (चाँदनी रातें) थे। वे पल उनके लिए बहुत निजी और पवित्र हैं। वे उन मीठी यादों को दुनिया के सामने गाकर (बताकर) उन्हें आम नहीं करना चाहते।
Q4. कवि ने अपने जीवन को 'स्वप्न' के समान क्यों कहा?
2011
उत्तर: जैसे सपना आँख खुलते ही टूट जाता है, वैसे ही कवि के जीवन में सुख आया तो सही, लेकिन वह उसे छूने से पहले ही गायब हो गया। सुख एक अधूरे सपने की तरह बनकर रह गया।
Q5. 'व्यथा' और 'कथा' में कवि ने क्या संबंध बताया है?
उत्तर: कवि कहते हैं कि मेरी 'कथा' (कहानी) में सिर्फ 'व्यथा' (दर्द) है। अभी मेरा दर्द सोया हुआ है, थका हुआ है। उसे जगाओ मत, यानी मुझे आत्मकथा लिखने के लिए मजबूर मत करो।
✍️ 3 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 50-60 Words)
Q1. स्मृति को 'पाथेय' बनाने से कवि का क्या आशय है?
2015
उत्तर: 'पाथेय' का अर्थ है - रास्ते का भोजन (सहारा)।
कवि का आशय यह है कि उनके जीवन में अब कोई सुख नहीं बचा है। उनकी प्रेमिका (पत्नी) के साथ बिताए पलों की मीठी यादें (स्मृतियाँ) ही अब उनके थके हुए जीवन का एकमात्र सहारा हैं। वे इन्हीं यादों के सहारे अपनी बाकी जिंदगी काटना चाहते हैं, जैसे यात्री भोजन (पाथेय) के सहारे यात्रा पूरी करता है।
कवि का आशय यह है कि उनके जीवन में अब कोई सुख नहीं बचा है। उनकी प्रेमिका (पत्नी) के साथ बिताए पलों की मीठी यादें (स्मृतियाँ) ही अब उनके थके हुए जीवन का एकमात्र सहारा हैं। वे इन्हीं यादों के सहारे अपनी बाकी जिंदगी काटना चाहते हैं, जैसे यात्री भोजन (पाथेय) के सहारे यात्रा पूरी करता है।
Q2. 'विडंबना! अरी सरलते...' पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
Imp.
उत्तर: कवि अपने 'सरल स्वभाव' को अपनी कमजोरी मानते हैं। वे कहते हैं कि यह बड़ी विडंबना (दुर्भाग्य) है कि मैं सीधा-सादा रहा, इसलिए दोस्तों और दुनिया ने मुझे ठगा। अब अगर मैं आत्मकथा लिखूँगा, तो मुझे उन धोखों का जिक्र करना पड़ेगा, जिससे मेरी अपनी ही सरलता की हँसी उड़ाई जाएगी। इसलिए वे चुप रहना बेहतर समझते हैं।
Q3. आत्मकथा सुनाने के संदर्भ में 'अभी समय भी नहीं' कवि ऐसा क्यों कहता है?
2012
उत्तर: कवि ऐसा इसलिए कहते हैं क्योंकि:
1. उनके जीवन के दुख अभी ताजा हैं और वे उन्हें कुरेदना नहीं चाहते।
2. उन्होंने अभी तक जीवन में कोई महान उपलब्धि हासिल नहीं की है जिसे दुनिया को बताया जाए।
3. उनकी मौन व्यथा अभी सोई हुई है, वे उसे जगाकर फिर से दुखी नहीं होना चाहते।
1. उनके जीवन के दुख अभी ताजा हैं और वे उन्हें कुरेदना नहीं चाहते।
2. उन्होंने अभी तक जीवन में कोई महान उपलब्धि हासिल नहीं की है जिसे दुनिया को बताया जाए।
3. उनकी मौन व्यथा अभी सोई हुई है, वे उसे जगाकर फिर से दुखी नहीं होना चाहते।
Q4. 'छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कथाएँ आज कहूँ?' - इसका भाव क्या है?
उत्तर: जयशंकर प्रसाद जी बहुत विनम्र हैं। वे मानते हैं कि वे एक बहुत ही सामान्य इंसान हैं और उनका जीवन 'छोटा' (साधारण) है। उन्होंने ऐसा कोई बड़ा काम नहीं किया है जिसकी 'बड़ी कथाएँ' (महान गाथा) लिखी जाएँ। वे खुद को महान बताकर वाहवाही नहीं लूटना चाहते, यह उनकी महानता और सादगी को दर्शाता है।
Q5. 'जिसका स्वप्न देखकर जाग गया, आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया' - इसका अर्थ लिखें।
उत्तर: कवि कहते हैं कि सुख उनके जीवन में एक सपने की तरह आया। उन्होंने सुख का सपना देखा और उसे पाने के लिए हाथ बढ़ाए (आलिंगन करना चाहा), लेकिन सुख उनके गले लगने से पहले ही मुस्कुराकर गायब हो गया (भाग गया)। यानी सुख उनके करीब आकर भी उन्हें मिल नहीं सका और उनकी किस्मत में सिर्फ इंतजार रह गया।
🔥 5 अंक वाले प्रश्न (Word Limit: 100-120 Words)
Q1. कवि ने जो सुख का स्वप्न देखा था उसे कविता में किस रूप में अभिव्यक्त किया है?
2009, 2010, 2017
उत्तर: कवि ने अपने सुख के स्वप्न को अपनी प्रेयसी (प्रेमिका/पत्नी) के माध्यम से बहुत ही सुंदर ढंग से अभिव्यक्त किया है।
स्वप्न का वर्णन:
स्वप्न का वर्णन:
- कवि ने देखा कि उनकी प्रेयसी बहुत सुंदर है। उसके गालों की लाली ऐसी है जैसे भोर (सुबह) की लालिमा हो (अरुण कपोल)।
- कवि ने सपने में देखा कि वे सुख को पाने ही वाले हैं, वे उसे अपनी बांहों में (आलिंगन में) लेने के लिए आगे बढ़े।
- लेकिन तभी उनकी नींद खुल गई और वह सुख का सपना टूट गया। वह सुख उनके पास आते-आते "मुस्कुराकर भाग गया"।
Q2. 'आत्मकथ्य' कविता के माध्यम से कवि जयशंकर प्रसाद के व्यक्तित्व की कौन-सी विशेषताएँ उभरकर आती हैं?
Imp.
उत्तर: 'आत्मकथ्य' कविता से कवि जयशंकर प्रसाद के व्यक्तित्व की निम्नलिखित महान विशेषताएँ उभरकर आती हैं:
- विनम्रता और सादगी: वे इतने बड़े कवि होकर भी खुद को "छोटे से जीवन" वाला साधारण इंसान मानते हैं। उनमें घमंड बिल्कुल नहीं है।
- यथार्थवादी: वे जीवन की कड़वी सच्चाई को स्वीकार करते हैं कि जीवन नश्वर है (मुरझाकर गिरती पत्तियाँ)।
- गंभीर और धैर्यवान: उनके जीवन में बहुत दुख और धोखा है, फिर भी वे किसी की शिकायत नहीं करते। वे अपने दुखों को अपने तक ही सीमित रखना चाहते हैं (मौन व्यथा)।
- सच्चे प्रेमी: वे अपनी पत्नी/प्रेमिका से बेहद प्यार करते हैं और उसकी यादों को ही अपने जीवन का सहारा (पाथेय) मानते हैं।
Q3. कवि आत्मकथा लिखने के बजाय 'मौन' रहना क्यों बेहतर समझते हैं? तर्क सहित उत्तर दें।
Board
उत्तर: कवि आत्मकथा लिखने के बजाय 'मौन' रहना इसलिए बेहतर समझते हैं क्योंकि:
- जग-हँसाई का डर: अगर वे अपनी आत्मकथा लिखेंगे, तो उन्हें बताना पड़ेगा कि कैसे उनके सीधेपन का फायदा उठाकर दोस्तों ने उन्हें धोखा दिया। इससे लोग उनकी 'सरलता' का मजाक उड़ाएंगे।
- खाली जीवन: वे मानते हैं कि उनका जीवन 'खाली घड़े' जैसा है। उसमें उपलब्धियों की जगह सिर्फ दुख और असफलताएँ हैं, जिन्हें सुनाने में कोई बड़प्पन नहीं है।
- निजी पलों की रक्षा: वे अपने प्रेम के निजी पलों (उज्ज्वल गाथा) को दुनिया के सामने तमाशा नहीं बनाना चाहते।
- दुखों को जगाना नहीं चाहते: उनके दुख अभी सोए हुए हैं, वे आत्मकथा लिखकर उन पुराने जख्मों को हरा नहीं करना चाहते।