विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव (Chemical Effects of Electric Current)
विद्युत चालन के आधार पर पदार्थों का वर्गीकरण (Classification of Materials)
विद्युत धारा को अपने अंदर से प्रवाहित होने देने की क्षमता के आधार पर पदार्थों को दो भागों में विभाजित किया जाता है:
सुचालक (Good Conductors): वे पदार्थ जो विद्युत धारा को अपने अंदर से आसानी से प्रवाहित होने देते हैं, विद्युत के सुचालक कहलाते हैं।
उदाहरण: ताँबा (Copper), एल्युमिनियम (Aluminium), लोहा (Iron), चाँदी (Silver) आदि धातुएँ।
हीन चालक / कुचालक (Poor Conductors / Insulators): वे पदार्थ जो विद्युत धारा को आसानी से अपने अंदर से प्रवाहित नहीं होने देते, विद्युत के हीन चालक कहलाते हैं।
उदाहरण: रबर (Rubber), प्लास्टिक (Plastic), लकड़ी (Wood), काँच (Glass)।
क्या द्रव विद्युत का चालन करते हैं? (Do Liquids Conduct Electricity?)
ठोस पदार्थों की तरह ही कुछ द्रव भी विद्युत के सुचालक होते हैं और कुछ हीन चालक।
चालन करने वाले द्रव: नींबू का रस (Lemon Juice), सिरका (Vinegar), नल का पानी (Tap Water), अम्ल (Acid), क्षार (Base) और लवणों के घोल (Salt Solutions)।
चालन न करने वाले द्रव: आसुत जल (Distilled Water), वनस्पति तेल (Vegetable Oil), दूध (Milk), शहद (Honey)।
संपरीक्षित्र (Tester)
द्रवों में विद्युत धारा की जाँच करने के लिए जिस परिपथ का उपयोग किया जाता है, उसे संपरीक्षित्र (Tester) कहते हैं।
दुर्बल (कमजोर) विद्युत धारा की जाँच करने के उपाय (Methods to Test Weak Current):
जब किसी द्रव में विद्युत धारा बहुत कमजोर (Weak) होती है, तो साधारण बल्ब का तंतु (Filament) गर्म होकर दीप्त (जलन) नहीं पाता। इसके लिए दो विशेष संपरीक्षित्र का उपयोग किया जाता है:
LED (प्रकाश उत्सर्जक डायोड - Light Emitting Diode) संपरीक्षित्र:
LED बहुत ही दुर्बल धारा प्रवाहित होने पर भी जल उठता है।
LED में दो तार (Leads) होते हैं:
लंबा तार: हमेशा बैटरी के धन (+) टर्मिनल (Positive Terminal) से जोड़ा जाता है।
छोटा तार: हमेशा बैटरी के ऋण (-) टर्मिनल (Negative Terminal) से जोड़ा जाता है।
चुंबकीय सुई (Magnetic Compass)
यह विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव (Magnetic Effect) पर आधारित होता है।
विद्युत धारा अपने चारों ओर चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न करती है। यदि हम परिपथ के तार को माचिस की डिब्बी (जिसमें चुंबकीय सुई रखी हो) के चारों ओर लपेट दें, तो दुर्बल धारा प्रवाहित होने पर भी चुंबकीय सुई (Magnetic Compass) विक्षेपित (Deflect) होती है।
इलेक्ट्रोड (Electrode)
किसी विद्युत-अपघट्य (विलयन) में डूबी हुई धातु या कार्बन की छड़ों को इलेक्ट्रोड कहते हैं, जिनके माध्यम से विद्युत धारा द्रव में प्रवेश करती है या बाहर निकलती है।
इलेक्ट्रोड दो प्रकार के होते हैं:
एनोड (Anode): बैटरी के धन (+) टर्मिनल से जुड़ी छड़ को एनोड कहते हैं।
कैथोड (Cathode): बैटरी के ऋण (-) टर्मिनल से जुड़ी छड़ को कैथोड कहते हैं।
विद्युत-अपघट्य (Electrolyte)
वह द्रव या विलयन जिसमें से विद्युत धारा प्रवाहित करने पर वह अपने आयनों में विभक्त हो जाता है तथा विद्युत चालन करता है, उसे विद्युत-अपघट्य (Electrolyte) कहते हैं।
उदाहरण: कॉपर सल्फेट विलयन (CuSO₄), नमक का पानी (NaCl solution), तनु सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄)।
विद्युत-अनपघट्य (Non-Electrolyte)
वह द्रव जिसमें से विद्युत धारा प्रवाहित नहीं होती और कोई रासायनिक परिवर्तन नहीं होता, उसे विद्युत-अनपघट्य कहते हैं।
उदाहरण: आसुत जल, चीनी का घोल, तेल।
विद्युत अपघटन (Electrolysis)
किसी विद्युत-अपघट्य विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित करके उसे उसके रासायनिक घटकों में विभाजित करने की प्रक्रिया को विद्युत अपघटन कहते हैं।
जल और विद्युत चालन (Water and Electricity Conduction)
आसुत जल (Distilled Water): यह लवणों (Salts) से पूर्णतः मुक्त शुद्ध जल होता है। अतः यह विद्युत का हीन चालक (कुचालक) होता है।
साधारण / नल का जल (Tap Water / Salt Water): इसमें प्राकृतिक रूप से कई खनिज लवण घुले होते हैं। लवणों की उपस्थिति के कारण यह विद्युत का सुचालक होता है।
समुद्र का जल: इसमें साधारण पानी की तुलना में बहुत अधिक लवण (नमक) घुले होते हैं, इसलिए यह विद्युत का बहुत अच्छा चालक होता है। यही कारण है कि समुद्र के पानी में टेस्टर की चुंबकीय सुई सबसे अधिक विक्षेप दर्शाती है।
सुरक्षा चेतावनी (Safety Precaution):
आग लगने की स्थिति में फायरमैन पानी की बौछार डालने से पहले उस क्षेत्र की मुख्य बिजली आपूर्ति बंद कर देते हैं, क्योंकि साधारण पानी विद्युत का सुचालक होता है और उसमें करंट फैलने का खतरा रहता है।
विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव (Chemical Effects of Electric Current)
जब किसी विद्युत-अपघट्य (चालक द्रव) में इलेक्ट्रोडों के माध्यम से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो द्रव में रासायनिक परिवर्तन होते हैं। इसे विद्युत धारा का रासायनिक प्रभाव कहते हैं।
रासायनिक प्रभावों के लक्षण:
इलेक्ट्रोडों पर गैस के बुलबुले बनना।
इलेक्ट्रोडों पर धातु का जमना (निक्षेपण)।
विलयन के रंग में परिवर्तन होना।
जल का विद्युत अपघटन - विलियम निकोलसन का प्रयोग (William Nicholson's Experiment)
सन् 1800 में ब्रिटिश रसायनज्ञ विलियम निकोलसन ने दर्शाया कि जब जल में डूबे इलेक्ट्रोडों से धारा प्रवाहित की जाती है, तो जल का अपघटन होता है:
ऑक्सीजन गैस: बैटरी के धन (+) टर्मिनल (Anode) पर बनती है।
हाइड्रोजन गैस: बैटरी के ऋण (-) टर्मिनल (Cathode) पर बनती है।
विद्युतलेपन (Electroplating)
परिभाषा: विद्युत धारा की सहायता से किसी एक धातु की सतह पर किसी दूसरी इच्छित (वांछित) धातु की पतली परत चढ़ाने की प्रक्रिया को विद्युतलेपन (Electroplating) कहते हैं।
कॉपर प्लेटिंग (ताँबे का लेपन) की कार्यप्रविधि:
एक बीकर में कॉपर सल्फेट (CuSO₄) का विलयन (विद्युत-अपघट्य) लेते हैं।
जिस वस्तु (जैसे- लोहे की चम्मच) पर ताँबे की परत चढ़ानी होती है, उसे बैटरी के ऋण (-) टर्मिनल (Cathode) से जोड़ते हैं।
शुद्ध ताँबे (Copper) की प्लेट को बैटरी के धन (+) टर्मिनल (Anode) से जोड़ते हैं।
धारा प्रवाहित करने पर कॉपर सल्फेट विलयन कॉपर और सल्फेट आयनों में टूट जाता है।
स्वतंत्र कॉपर ऋण टर्मिनल से जुड़ी वस्तु पर जमा होने लगता है, और एनोड (ताँबे की प्लेट) से उतना ही कॉपर विलयन में घुलता रहता है।
विद्युतलेपन के नियम (Rules of Electroplating):
जिस वस्तु पर परत चढ़ानी हो, उसे हमेशा कैथोड (ऋण टर्मिनल) से जोड़ा जाता है।
जिस धातु की परत चढ़ानी हो, उसकी छड़ को एनोड (धन टर्मिनल) से जोड़ा जाता है।
विलयन हमेशा उसी धातु का लवण होना चाहिए जिसकी परत चढ़ानी है।
विद्युतलेपन के प्रमुख उपयोग (Applications of Electroplating):
क्रोमियम लेपन (Chromium Plating): कार के बंपर, साइकिल के हैंडल, नल और पहियों के रिम पर क्रोमियम की परत चढ़ाई जाती है, क्योंकि क्रोमियम चमकदार होता है और इस पर जंग व खरोंच नहीं लगती।
कृत्रिम आभूषण (Artificial Jewelry): सस्ती धातुओं (जैसे ताँबा, पीतल) पर सोना (Gold) या चाँदी (Silver) का विद्युतलेपन करके आकर्षक आभूषण बनाए जाते हैं।
टिन के डिब्बे (Tin Cans): लोहे के डिब्बों पर टिन (Tin) की परत चढ़ाई जाती है, क्योंकि टिन लोहे से कम क्रियाशील होता है और खाद्य पदार्थों को खराब होने से बचाता है।
जंग से बचाव (Galvanization): पुलों मे लोहे को जंग लगने से बचाने के लिए उस पर जिंक (जस्ता) की परत चढ़ाई जाती है।