अति लघु उत्तरीय प्रश्न
उत्तर : वन्य जीवन और कृषि फसलों में जो इतनी विविधता पाई जाती है उसे जैव विविधता कहते हैं, इनका हमारे लिए बड़ा महत्व है क्योंकि इनके द्वारा विविध प्रकार की आवश्यकताओं की पूर्ति होती है |
उत्तर : भारत में जैव विविधता कम करने वाले कारकों में वनों का विनाश, जंगली जानवरों को मारना व आखेटन, पर्यावरणीय प्रदूषण और दावानल आदि प्रमुख हैं |
उत्तर : 'गिर राष्ट्रीय उद्यान' जो गुजरात के सौराष्ट्र सभाग में स्थित है |
उत्तर : वह सुरक्षित क्षेत्र जहां प्राकृतिक वनस्पति, प्राकृतिक सुंदरता तथा वन्य प्राणियों को सुरक्षित रखा जाता है, राष्ट्रीय उद्यान कहलाता है |
उत्तर : असम तथा पश्चिमी बंगाल के दलदली भागों में पाया जाता है तथा काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एक सींग वाले गैंडे के लिए प्रसिद्ध है ।
उत्तर : पौधों जीवों के संकटग्रस्त वे जातियां हैं जिनके लुप्त होने का खतरा है। जैसे- भारतीय जंगली गधा, गैंडा, एक पूछ वाला बंदर आदि।
उत्तर : पौधों और प्राणियों के सुभेद्य जातियां वे हैं जिनकी संख्या कम होती जा रही है। यदि इनके संरक्षण का प्रयत्न नहीं किया गया तो वह संकटग्रस्त श्रेणी में चले जाएंगे। जैसे- एशियाई हाथी, नीली भेड़ आदि।
लघु उत्तरीय प्रश्न
उत्तर : वन हमारे जीवन में कई तरह से उपयोगी हैं वनों से होने वाले लाभ को प्रत्यक्ष और परोक्ष दो तरह से देखा जा सकते है |
- प्रत्यक्ष रूप से होने वाले लाभ: जैसे जलावन के लिए लकड़ी, इमारती लकड़ी, फल-फूल, जड़ी-बूटियाँ, तरह तरह के पशु पक्षियों के आवास शामिल हैं |
- परोक्ष रूप से होने वाले लाभ: जैसे मृदा अपरदन को रोकना, तेज हवा के गति को कम करना, वायुमंडल में कार्बन डाई ऑक्साइड तथा ऑक्सीजन के अनुपात को संतुलित रखना, वातावरण को शीतल बनाना तथा वर्षा को अपनी ओर आकर्षित करना शामिल है ।
उत्तर : प्रशासनिक उद्देश्य के आधार पर वनों को तीन भागों में बांटा गया है-
- 1. आरक्षित वन (Reserved Forest): वे वन क्षेत्र हैं जो सरकार के प्रत्यक्ष नियंत्रण में होते हैं और जिनका मुख्य उद्देश्य वन संसाधनों का संरक्षण और प्रबंधन है। इन वनों में स्थानीय लोगों की गतिविधियाँ, जैसे लकड़ी एकत्रित करना या पशुओं को चराना, पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं। देश के कुल वन क्षेत्र का लगभग 53% हिस्सा इस श्रेणी के अंतर्गत आता है।
- 2. संरक्षित वन (Protected Forests): इन वनों में सरकार की देखरेख में स्थानीय लोगों को सीमित मात्रा में लकड़ी इकट्ठा करने और पशुओं को चराने की अनुमति होती है। देश के कुल वन क्षेत्र का लगभग 29% हिस्सा इस श्रेणी में आता है।
- 3. अवर्गीकृत वन (Unclassified Forests): इन वनों में पेड़ों को काटने और मवेशियों को चराने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। देश के लगभग 18% वन क्षेत्र इस श्रेणी में आते हैं।
उत्तर : भारत में वनों का नुकसान निम्नलिखित कारणों से हुआ है:
- उपनिवेश काल में रेल लाइन, कृषि, व्यवसाय और खनन क्रियाओं में वृद्धि से।
- स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद कृषि के फैलाव और झूम खेती के प्रचलन से।
- बड़े-बड़े विकास परियोजनाओं और नदी घाटी परियोजनाओं के कारण बहुत बड़ा क्षेत्र जलमग्न होने से।
- बड़े-बड़े उद्योगों तथा खनन कार्य में वृद्धि होने से।
उत्तर : वन हमारे जीवन के लिए प्रत्यक्ष तथा परोक्ष दोनों तरह से लाभकारी हैं | जिस तरह से वनों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है उससे हमारा जीवन प्रभावित होने लगा है:
- वनों के नुकसान से पशु-पक्षियों तथा वनस्पति की कई प्रजातियाँ विलुप्त होने के कगार पर हैं |
- मृदा अपरदन, वर्षा की कमी, जलवायु परिवर्तन तथा पर्यावरण प्रदूषण इसके मुख्य परिणाम हैं |
- अत: मनुष्य को अपना जीवन सुरक्षित रखना है तो वनों का संरक्षण करना उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेवारी होनी चाहिए |
उत्तर : जैव आरक्षित क्षेत्र एक बहुउद्देशीय सुरक्षित क्षेत्र होता है जहां वैज्ञानिक, स्थानीय लोग और सरकार मिलकर कार्य करते हैं ताकि वन्य प्राणियों और प्राकृतिक संपदा के अच्छे ढंग से संरक्षण के साथ-साथ उचित उपयोग किया जा सके। ऐसे क्षेत्रों में कृषि कार्यों को करने की विशेषकर स्थानीय लोगों को छूट दी जाती है और उन्हें नौकरियां भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
उत्तर : वन्य जीवों में बाघ एक अति महत्वपूर्ण जाति है | इसकी घटती संख्या को लेकर सरकार ने इसे शुरू किया:
- बीसवीं शताब्दी के आरम्भ में इनकी अनुमानित संख्या 55000 थी, किन्तु 1973 में गणना करने पर यह केवल 1827 रह गई थी |
- इनकी घटती संख्या का कारण व्यापार के लिए शिकार, हड्डियों को दवा बनाने में प्रयोग करना और प्राकृतिक आवास का सिकुड़ना था |
- बाघों के संरक्षण के लिए सरकार ने 1973 में 'बाघ परियोजना' शुरू की |
- प्रमुख बाघ अभयारण्य: कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान (उत्तराखंड), सुंदरवन (पश्चिम बंगाल), सरिस्का (राजस्थान), मानस (असम), बांधवगढ़ (मध्य प्रदेश) और पेरियार (केरल) |
उत्तर : मानव प्राचीन काल से ही प्रकृति की पूजा करता आ रहा है | भारतीय संस्कृति में वनों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है:
- हमारे देश की अनेक जनजातियाँ वनों को पवित्र मानकर उसकी पूजा करती हैं। मुण्डा और संथाल जनजातियाँ महुआ और कदम के वृक्षों की पूजा करती हैं |
- धार्मिक ग्रंथों में वनों को देवताओं का निवास माना गया है। आज भी समाज में पीपल, वटवृक्ष, तुलसी, नीम और आँवला की पूजा की जाती है |
- कई वन्य जीव जैसे- हाथी, शेर, बाघ, गरुड़, बंदर, उल्लू और चूहा का संबंध देवताओं के साथ जोड़कर उन्हें पवित्र माना जाता है और उनकी पूजा की जाती है।
- इन रीति-रिवाजों ने अनजाने में ही वनों और वन्य जीवों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उत्तर : वन एक महत्वपूर्ण संपदा है | इनका संरक्षण निम्नांकित उपायों से किया जा सकता है:
- 1) वनों की अंधाधुंध कटाई पर पूर्ण रोक लगाना |
- 2) अति पशुचारण पर नियंत्रण लगाना |
- 3) काटे गए वृक्षों के स्थान पर पुन: नए पेड़ लगाना (वृक्षारोपण) |
- 4) वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए नए क्षेत्रों का निर्धारण करना |
- 5) वनों को कीड़े-मकोड़ों, बीमारियों और आग (दावानल) से सुरक्षित रखना |
- 6) वनों के महत्व के बारे में लोगों में जन-चेतना पैदा करना |
उत्तर : वन्यजीवों का संरक्षण निम्नलिखित कारणों से अत्यंत आवश्यक है:
- विदेशी पर्यटक वन्य प्राणियों को देखने भारत आते हैं, जिससे भारत को विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है।
- विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षियों की चहचहाहट और सुंदरता कलाकारों और कवियों को अद्भुत रचनाओं के लिए प्रेरित करती है।
- यदि इनका संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ कई दुर्लभ पशुओं और पक्षियों को केवल चित्रों में ही देख पाएँगी।
- हिरण तथा सोहन चिड़िया जैसे अमूल्य जीव जंतु शिकारियों के कारण विलुप्त हो सकते हैं, जिससे पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ जाएगा।