सत्ता की साझेदारी
Subjective Questions & Answers (Page 3-16)
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
उत्तर : जब किसी देश की शासन व्यवस्था में समाज के सभी समुदायों को प्रतिनिधित्व दिया जाता है तो इस व्यवस्था को सत्ता की साझेदारी के नाम से जाना जाता है।
उत्तर : सत्ता की साझेदारी निम्नलिखित कारणों से जरूरी है -
1. समाज के विभिन्न समुदायों के बीच जब सत्ता की साझेदारी कर दी जाती है तो समुदायों के बीच आपस में संघर्ष या टकराव की संभावना कम हो जाती है।
2. सत्ता की साझेदारी से देश में राजनीतिक स्थायित्व स्थापित होता है सत्ता की साझेदारी के अभाव में देश में हिंसा एवं अस्थिरता को बढ़ावा मिलता है।
3. सत्ता की साझेदारी होने से देश में एकता एवं अखंडता को प्रोत्साहन मिलता है और सभी समुदाय अपने को राष्ट्र से जुड़ा हुआ मानते हैं।
4. लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में वैध सरकार वही है जिसमें समाज के सभी समुदाय शासन व्यवस्था में अपनी भागीदारी से जुड़े होते हैं।
उत्तर : बेल्जियम के सत्ता विभाजन के मॉडल की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित है –
1. बेल्जियम के संविधान में यह व्यवस्था की गई कि केंद्रीय सरकार में डच भाषी लोगों और फ्रेंच भाषी लोगों के मंत्रियों की संख्या बराबर होगी।
2. कोई भी कानून तभी बन सकेगा जब दोनों पक्षों की सहमति होगी कोई एक समुदाय एक तरफा फैसला नहीं कर सकता।
3. शक्तियों का विभाजन केंद्र और राज्यों के बीच स्पष्ट रूप से कर दिया गया है राज्य सरकार किसी भी मामले में केंद्र सरकार के अधीन नहीं है।
4. उनकी राजधानी ब्रुसेल्स में समुदायों के समान प्रतिनिधित्व वाली एक अलग सरकार है।
5. तीसरे स्तर की भी सरकार है जिसे सामुदायिक सरकार कहा जाता है। यह संस्कृति, शिक्षा और भाषा जैसे मामलों में निर्णय करती है।
उत्तर : श्रीलंका में दो प्रमुख समुदाय के लोग हैं- एक सिंहली और दूसरा तमिल। सिंहलियों ने बहुसंख्यक के बल पर शासन पर प्रभुत्व जमाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए -
1. तमिल भाषा की अवहेलना की गई और सिंहली भाषा को एकमात्र राजभाषा घोषित कर दी गई।
2. विश्वविद्यालयों तथा सरकारी नौकरियों में सिंहली भाषा (सिंहलियों) को प्राथमिकता दी गई।
3. बौद्ध धर्म को सरकारी संरक्षण दिया गया।
4. श्रीलंकाई तमिलों को नागरिकता से अलग रखा गया।
उत्तर : आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में सत्ता की साझेदारी के विभिन्न रूप निम्नलिखित हैं –
1. सत्ता का क्षैतीज वितरण: सत्ता का बंटवारा शासन के विभिन्न अंगों - विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका के बीच होता है। इसे नियंत्रण एवं संतुलन की व्यवस्था भी कहा जाता है।
2. सत्ता का उर्ध्वाधर वितरण: सत्ता का बंटवारा सरकार के विभिन्न स्तरों (जैसे केन्द्रीय तथा राज्य सरकारों) के बीच होता है।
3. विभिन्न समूहों के बीच वितरण: विभिन्न भाषाई, धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों को विधायिका और प्रशासन में हिस्सेदारी दी जाती है।
4. दबाव समूह तथा राजनीतिक दल: विभिन्न समूह दबाव बनाकर या राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा के माध्यम से सुनिश्चित करते हैं कि सत्ता एक हाथ में न रहे।
उत्तर : युक्तिपरक कारण: विभिन्न समूहों के बीच सत्ता के बँटवारे से टकराव की संभावना कम हो जाती है, राजनीतिक हिंसा समाप्त होती है तथा राजनीतिक स्थिरता को बढ़ावा मिलता है।
नैतिक कारण: सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है। लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है कि सत्ता का विभाजन विभिन्न समूहों के बीच होना चाहिए।
उत्तर : श्रीलंकाई तमिलों की मुख्य मांगें निम्नलिखित थीं:
1. तमिल को राजभाषा बनाया जाए।
2. क्षेत्रीय स्वायत्तता प्रदान की जाए।
3. शिक्षा और सरकारी नौकरियों में समान अवसर दिए जाएं।
उत्तर : बेल्जियम में भाषाई विवाद को हल करने का प्रयास पूरी तरह से सफल रहा क्योंकि -
1. केन्द्रीय सरकार में डच और फ्रेंच भाषी मंत्रियों की संख्या समान रखी गई।
2. क्षेत्रीय सरकारों को सशक्त बनाया गया और उन्हें स्वायत्तता दी गई।
3. सामुदायिक सरकार का गठन किया गया जो सांस्कृतिक और भाषाई मुद्दों पर निर्णय लेती थी।